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मोहम्मद इस्माइल ख़ान: अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को टक्कर देने वाला 'बूढ़ा शेर'
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, ख़बरों की रिपोर्टिंग और विश्लेषण
मोहम्मद इस्माइल ख़ान, जंग के मैदान का पुराना नाम, अफ़ग़ानिस्तान के हेरात प्रांत की लड़ाई में बड़ा चेहरा बनकर सामने आया है.
पिछले दो हफ़्तों में ख़ान ने हथियार उठाकर तालिबान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई का नेतृत्व किया है. नतीजतन कई अफ़ग़ान समाचार एजेंसियों ने हेरात शहर के बचे रहने का श्रेय ख़ान और उनके लड़ाकों को दिया है.
निजी अख़बार अरमान-ए-मेली ने अपने संपादकीय में लिखा, "अगर आमिर इस्माइल ख़ान और उनके कमांड में काम करने वाले उनके वफ़ादार नहीं होते, तो हेरात तालिबान के क़ब्ज़े में होता... इस्माइल ख़ान और 'सार्वजनिक विद्रोही बलों' की वीरता भरी तेज़ प्रतिक्रिया ने ख़तरे को दूर कर दिया और तालिबान को भारी नुक़सान पहुंचाया."
'बूढ़ा शेर'
मोहम्मद इस्माइल ख़ान, जिन्हें अब उनके समर्थक 'बूढ़ा शेर' कहते हैं एक जातीय ताजिक (ताजिकिस्तान से ताल्लुक रखने वाले) हैं, और इस समूह के सदस्यों का उन्हें पुरज़ोर समर्थन हासिल है.
उनका जन्म 1946 में हेरात के शिंदांद ज़िले में हुआ था और वह लंबे समय से जमीयत-ए-इस्लामी राजनीतिक दल के प्रमुख सदस्य हैं.
1978 में, अफ़ग़ान सेना में एक कप्तान के तौर पर, उन्होंने काबुल में कम्युनिस्ट सरकार के ख़िलाफ सबसे बड़े विद्रोह की योजना तैयार की थी और 1979 में अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियत आक्रमण के बाद, वह एक प्रमुख मुजाहिदीन कमांडर बन गए.
1980 के दशक के दौरान से सोवियत सेना की वापसी तक, ज्यादातर पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान में, उन्होंने एक बड़ी मुजाहिदीन सेना को नियंत्रित किया.
जब भागना पड़ा ईरान
1992 से 1995 तक ख़ान हेरात के गवर्नर रहे. तालिबान के प्रांत पर कब्ज़ा करने के बाद, उन्हें ईरान भागने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
इसके तुरंत बाद, उन्हें तालिबान ने बंदी बना लिया, लेकिन 2000 में वो भागने में कामयाब रहे. इसके बाद वे तालिबान विरोधी उत्तरी गठबंधन में शामिल हो गए.
जब 2001 में अफ़ग़ानिस्तान पर अमेरिकी आक्रमण ने तालिबान शासन को समाप्त कर दिया, तो वह एक बार फिर हेरात के गवर्नर बने.
ख़ान के समर्थक उनके शासन के दौरान प्रांत में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और सरकारी सेवाओं में बड़े सुधारों की तारीफ़ करते हैं. वहीं उनके विरोधी सीमा शुल्क राजस्व के माध्यम से जुटाए गए पैसे को केंद्र सरकार तक नहीं पहुंचा पाने में विफल रहने के लिए उनकी आलोचना करते हैं.
2005 में, हामिद करज़ई सरकार में ख़ान को जल और ऊर्जा मंत्री नियुक्त किया गया था, वो पद पर 2013 तक रहे.
2014 में, ख़ान और अब्दुल रब रसूल सय्यफ़ ने संयुक्त टिकट पर राष्ट्रपति चुनाव लड़ा, लेकिन वो हार गए.
उन्हीं के शब्दों में
पिछले कुछ वर्षों में, और विशेष रूप से अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की हिंसा बढ़ने के बाद ख़ान अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका की निंदा करते रहे हैं
एक स्थानीय प्राइवेट टीवी चैनल ने उन्हें 4 अगस्त को कहते हुए दिखाया कि "मैं अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को स्पष्ट रूप से बताना चाहता हूं कि यह युद्ध तालिबान और अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के बीच नहीं है, यह अफ़ग़ानिस्तान राष्ट्र के ख़िलाफ़ पाकिस्तान का युद्ध है. तालिबान एक उपकरण है और ये भाड़े के सैनिकों की तरह काम करते हैं,"
इसी तरह, मार्च 2017 में एरियाना न्यूज़ टीवी चैनल से बात करते हुए, ख़ान ने कहा, "बेहतर है कि तालिबान को इस सच्चाई का एहसास हो कि चीन, रूस, ईरान, पाकिस्तान और अन्य देशों का समर्थन प्राप्त करने से उन्हें कुछ भी हासिल नहीं होगा, जब तक कि सभी अफ़ग़ान एक संयुक्त अफ़ग़ानिस्तान बनाने का फ़ैसला एक साथ न करें"
जुलाई 2021 में जैसे ही तालिबान हेरात शहर के क़रीब पहुंचा, उन्होंने प्रांत के लोगों के साहस की सराहना की. उन्होंने कहा, "हमारे लोगों का कहना सही है कि उन्हें (तालिबान को) शहर के क़रीब नहीं आना चाहिए था. ज़िलों के पतन ने युद्ध को शहर के बिल्कुल पास ला दिया है. लेकिन हमारे लोगों, भाइयों और बहनों के उठाए गए क़दम (तालिबान के ख़िलाफ़ विद्रोह) ने काफ़ी मदद की है."
हेरात में तालिबान से लड़ने वाले लोगों को पर्याप्त समर्थन प्रदान करने में विफल रहने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए, ख़ान ने 4 अगस्त को एरियाना न्यूज़ टीवी चैनल से कहा, "वे (सरकार) अपने वादों को ठीक से पूरा नहीं करते हैं. उदाहरण के लिए, हथियार और उन्होंने हमें जो सुविधाएं देने का वादा किया था, वह अब तक हमें नहीं मिली. हज़ारों युवा हेरात शहर की रक्षा के लिए तैयार हैं."
दूसरे क्या कहते हैं
हेरात में तालिबान के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान का केंद्र सरकार और प्रमुख अफ़ग़ान राजनीतिक हस्तियों ने खुलकर स्वागत किया है.
हाई काउंसिल ऑफ़ नेशनल रिकन्सिलिएशन के चेयरमेन अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने कहा, "हम अपने मुजाहिद भाई आमिर मोहम्मद इस्माइल ख़ान, नागरिकों और सैन्य अधिकारियों के युद्ध नेतृत्व और साहस की सराहना करते हैं, ... हम इस मुद्दे पर अपने लोगों के साथ पूरी ताक़त के साथ खड़े हैं."
जमीयत-ए इस्लामी के नेता सलाहुद्दीन रब्बानी ने टिप्पणी की, "इन दिनों, नायक अमीर मोहम्मद इस्माइल खान के नेतृत्व में हेरात में हो रहा वीर लोगों का प्रतिरोध गर्व की बात है और हम इसकी सराहना करते हैं. यह प्रतिरोध बताता है कि इस संवेदनशील मोड़ पर लोग अपनी, अपनी गरिमा और मूल्यों की रक्षा कर सकते हैं."
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)
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