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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले में भारत की नरमी के पीछे की मजबूरियाँ
- Author, शुभज्योति घोष
- पदनाम, बीबीसी बांग्ला संवाददाता
बांग्लादेश में दुर्गा पूजा पंडाल में हुए हमले के बाद कई हिंदू मंदिरों और घरों पर हमले किए गए. तोड़फोड़ और हिंसा में सात लोगों की जान भी गई और बांग्लादेश में अभी जो कुछ हो रहा है, उस पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं.
मगर इन सबके बीच भारत का रवैया थोड़ा हैरान करने वाला है. पड़ोसी देश में हिंदू समुदाय के पूजास्थलों और घरों पर कई हमले होने के बावजूद भारत ने इस पर बिल्कुल नपी-तुली प्रतिक्रिया दी है.
अतीत में जब भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, भारत ने पीड़ित हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के साथ उनके साथ एकजुटता ज़ाहिर करने के लिए दूतावास के प्रतिनिधिनियों को भेजा है. लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं किया गया.
इसके उलट भारत ने कहा है कि उन्हें हालात को काबू में करने के लिए बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के उठाए क़दमों पर भरोसा है.
भारतीय विश्लेषकों का मानना है कि भारत को शायद लगता है कि ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को और ज़्यादा शर्मिंदा करना उचित नहीं होगा इसलिए वो एहतियात के साथ प्रतिक्रिया दे रहा है.
भारत का शेख़ हसीना में भरोसा
भारत का मौजूदा रवैए की तुलना अगर अतीत की ऐसी ही घटनाओं से करें तो यह काफ़ी अलग नज़र आता है. पहले जब नासिनगर, सिलहट या मुरादनगर में ऐसी घटनाएं हुई थीं, तब भारत ने इन पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.
इतना ही नहीं, बांग्लादेश में भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों ने हिंसा प्रभावित जगहों का दौरा किया था और बांग्लादेश के हिंदुओं के अधिकारों के पक्ष में खुलकर अपनी बात रखी थी.
इनकी तुलना अगर पिछले हफ़्ते कुमिल्ला, चाँदपुर, फ़ेनी और चिटगाँव में हिंदू धर्मस्थलों और घरों पर हुए कई हमलों और हिंसा में मौतों के बाद भी भारत की प्रतिक्रिया बहुत सँभली हुई रही.
अब तक भारत ने एक देश के तौर पर इन हिंसा की घटनाओं पर सिर्फ़ एक टिप्पणी की है. पाँच दिन पहले भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा था, "हमने भी बांग्लादेश में पूजास्थलों पर हमले की परेशान करने वाली ख़बरें देखी हैं."
इस बयान के ठीक बाद ही अरिंदम बागची ने याद दिलाया की बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने हिंसा के बाद पैदा हुई स्थिति को काबू में करने के लिए सुरक्षाबल तैनात किए हैं.
बागची ने कहा था, "सरकार और नागरिक समाज के पूरे सहयोग के साथ दुर्गा पूजा संपन्न हो गई है."
वहीं, दूसरी तरफ़ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के सांसद बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमले के ख़िलाफ़ खुलकर बोल रहे हैं. वो इस बारे में सोशल मीडिया पर भी काफ़ी कुछ लिख रहे हैं लेकिन सरकार के स्तर पर इस बारे में नपी-तुली प्रतिक्रिया ही देखने को मिल रही है.
भारत चिंतित तो है लेकिन...
दिल्ली स्थित थिंक टैंक विवेकानंद इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन की फ़ेलो श्रीराधा दत्त का मानना है कि भारत बांग्लादेश में हो रही घटनाओं से चिंतित ज़रूर है लेकिन उसका इरादा सार्वजनिक रूप से बयान देकर बांग्लादेश सरकार को शर्मिंदा करना नहीं है.
वो कहती हैं, "शेख़ हसीना ने पहले ही कहा है कि इस मामले में दोषियों को माफ़ नहीं किया जाएगा. लेकिन उनके इस बयान को छोड़ दें तो भी भारत यह मानता है कि अगर कोई इस स्थिति से निबट सकता है तो वो शेख़ हसीना ही हैं."
श्रीराधा दत्त के अनुसार, "इन सारी बातों को मिलाकर देखें तो भारत का मक़सद अभी बांग्लादेश को और शर्मिंदा करना नहीं है. लेकिन जहाँ तक मुझे मामलू है, भारतीय विदेश मंत्री और विदेश सचिव बांग्लादेश के अपने समकक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं, भले ही वो इस बारे में बयान जारी न कर रहे हों."
वो कहती हैं, "भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से कम से कम एक स्टैंड लिया है. भारत अभी शेख़ हसीना या वहाँ के नेतृत्व से कभी भी और कुछ भी खुलकर कह सकता है. रिश्तों में इतना खुलापन है कि फ़ोन पर भी बातें हो जाती हैं. दोनों देशों के बीच संपर्क के सभी चैनल सक्रिय हैं.''
