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अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान ने ईरान और तुर्कमेनिस्तान की सीमाओं से लगी चौकियों पर किया क़ब्ज़ा
अधिकारियों के मुताबिक़, तालिबान ने ईरान और तुर्कमेनिस्तान की सीमाओं से लगी प्रमुख सीमा चौकियों पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
तालिबान लड़ाकों का कहना है कि उन्होंने ईरान के पास इस्लाम क़ला और तुर्कमेनिस्तान की सीमा पर तोरघुंडी शहरों पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
वीडियो फ़ुटेज में तालिबान के लड़ाके कस्टम दफ़्तर से अफ़ग़ानिस्तान का झंडा उतारते दिख रहे हैं.
अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों को हटा रहा है. इस दौरान तालिबानी लड़ाके देश के बड़े हिस्से को तेज़ी से अपने नियंत्रण में ले रहे हैं.
तालिबान का कहना है कि उसके लड़ाकों ने देश के 85 फ़ीसदी हिस्से पर नियंत्रण कर लिया है. इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है. सरकार ने इसका खंडन किया है.
वहीं अन्य अनुमानों के मुताबिक़ तालिबान इस समय अफ़ग़ानिस्तान के 400 ज़िलों में से एक तिहाई पर नियंत्रण रखता है. इसमें पश्चिम में ईरान की सीमा से लेकर देश के दूसरी तरफ चीन की सीमा तक का इलाक़ा शामिल है.
अमेरिकी सैनिकों की वापसी
इसी सप्ताह अमेरिकी सैनिक चुपचाप बगराम एयरफ़ील्ड को छोड़कर चले गए. ये हवाई अड्डा अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी अभियान का केंद्र रहा है. यहाँ एक समय दसियों हज़ार सैनिक रहते थे.
वहीं अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों ने इस्लाम क़ला और तोरघुंडी के तालिबान के हाथों में जाने की पुष्टि की है.
इस्लाम क़ला सीमा चौकी ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच होने वाले व्यापार का केंद्र भी है.
यहाँ से सरकार को हर महीने लगभग 2 करोड़ डॉलर का राजस्व मिलता है. वहीं तोरघुंडी शहर तुर्कमेनिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच व्यापार की अहम कड़ी है.
दोबारा नियंत्रण की कोशिश
अफ़ग़ान सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक़ सरकारी सैन्य बल इन दोनों अहम शहरों को फिर से अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहे हैं.
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक़ अरियान ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा कि इस इलाक़े में बॉर्डर यूनिट समेत सभी अफ़ग़ानी सुरक्षा बल मौजूद हैं और दोनों शहरों पर नियंत्रण करने की कोशिश की जा रही है.
वहीं तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद का कहना है कि इस्लाम क़ला पूरी तरह तालिबान के नियंत्रण में है.
रिपोर्टों के मुताबिक़ तालिबान लड़ाकों ने बिना किसी लड़ाई के हेरात के पाँच ज़िलों पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
इसी सप्ताह एक हज़ार से अधिक अफ़ग़ानी सैनिक जान बचाकर ताजिकिस्तान भाग गए थे.
ताजिकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान के उत्तर-पूर्व में स्थित है. इस इलाक़े में भी तालिबान का प्रभाव बढ़ रहा है.
अमेरिका और रूस क्या बोले
रूस ने शुक्रवार को कहा था कि तालिबान ने तेज़ी से अफ़ग़ानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा के दो-तिहाई इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जख़ारोवा ने कहा है कि रूस ने अफ़ग़ानिस्तान में सभी पक्षों से शांति बरतने की अपील की है.
इसके कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने के अपने फ़ैसले का बचाव किया था.
बाइडन ने कहा था कि मैं अमेरीकियों की अगली पीढ़ी को लड़ने के लिए अफ़ग़ानिस्तान नहीं भेजूँगा. हमारे पास अफ़ग़ानिस्तान में कुछ और नतीजा हासिल करने की कोई व्यवहारिक उम्मीद नहीं है.
अमेरिका बीस साल बाद अफ़ग़ानिस्तान से वापस लौट रहा है.
बाइडन ने ये भी स्वीकार किया कि अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के पूरे देश पर नियंत्रण करने की संभावना भी बहुत कम है.
आगे क्या-क्या हो सकता है?
कुछ अमेरिकी सुरक्षा विश्लेषकों को आशंका है कि तालिबान अगले छह महीने के भीतर अफ़ग़ानिस्तान पर नियंत्रण कर सकता है.
वहीं अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी दावा करते रहे हैं कि अफ़ग़ान सुरक्षा बल तालिबान से निबटने में सक्षम हैं.
अफ़ग़ानिस्तानी सुरक्षा बलों ने कुछ इलाक़ों को तालिबान के नियंत्रण से मुक्त भी किया है.
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक़ सैन्यबलों ने बुधवार को पश्चिमी शहर क़ला-ए-नौ को तालिबान के क़ब्ज़े से छुड़ा लिया.
ये पहला बड़ा प्रमुख शहर था जिस पर तालिबान ने अपने ताज़ा हमलों के दौरान क़ब्ज़ा किया था.
ब्रिटेन के सेना प्रमुख जनरल सर निक कार्टर ने बीबीसी के टुडे प्रोग्राम से बात करते हुए कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में तीन तरह के हालात पैदा हो सकते हैं.
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की सरकार अपना नियंत्रण बरक़रार रख सकती है, जैसा कि इस समय सभी प्रांतों की राजधानियाँ उसके पास हैं.
उन्होंने कहा कि दूसरा, परिदृश्य, जिसे मैं दुखद मानता हूँ, उसमें देश टूट जाएगा और सरकार गिर जाएगी. इसमें आप तालिबान को देश के विभिन्न हिस्सों पर नियंत्रण करते हुए देखेंगे, और दूसरे नस्लीय और जाति समूह देश के दूसरे हिस्सों पर नियंत्रण रखेंगे, जैसा कि हमने 90 के दशक में देखा था.
इसके बाद उन्होंने कहा कि तीसरा परिदृश्य, अधिक आशावादी है, जिसमें आप राजनीतिक समझौता और बातचीत होते देखेंगे. अमेरिकी मिशन अधिकारिक तौर पर 31 अगस्त को समाप्त हो जाएगा, लेकिन पहले से ही अधिकतर विदेशी सैनिक लौट चुके हैं.
अफ़ग़ानिस्तान में सरकार और तालिबान के बीच शांति-वार्ता चल रही है. बीच-बीच में इसमें गतिरोध आता रहा है. अभी तक इनसे कुछ ठोस नहीं निकल पाया है.
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