तालिबान का अफ़ग़ानिस्तान की प्रांतीय राजधानी पर कब्ज़ा कितनी बड़ी जीत है?

तालिबान के लड़ाकों ने अफ़ग़ानिस्तान के एक प्रांत की राजधानी पर क़ब्ज़ा कर लिया है और राजधानी काबुल में सरकार के एक शीर्ष मीडिया अधिकारी की हत्या कर दी है.

अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सुरक्षाबलों के जाने के बाद सुरक्षा हालात लगातार ख़राब हो रहे हैं और तालिबान बड़े हिस्सों पर क़ब्ज़ा कर रहा है.

दक्षिणी प्रांत निमरोज़ के एक पुलिस प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा है कि तालिबान ने प्रांतीय राजधानी ज़रांज पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

उन्होंने कहा कि काबुल की पश्चिमी देशों के समर्थन वाली सरकार शहर को सुरक्षित करने के लिए सेना नहीं भेज सकी, जिसकी वजह से तालिबान का कब्ज़ा हो गया.

वहीं तालिबान के एक प्रवक्ता ने ट्विटर पर जानकारी दी है कि तालिबान ने प्रांत को पूरी तरह मुक्त कर लिया है. उन्होंने दावा किया कि गवर्नर निवास, पुलिस मुख्यालय और दूसरी सरकारी इमारतों पर अब तालिबान का नियंत्रण है.

अब तक किसी भी प्रांत की राजधानी तालिबान गुटों के कब्जे में नहीं आई थी. लेकिन गुरुवार को ज़रंज पर तालिबान के लड़ाकों का कब्जा हो गया है.

इसके साथ ही पश्चिम में हेरात और दक्षिण में लश्कर गाह में भारी संघर्ष जारी है.

ईरान की सीमा से लगता हुआ ज़रंज एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है. आसपास के ज़िलों पर कब्जा करने के बाद तालिबान लड़ाके लगातार इस शहर पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे.

दो आधिकारिक सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि इस शहर पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया गया है. वहीं, एक अन्य सूत्र ने बताया है कि सिक्यॉरिटी ऑफिस के नेशनल डायरेक्ट दफ़्तर के पास संघर्ष जारी है.

निमरोज़ पुलिस विभाग के एक अनाम प्रवक्ता ने रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी को बताया है कि तालिबान के लड़ाके इस शहर पर कब्जा करने में सक्षम हुए क्योंकि सरकार की ओर से मदद किए जाने में कमी थी.

वहीं शुक्रवार शाम को एक शीर्ष अफ़ग़ान जनरल ने हवाई हमलों में निमरोज़ में शीर्ष तालिबान कमांडर और उनके चौदह सहयोगियों के मारे जाने का दावा किया.

हालांकि जनरल सामी सादात के इस दावे की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी है. जनरल सामी अफ़ग़ानिस्तान की सेना की 215 मायवांड अफ़ग़ान आर्मी कोर के कमांडर हैं.

सत्ता की ओर तालिबान

तालिबान को 20 साल पहले अमेरिकी सैन्य बलों ने सत्ता से हटा दिया था. अब अमेरिका के जाने के बाद तालिबान फिर से अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामी शासन लागू करने का अभियान चला रहा है. हाल के महीनों में तालिबान ने देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया है.

ज़रांज पहली प्रांतीय राजधानी है जो तालिबान के क़ब्ज़े में आ गई है.

तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान को पड़ोसी देशों से जोड़ने वाली अहम सीमा चौकियों पर भी कब्ज़ा किया है और पश्चिम में हेरात और दक्षिण में कंधार जैसे बड़े शहरों पर कब्ज़ा करने के प्रयास तेज़ किए हैं.

इसी बीच न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की अफ़ग़ानिस्तान के लिए विशेष दूत डेबोरा ल्योंस ने तालिबान के राजनीतिक समाधान के वादे पर सवाल उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा है कि युद्ध अब ख़तरनाक और विनाशकारी स्थिति में पहुँच गया है.

उन्होंने कहा कि ये हाल के सालों के सीरिया और या कुछ दशक पहले के सारायेवो की याद दिला रहा है.

वहीं संयुक्त राष्ट्र में रूस के दूत वासिली नेबेनज़िया ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के युद्ध में घिर जाने का ख़तरा अब वास्तविक लग रहा है.