श्रीराधा दत्त ने बीबीसी से कहा, "इसके अलावा बांग्लादेश में थोड़े समय के अंतराल पर हिंदुओं पर जिस तरह बड़े पैमाने पर हमला हुआ वो अप्रत्याशित था. कहीं न कहीं यह ख़ुफ़िया तंत्र की नाकामी भी थी और इस कारण से भारत को झटका भी लगा."
वो कहती हैं, "हमारे थिंकटैंक में भी इसे लेकर बहुत आलोचना हो रही है. इतना बड़ा हमला हो गया और किसी को पहले इसकी भनक भी नहीं लगी. इन हमलों से जुड़े कई सवालों के जवाब अभी नहीं मिले हैं."
सुनियोजित हमले?
श्रीराधा दत्त कहती हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हिंसा की घटनाएं होती रहती हैं लेकिन इतने बड़े स्तर पर हमला होना इसके पूर्व नियोजित होने की तरफ़ इशारा करता है.
उन्होंने कहा, "बांग्लादेश में दुर्गा पूजा मंडप या मंदिरों में तोड़-फोड़ नया नहीं है लेकिन इस बार जो हुआ वैसा पहले कभी नहीं हुआ."
ढाका में भारत के उच्चायुक्त रहे पिनाकरंजन चक्रवर्ती इन हमलों के पीछे उन्हीं वजहों की आशंकाएं दुहराते हैं, जो भारत को हैं.
वो कहते हैं कि बांग्लादेश में जो हुआ वो शेख़ हसीना के ख़िलाफ़ बड़ी साज़िश का हिस्सा है और ऐसे में स्वाभाविक है कि भारत अभी बांग्लादेश के साथ खड़ा है.
हसीना के ख़िलाफ़ साज़िश?
पूर्व भारतीय राजनयिक पिनाकरंजन चक्रवर्ती ने बीबीसी से कहा है कि भारत शेख़ हसीना के ख़िलाफ़ चल रही इस बड़ी साज़िश से अच्छी तरह वाकिफ़ है.
उन्होंने कहा, "इस साज़िश का मक़सद है सांप्रदायिक कार्ड के ज़रिए शेख़ हसीना को कमज़ोर करना है. अब अगर ऐसे में भारत इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए बयान जारी करता है तो वो हसीना सरकार की निंदा होगी लेकिन इससे भारत का कोई मक़सद सफल नहीं होगा."
हालाँकि पिनाकरंजन चक्रवर्ती यह भी कहते हैं कि भारत शेख़ हसीना को यह संदेश ज़रूर दे रहा हो कि वो हालात पर जल्दी से जल्दी और प्रभावी ढंग से काबू पा लें.
वो कहते हैं, "हम शेख़ हसीना को जितना जानते हैं, वो ऐसा कर भी रही होंगी."
तालिबान की वापसी का असर?
पिनाकरंजन चक्रवर्ती का मानना है कि अफ़गानिस्तान में तालिबान की वापसी और उसमें पाकिस्तान की भूमिका ने भी बांग्लादेश की घटनाओं को प्रभावित किया है.
उन्होंने कहा, "इससे बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता है कि अफ़गानिस्तान में जो हुआ उससे बांग्लादेश के इस्लामी कट्टरपंथियों में भी जोश भर गया है. पाकिस्तान भी इन इस्लामी नेटवर्क से रिश्ता है."
चक्रवर्ती के मुताबिक़, "एक तरफ़ वो (इस्लामी कट्टरपंथी) भारत विरोधी प्रॉपेगैंडा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरी तरफ़ वो शेख़ हसीना को भारत की क़रीबी दिखाने की कोशिश भी कर रहे हैं. इसमें कुछ भी नया नहीं है. बस हाल के दिनों में ऐसे समूह बांग्लादेश में फिर से उभरे हैं."
बांग्लादेश में हिंदुओं के धर्मस्थलों और घरों पर हमले के बाद हिंसक प्रदर्शन भी हुए थे. इन प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वालों ने अपने हाथों में कुछ कार्ड और तख़्तियाँ ली हुई थीं जिन पर शेख़ हसीना के भारत से 'कुछ ज़्यादा ही क़रीब' होने का आरोप लगाया गया था.
विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों का ख़ात्मा भारत का घोषित लक्ष्य है और शेख़ हासिल पर भरोसा किए बिना इन लक्ष्य को पाना असंभव है.
शायद यही वजहें हैं कि कि पिछले 10 दिनों में बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों में सैकड़ों हिंदुओं पर हमले हुए हैं लेकिन भारत ने इस बारे में ज़्यादा कुछ नहीं कहा है.
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