9/11 हमले की सुनवाई में 20 साल बाद ग्वांतानामो बे में क्या चल रहा है?

    • Author, अलीम मक़बूल
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

9/11 हमले की मनहूस वर्षगांठ पर नए सिरे से उसके उन पांच संदिग्धों पर ध्यान देने की ज़रूरत है जिन पर उस साज़िश को रचने का आरोप है.

ख़ालिद शेख़ मोहम्मद समेत ये पांचों अभियुक्त ग्वांतानामो बे में इसी हफ़्ते कोरोना वायरस की वजह से 18 महीने के अंतराल के बाद पेश हुए.

इस प्री-ट्रायल को देखने वहां इस हमले के शिकार लोगों के रिश्तेदार, एनजीओ के सदस्य और कुछ चुनिंदा पत्रकार भी मौजूद थे.

पहले ही दुनिया से कटा हुआ महसूस करने वाले ग्वांतानामो बे और इस मुक़दमे की भयावहता को देखते हुए यह कोर्टरूम पहले ही अपने आप में अनूठा था.

नॉर्थ ब्लॉक टावर के ढहने के दौरान डॉ. एलिज़ाबेथ बेरी के भाई बिली बर्क वहां फायरमैन थे जिनकी 9/11 हमले में मौत हो गई थी.

बेरी कहती हैं, "पहली बार अदालत में आना मेरे लिए भावनात्मक रूप से बहुत ही मुश्किल था."

वे कहती हैं, "निस्संदेह मुझे पूरा यकीन नहीं था कि क्या उम्मीद की जाए क्योंकि लोगों के देखने के नज़रिए का चित्रण जिसे आप अख़बारों में देखते हैं, वो वास्तव में वह नहीं दर्शाता जो आप कोर्ट में देखते हैं. यह बहुत मुश्किल और विचलित करने वाला था."

डॉ. बेरी ने ग्वांतानामो बे में इस प्री-ट्रायल की 42 सुनवाइयों में से कई में भाग लिया है और वे कहती हैं कि वो ख़ासकर उन हमलों की 20वीं वर्षगांठ के मौके पर यहां रहना चाहती थीं ताकि यह महसूस कर सकें कि वह अपने भाई और लगभग तीन हज़ार लोगों के न्याय के लिए लड़ने वाली टीम का समर्थन कर रही हैं.

वे कहती हैं, "मैंने महसूस किया कि अन्य परिवारों के सदस्यों और अभियोजन दल के साथ मेरे भाई का सम्मान करने के लिए इससे बेहतर जगह और क्या हो सकती है."

इस सुनवाई जैसा कोई और नहीं

पूरी सुनवाई के दौरान गैलरी में बैठकर अभियुक्तों को घूरना और कभी कभी उन्हें एकटक देखना बहुत मुश्किल था.

पहली सुबह अदालत में ख़ालिद शेख़ मोहम्मद, अपने छोटे कद और नारंगी रंग की दाढ़ी के साथ लीगल टीम की बगल वाली अपनी सीट पर बैठा हुआ था.

वो और चार अन्य अभियुक्तों ने पूरी कार्रवाई के दौरान या तो अपनी लीगल टीम से या फिर आपस में एक-दूसरे से बात की.

उस दौरान ख़ालिद शेख़ मोहम्मद बडे़ इत्मिनान के साथ अपनी कुर्सी पर हाथ पसार कर मुड़ता और बार-बार ठीक पीछे बैठे वलीद बिन अतश से बात करता.

माना जाता है कि ख़ालिद ने 9/11 के हमलों के विचार की कल्पना की थी और एक अभियुक्त जब दो अपहर्ताओं को प्रशिक्षण देता था तो उस दौरान वह एनिमेटेड चर्चा की निगरानी करता था.

नक़ाब और हिजाब में बचाव पक्ष की वकील

सभी पांच अभियुक्तों के पैरों के पास एक प्लास्टिक टब में क़ाग़ज और फ़ाइलें भरी थीं, जिसमें वे अक्सर तल्लीन हो जाते थे.

9/11 के हमलावरों को मनी ट्रांसफर समेत लॉजिस्टिक मुहैया कराने के अभियुक्त अम्मार अल बलूची का प्रतिनिधित्व करने वाली अटॉर्नी अल्का प्रधान कहती हैं, "उनके पास हर तरह की चीज़ें हैं."

प्रधान कहती हैं, "उनके पास लीगल मोशन हैं जिसके बारे में वो हमसे बात करना चाहते हैं. उनके पास वकालत की वेबसाइट्स से प्रिंटआउट हैं. उदाहरण के लिए, अम्मार अक्सर हमें एमनेस्टी इंटरनैशनल के साथ चल रहे अपने अभियान से हाल के मटेरियल को प्रिंट करने को कहता है ताकि वो इस पर चर्चा कर सके. यह इस बात का संकेत है कि वो पांचों अभियुक्त चल रहे इस केस को किस तरह लड़ रहे हैं."