वहीं तालिबान से जुड़े सूत्रों का कहना है कि समूह ज़रांज पर जीत का जश्न मना रहा है. इससे तालिबान लड़ाकों का हौसला बढ़ा है.

ज़रांज ईरान की सीमा के क़रीब है और इसका रणनीतिक महत्व भी है.

सरकार के लोगों की हत्या

वहीं काबुल में तालिबान ने सरकार के मीडिया और सूचना विभाग के प्रमुख दावा ख़ान मेनापाल की हत्या कर दी है. तालिबान लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी की सरकार को कमज़ोर करने के लिए राजनीतिक हत्याएं भी कर रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका के राजदूत रॉस विलसन ने मेनापाल की मौत पर दुख ज़ाहिर करते हुए कहा है कि मेनापाल अफ़ग़ानिस्तान के सभी नागरिकों को सच्ची जानकारियां दिया करते थे.

उन्होंने ट्विटर पर कहा, 'ये हत्याएं अफ़ग़ानिस्तान में मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला हैं.'

वहीं व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा गया है कि तालिबान के इस तरह के कृत्य उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं दिला पाएंगे. तालिबान वैश्विक मंच पर राजनीतिक मान्यता की आकांक्षा रखता हैं.

व्हाइट हाऊस के प्रेस सचिव जेन साकी ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से कहा, ''उन्हें ये मार्ग छोड़ना होगा. उन्हें अपने सैन्य अभियान की जगह ये ऊर्जा शांति प्रक्रिया में लगानी होगी.''

हाल के दिनों में तालिबान ने कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, अधिकारियों, जजों और नेताओं की हत्या की है. ये लोग अफ़ग़ानिस्तान की उदारवादी इस्लामी सरकार को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. माना जा रहा है कि तालिबान विरोध की सभी आवाज़ों को ख़त्म कर देना चाहता है.

अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक़ तालिबान ने जुमे की नमाज़ के दौरान मेनापाल की हत्या की है.

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मीरवाइस स्तानिकज़ाई ने कहा, ''मेनापाल एक युवा थे जो दुश्मनों के प्रॉपेगैंडा के ख़िलाफ़ एक चट्टान की तरह खड़े थे. वो अफ़ग़ानिस्तान सरकार के प्रमुख समर्थक थे.''

दूसरी तरफ़ तालिबान ने सीमावर्ती इलाक़ों में अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए सरकारी सैनिकों और सरकार समर्थक लड़ाकों पर हमले तेज़ किए हैं.

जोवज़ान प्रांत में अब्दुल रशीद दोस्तम मिलिशिया और सरकारी सेना के कम से कम दस जवान तालिबान के हमले में मारे गए.

जोवज़ान के डिप्टी गवर्नर अब्दुल क़ादिर मालिया के मुताबिक़ तालिबान ने इस सप्ताह प्रांत की राजधानी के बाहरी हिस्सों पर हमले किए हैं.

कितनी बड़ी जीत

तालिबान गुट ने ट्विटर पर एक पोस्ट करके अपनी जीत का एलान किया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए एक ग्रुप कमांडर ने कहा, "ये एक शुरुआत है और देखिए कि जल्द ही हमारी झोली में कितने प्रांत गिरते हैं.

इसी बीच कुछ ख़बरें आ रही हैं कि अधिकारियों को उनके परिवारों के साथ ईरान जाने की अनुमति दी जाए.

हालांकि, सरकार ने अब तक ज़रंज से अपना नियंत्रण ख़त्म होने की पुष्टि नहीं की है.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में आम लोग सरकारी दफ़्तरों से सामान लूटते हुए देखे जा रहे हैं.

ज़रंज में जीत हासिल करना तालिबान लड़ाकों के अभियान को गति दे सकता है. अमेरिकी सेनाओं के वापस जाने की ख़बर आने के बाद से तालिबान के लड़ाकों ने अपना अभियान तेज़ कर दिया था.

इसके साथ ही शुक्रवार को तालिबान लड़ाकों ने काबुल में नमाज़ के दौरान अफ़ग़ान सरकार के मीडिया चीफ़ की हत्या कर दी है.

तालिबान लड़ाकों की ओर से कहा गया है कि दवा ख़ान मनिपाल को "उनके कर्मों का फल" मिला है.

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