अफ़ग़ानिस्तान: अल-क़ायदा की तालिबान को बधाई, मुसलमानों से कहा-मत करो समझौता

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अल-क़ायदा ने तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान पर दोबारा कब्ज़ा करने को लेकर बधाई दी है.

अल-क़ायदा की दक्षिण एशिया इकाई ने एक बयान जारी किया है और अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण का स्वागत किया है.

अल-क़ायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) नाम वाले इस समूह ने अपने बधाई संदेश में दुआ की है कि तालिबान अफ़ग़ानिस्तान में कामयाबी के साथ शरिया क़ानून लागू कर पाएं.

उर्दू में भाषा में लिखे इस बयान को अल-क़ायदा का समर्थन करने वाले एक चैनल ने मैसेजिंग ऐप टेलिग्राम पर 23 अगस्त को शेयर किया.

'मुसलमानों को संदेश'

इस बयान के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय और तालिबान को संबोधित किया गया है. बयान के शुरू में 'इस्लामिक अमीरात' (तालिबान) की जीत का स्वागत किया गया है.

इसके अलावा बयान में अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को शुक्रिया भी कहा गया है.

बयान में 'अमेरिकी आक्रमणकारियों और उनके सहयोगियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में अफ़ग़ान लोगों के बलिदान और तकलीफों का सामना' करने के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया गया है.

इस बयान में इस बात का भी ज़िक्र किया गया है कि अफ़ग़ानिस्तान को 'सुपरपावर्स का कब्रगाह' कहा जाता है.

अल- क़ायदा ने तालिबान के हाथों 'अमेरिका को मिली हार' की तुलना पहले अफ़ग़ानों के हाथों ब्रिटेन और सोवियत संघ की हार से की है.

बयान में ये भी कहा गया है कि तालिबान की जीत दुनियाभर के मुस्लिम समुदाय के लिए एक संदेश है कि हथियारबंद जिहाद ही आक्रमणकारियों को हराने का एकमात्र विकल्प है.

बयान में ये भी कहा गया है कि तालिबान की जीत ये दिखाती है कि मुसलमानों को अपने मूल्यों और सिद्धांतों से कभी भी समझौता नहीं करना चाहिए.

इस समूह ने लोकतंत्र, बातचीत और कूटनीति की भी निंदा की है.

बधाई पर बधाई

अल क़ायदा से जुड़े कई अन्य संगठनों ने भी अफ़ग़ानिस्तान में नियंत्रण के लिए तालिबान को बधाई दी है.

अल क़ायदा इन नॉर्थ अफ़्रीका (एक्यूआईएम) और उसकी साहेल इकाई जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमिन (जेएनआईएम) ने एक साझा बयान जारी किया था, जो 23 अगस्त को प्रकाशित हुआ था.

इसी दिन अल क़ायदा समर्थक एक पुराने मीडिया आउटलेट ग्लोबल इस्लामिक मीडिया फ़्रंट (जीआईएमएफ़) ने एक पन्ने के बयान में अफ़ग़ान चरमपंथियों की सराहना की थी.

अल क़ायदा का पहला आधिकारिक बयान 18 अगस्त को यमन इकाई की ओर से आया था, जिसका नाम है अल क़ायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला (एक्यूएपी)

इस संगठन ने तालिबान के नेतृत्व में शरिया शासन की स्थापना के लिए दुआ की थी.

अगर इस्लामिक स्टेट को अपवाद मान लें तो अन्य जिहादी संगठनों और इनसे जुड़े मीडिया में तालिबान को बधाई देने वाले बयान लगातार आ रहे हैं.

कई जिहादी संगठन काबुल पर तालिबान की जीत का जश्न ऑनलाइन भी मना रहे हैं.

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