पाकिस्तान और तुर्की बच्चों को सेना में कर रहे हैं भर्ती? – पाकिस्तान उर्दू प्रेस रिव्यू

    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बच्चों को सेना में भर्ती किये जाने संबंधी अमेरिकी रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए पाकिस्तान ने इस लिस्ट से अपना नाम निकालने की माँग की है.

दरअसल अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान और तुर्की बच्चों को सेना में शामिल कर रहे हैं.

इस पर पाकिस्तान ने सख़्त विरोध दर्ज किया है. अख़बार दुनिया के अनुसार, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने से पहले अमेरिका की तरफ़ से किसी भी सरकारी संस्था से कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया और ना ही कोई जानकारी माँगी गई है जिसकी बुनियाद पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है.

प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने ना तो किसी नॉन-स्टेट एक्टर का समर्थन किया है और ना ही पाकिस्तान की किसी संस्था ने कम उम्र के बच्चों को सेना में भर्ती किया है या उनका इस्तेमाल किया है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि पिछले एक साल में पाकिस्तान ने ऐसे कई क़ानून बनाए हैं और ऐसे कई फ़ैसले किए हैं जिनमें बच्चों की मानव-तस्करी, जबरन भर्ती और प्रवासियों की तस्करी को रोकने के लिए क़दम उठाए गए हैं.

बयान में कहा गया है कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय से माँग की गई है कि वो इस रिपोर्ट में पाकिस्तान के बारे में जो बेबुनियाद दावे किए गए हैं, उन पर पुनर्विचार करे.

इस रिपोर्ट के आधार पर अमेरिका दूसरे देशों को दी जाने वाली सैन्य मदद और शांति कार्यक्रमों के लिए दी जाने वाली मदद पर पाबंदी लगा सकता है.

साल 2021 में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने जो रिपोर्ट निकाली है उसमें जिन देशों पर कम उम्र के बच्चों को सेना में भर्ती करने के आरोप लगाये गए हैं, उनमें पाकिस्तान और तुर्की के अलावा, अफ़ग़ानिस्तान, बर्मा, ईरान, इराक़, लीबिया, माली, कॉन्गो, नाइजीरिया, सोमालिया, सुडान, सीरिया, वेनेज़ुएला और यमन शामिल हैं.

पाकिस्तान और तुर्की को पहली बार इस लिस्ट में शामिल किया गया है.

अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामिक स्टेट के मज़बूत होने पर रूस की चिंता

अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी सैनिकों की वापसी और वहाँ ख़ुद को इस्लामिक स्टेट (आईएस) कहने वाले चरमपंथी संगठन के मज़बूत होने पर रूस ने चिंता जताई है.

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लॉवरोव ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर यह बातें कहीं. पाकिस्तान से छपने वाले सभी अख़बारों ने रूसी विदेश मंत्री के बयान को प्रमुखता से पहले पन्ने पर जगह दी है.

अख़बार के अनुसार रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के उत्तरी इलाक़ों में आईएस चरमपंथी दोबारा संगठित हो रहे हैं.

उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी सैनिकों की वापसी पर चिंता जताते हुए कहा, "संपूर्ण शांति बहाली और चरमपंथी संगठनों को जड़ से ख़त्म किए बग़ैर अमेरिकी और नेटो सैनिकों का अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जाना अक़्लमंदी नहीं है."

लॉवरोव ने कहा कि आईएस लड़ाके उन इलाक़ों में मज़बूत हो रहे हैं जो हमारे मित्र देशों की सीमा से सटे हुए हैं.

रूस के विदेश मंत्री ने सुझाव दिया कि विदेशी सैनिकों के चले जाने के बाद अमेरिका, चीन, रूस और पाकिस्तान की आपसी सहमति से अफ़ग़ानिस्तान में एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाना चाहिए.

हालांकि अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी रूस के इस प्रस्ताव को ख़ारिज कर चुके हैं.

रूसी विदेश मंत्री ने आईएस के ख़तरे को जिस तरह से पेश किया है अमेरिका उससे सहमत नहीं है.

अमेरिका के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में आईएस ख़ुरासान (आईएसकेपी) नाम से मौजूद आईएस गुट की ताक़त अब काफ़ी घट चुकी है.

साल 2019 में आईएसकेपी के पास दो से चार हज़ार लड़ाके होने का दावा किया जा रहा था लेकिन अमेरिका का कहना है कि उसकी और नेटो सैनिकों के ऑपरेशन के कारण आईएसकेपी लड़ाकों की संख्या काफ़ी कम हो गई है.

दुनिया इस्लामोफ़ोबिया की बुनियाद पर दहशतगर्दी रोके: संयुक्त राष्ट्र महासभा

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार, दुनिया भर में इस्लाम के ख़िलाफ़ किए जा रहे कथित दुष्प्रचार को रोकने के लिए पाकिस्तान के प्रयासों को सफलता मिली है.

अख़बार के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित कर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी पर ज़ोर दिया है कि वो नफ़रत, नस्लपरस्ती और इस्लाम के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार की बुनियाद पर दहशतगर्दी के बढ़ते हुए ख़तरे से निपटने के लिए उपयुक्त क़दम उठाएं.

अख़बार के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासचिव से भी अपील की गई है कि वो इस्लाम विरोधी सक्रिय दहशतगर्द समूहों से होने वाले ख़तरे के बारे में एक रिपोर्ट जारी करें.

अख़बार के अनुसार, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस्लामोफ़ोबिया से पैदा होने वाले दहशतगर्दी के ख़तरों को ग्लोबल स्ट्रैटेजी में शामिल करना हमारी बड़ी सफलता है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हफ़ीज़ चौधरी ने कहा, "इससे ख़ासतौर पर दुनिया भर में मुसलमानों और उनके धार्मिक स्थलों पर होने वाले हमलों से निपटने में मदद मिलेगी."

प्रवक्ता ने कहा कि इस्लामोफ़ोबिया के ख़तरों से निपटने के लिए पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी पर बार-बार ज़ोर देता रहा है.

पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने ओआईसी के दूसरे देशों के साथ मिलकर इस्लामोफ़ोबिया को दहशतगर्दी का उभरता हुआ ख़तरा क़रार दिया था.

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