गौर करने वाली बात है कि 9/11 के अभियुक्तों के बचाव पक्ष की टीम में अल्का प्रधान जैसी कई महिलाएं अपने मुवक्किलों के सामने अदालत में हिजाब पहनती हैं. कुछ तो ख़ुद को अबाया या नक़ाब से भी ढक लेती हैं, जिसे वे उन सुनवाई के दौरान हटाती हैं जब अभियुक्त वहां मौजूद नहीं होते हैं.

प्रधान कहती हैं, "मैं ऐसा इसलिए करती हूँ क्योंकि इनमें से कई लड़कों को ख़ासतौर पर महिलाओं ने बहुत ही असामान्य तरीक़े से प्रताड़ित किया था. महिलाओं ने जानबूझकर यौन उत्पीड़न किए."

वे कहती हैं, "जब आप हिजाब पहनती हैं तो उनके बात करने के तरीक़े में स्पष्ट अंतर देख सकती हैं. ऐसा नहीं है कि जब मैं हिजाब पहनती हूँ तो वो मुझसे बात करने से इनकार करता है और ऐसा भी नहीं है कि उसने कभी कहा है कि आपको हिजाब पहनना चाहिए, लेकिन इससे उसके बात करने के लहजे में अंतर साफ़ देखा जा सकता है."

'मुझे खुशी है कि उनकी इतनी अच्छी देखभाल की गई'

9/11 के संदिग्धों को अदालत में बांधा नहीं गया है, उन्हें हर किसी की तरह मास्क भी पहनने को नहीं कहा गया है और उनकी लीगल टीम को उनकी संस्कृति के अनुरूप कपड़े यहां तक कि अर्धसैनिकों के स्टाइल के कपड़े भी लाने की अनुमति है.

इस हफ़्ते अभियुक्त रामज़ी बिन अलसिब ने सुनवाई के दौरान ओसामा बिन लादेन के जैसी जैकेट पहनी थी, जिसे ख़ालिद शेख़ मोहम्मद सहित उनके साथी अभियुक्त पहले की सुनवाइयों के दौरान पहन चुके हैं.

अपने भाई की मौत में भूमिका निभाने के आरोपियों के बारे में एलिज़ाबेथ बेरी कहती हैं कि "मुझे खुशी है कि उनकी इतनी अच्छी देखभाल की जाती है." हालांकि इन अभियुक्तों को देखकर जो चोट उन्हें पहुंची है वो साफ़ उनके चेहरे पर दिखती है.

वे कहती हैं, "मुझे लगता है कि हम इन लोगों की बहुत अच्छी देखभाल करते हैं और यह स्पष्ट है कि उन्हें हमसे भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं. लेकिन यह प्रक्रिया का हिस्सा है. यह स्वीकार करने वाली बात है कि एक फ़ैसला आने तक यही होना चाहिए."

वैसे फ़ैसला बहुत दूर की कौड़ी लगती है. क्योंकि मुक़दमें के शुरुआत की तारीख़ अभी तक तय नहीं की गई है.

इस हफ़्ते हमने सुना कि बचाव पक्ष यहां इस प्री-ट्रायल को चलाने पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि उन पर सिविल कोर्ट नहीं सैन्य अदालत में मुक़दमा चलाया जा रहा है. उनका कहना था कि उन पर युद्ध अपराध करने का आरोप नहीं लगाया जा सकता क्योंकि तब कोई युद्ध नहीं था और इसलिए सैन्य अदालत उचित नहीं है.

यातना कासवाल

ग्वांतानामो बे में अभियुक्तों को दी गई यातना का मुद्दा और अमेरिकी अधिकारियों की इसके इस्तेमाल पर गोपनीयता ने भी, इस तर्क के साथ कि अभियुक्तों के साथ क्या किया गया था, इस सुनवाई पर एक बड़ा असर डाला है.

अम्मार बलूची की अटॉर्नी अल्का प्रधान कहती हैं, "अगर हम इस पहेली को जारी रखते हैं तो इस वक़्त निष्पक्ष सुनवाई का कोई तरीक़ा नहीं है."

वे कहती हैं, "हमारे पास सैकड़ों मोशन लंबित हैं क्योंकि सरकार ने बार-बार ये कहा है कि वो हमें इस बारे में बुनियादी जानकारी नहीं देगी कि इन लड़कों को कहाँ पकड़ा गया, किसने उनसे बात की, उनसे क्या पूछा गया और किस तरह से."

हमलों के पीड़ितों के परिजनों के लिए यह निराशाजनक है कि 20 साल बाद भी यह मामला इस धीमी गति से चल रहा है.

हफ़्ते के अंतिम प्री-ट्रायल सत्र के बाद एलिज़ाबेथ बेरी कहती हैं, "अमेरिका पर नहीं, मुक़दमा आतंकवादियों पर चल रहा है."

वे कहती हैं, "जब मैं यह सुनती हूं कि हमने उन परिवारों के सदस्यों को खो दिया है कि जो इस फ़ैसले का इंतज़ार करते रहे और उसे कभी नहीं देख सके, तो निराश हो जाती हूँ. लेकिन मैं आशावादी हूँ क्योंकि हमने सुनवाई एक बार फिर शुरू की है और आगे बढ़ रहे हैं."

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