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अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान के काबुल में घुसने के बाद एयरपोर्ट की ये तस्वीरें बता रही हैं अव्यवस्था का आलम
अफ़ग़ानिस्तान के काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आ रही तस्वीरों और वीडियो से वहाँ की अव्यवस्था और लोगों में अफ़रा-तफ़री का अंदाज़ा हो रहा है. राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के देश छोड़ने और तालिबान के काबुल में घुसने के बाद अफ़ग़ानिस्तान से जाने वालों की लाइन लग गई थी.
फ़िलहाल काबुल एयरपोर्ट से सभी व्यावसायिक उड़ानों को रोक दिया गया है. इसलिए देश छोड़कर जाने वाले लोग एयरपोर्ट पर फँसे हुए हैं.
ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक़ काबुल के हामिद करज़ई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण है और स्थिति को काबू करने के लिए अमेरिकी सैनिकों ने हवा में गोलियाँ भी चलाई हैं.
अमेरिका और अन्य देश अपने-अपने दूतावास के कर्मचारियों को वहाँ से निकालने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिका ने इसके लिए सैनिक हेलिकॉप्टर्स भी भेजे हैं.
प्रत्यक्षदर्शियों ने बीबीसी को बताया है कि काबुल एयरपोर्ट पर कम से कम दो लोगों की मौत हुई है.
हवाई अड्डा अमेरिकी सैनिकों के नियंत्रण में है और सोमवार सुबह वहां बढ़ती भीड़ को तितर बितर करने के लिए सैनिकों ने हवाई फ़ायरिंग की थी.
रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी का कहना है कि मरने वालों की संख्या अधिक हो सकती है. एक चश्मदीद ने कहा है कि उसने अधिकारियों को एक वाहन में पांच शवों को डालते देखा है.
एक अन्य व्यक्ति ने बताया है कि ये कहना मुश्किल है कि ये मौतें गोली लगने से हुईं या भगदड़ में कुचले जाने की वजह से.
एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि अमेरिकी सैनिकों को काबुल एयरपोर्ट पर हवा में गोलियां चलानी पड़ीं ताकि आम लोगों को हवाई जहाज़ में चढ़ने से रोका जा सका.
22 साल के एक छात्र ने बीबीसी को बताया- मुझे हवाई अड्डे तक पहुँचने में पाँच घंटे लगे. मेरे पैर में काफ़ी दर्द है और मुझे खड़े होने में परेशानी हो रही है. काबुल सैन्य शहर जैसा लग रहा था. लोग पारंपरिक कपड़े पहनकर और हाथों में बंदूक लिए खड़े थे और वे हवा में गोलियाँ चला रहे थे. मुझे उन दिनों की याद आई, जिसके बारे में मेरे माता-पिता मुझे बताते थे.
अफ़ग़ानिस्तान का ये युवा छात्र तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में मास्टर्स डिग्री की पढ़ाई शुरू करने वाला है. वो अपना कोर्स शुरू होने से पहले अपने माता-पिता के पास कुछ वक़्त बिताने आया था. लेकिन सरकार की हालत देखकर उसे आश्चर्य है.
भविष्य को लेकर चिंता
वो कहते हैं- अब जबकि मैं तुर्की जा रहा हूँ. मुझे अपने परिवार की चिंता है. उनके पास भागने का कोई रास्ता नहीं है. मैं कोई भविष्य नहीं देख पा रहा हूँ.
अफ़ग़ानिस्तान में सोमवार तड़के शूट किए गए एक वीडियो को पत्रकार बिलाल सरवरी ने ट्वीट किया है.
अमेरिका और अन्य देश अपने दूतावास के कर्मचारियों को अफ़ग़ानिस्तान से निकालने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा डरे हुए अफ़ग़ान लोग भी देश छोड़कर जाने की कोशिश कर रहे हैं.
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया है कि कैसे काबुल एयरपोर्ट के लाउंज में अफ़रातफ़री का आलम था, क्योंकि लोगों का कहना है कि अधिकारियों और हाई प्रोफ़ाइल लोगों के लिए गुप्त रूप से बोर्डिंग पास छापे जा रहे हैं.
वे बताते हैं, "हमने यहाँ आठ घंटे तक इंतज़ार किया, फिर एयरपोर्ट के कर्मचारी अपना काउंटर छोड़कर जाने लगे. कोई सुरक्षा जाँच नहीं है. हम जब वहाँ से आगे गए तो देखा कि शीशे का एक बड़ा गेट तोड़ दिया गया है. लोग हवाई जहाज़ की ओर दौड़ रहे हे थे. एकदम भगदड़ जैसा माहौल था."
अमेरिका ने अपने दूतावास के कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए सैनिक हेलिकॉप्टर्स भेजे हैं.
कई घंटे तक काबुल के बाहर इंतज़ार कर रहे तालिबान लड़ाकों को रविवार को शहर में घुसने का आदेश मिला.
तालिबान के प्रवक्ता के मुताबिक़ तालिबान ने काबुल में घुसने का फ़ैसला इसलिए किया ताकि शहर में अव्यवस्था और लूटपाट न हो. क्योंकि सरकारी सुरक्षाकर्मी वहाँ से चले गए थे.
बदले की कार्रवाई और हिंसा का डर
जैसे ही तालिबान लड़ाकों ने काबुल में घुसना शुरू किया, सैकड़ों लोग अपना सामान लेकर शहर छोड़ने की कोशिश करने लगे.
कई लोग काबुल इसलिए छोड़ना चाह रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि तालिबान बदले की कार्रवाई करेंगे और शहर में हिंसा का दौर शुरू हो सकता है.
शनिवार को ही कई परिवार काबुल के हासा-ए-अवाल पार्क स्थिति शरणार्थी शिविर पहुँच गए थे.
35 वर्षीय नूरिया कुंदुज़ छोड़कर इसलिए आई हैं क्योंकि रॉकेट हमले में उनका घर नष्ट हो गए और उनका एक बच्चा घायल भी हो गया था.
कुंदुज़ की लड़ाई में बेघर हुईं महिलाओं ने काबुल के एक मस्जिद में पनाह ले रखी है.
कॉपी - पंकज प्रियदर्शी
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