मोदी की आरएसएस की विचारधारा भारत-पाकिस्तान संबंधों में दीवार: इमरान ख़ान - उर्दू प्रेस रिव्यू

    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अगर भारत में मोदी सरकार नहीं होती तो दोनों देशों के मसले हल कर लिये जाते.

इमरान ख़ान का यह बयान पाकिस्तान से छपने वाले अख़बारों में छाया रहा.

पिछले हफ़्ते इमरान ख़ान का एक अमेरिकी न्यूज़ चैनल 'एचबीओ एक्सिओज़' को दिया इंटरव्यू पाकिस्तानी अख़बारों में छाया रहा था तो इस हफ़्ते न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार को दिया उनका इंटरव्यू सुर्ख़ियों में रहा.

न्यूयॉर्क टाइम्स को दिये गए इमरान ख़ान के इस साक्षात्कार को पाकिस्तान के लगभग हर अख़बार ने अपने पन्नों पर ख़ास जगह दी है.

भारत से संबंधों के बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार ने जब इमरान ख़ान से पूछा कि भारत में मोदी के अलावा कोई और सरकार होती तो क्या पाकिस्तान के भारत से संबंध बेहतर होते?

इस सवाल के जवाब में इमरान ख़ान का कहना था कि 'सत्ता में आने के बाद उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क किया था और कहा था कि उनका सत्ता में आने का एक ही मक़सद है कि पाकिस्तान से ग़रीबी दूर की जाए और इसके लिए ज़रूरी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सामान्य और व्यवसायिक रिश्ते हों, इससे दोनों देशों को फ़ायदा होगा.'

इमरान ख़ान ने अपने साक्षात्कार में कहा कि 'नरेंद्र मोदी की आरएसएस की विचारधारा एक दीवार बन कर खड़ी हो गई है और इसी कारण दोनों देशों के संबंध बेहतर नहीं हो सके.'

इमरान ने कहा कि अगर भारत में मोदी के अलावा कोई और सरकार होती तो दोनों देश बातचीत के ज़रिए सभी मसले हल कर लेते.

'काबुल पर तालिबान का क़ब्ज़ा हुआ तो सीमा बंद कर देंगे'

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने अगर ताक़त के बल पर सत्ता हासिल कर ली तो पाकिस्तान उससे लगी अपनी सीमा को सील कर देगा.

इमरान ख़ान ने अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में यह बातें कहीं. अख़बार ने इमरान ख़ान का यह इंटरव्यू बुधवार को वीडियो कॉल के ज़रिए रिकॉर्ड किया था लेकिन उसे शुक्रवार को प्रसारित किया गया.

इमरान ख़ान के इंटरव्यू के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग अख़बारों ने मुख्य ख़बर के तौर पर छापा है.

इमरान ख़ान ने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना के निकल जाने के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि जब से अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान से निकलने की तारीख़ की घोषणा की है, तब से तालिबान पर पाकिस्तान का प्रभाव कम हो गया है. उनके अनुसार तालिबान ने ख़ुद को विजयी घोषित कर दिया है.

इमरान ख़ान ने कहा कि वो नहीं चाहते कि तालिबान ताक़त के बल पर काबुल में सत्ता हासिल करे क्योंकि ऐसा करने से एक बार फिर गृहयुद्ध का ख़तरा पैदा हो सकता है.

यह पूछे जाने पर कि अगर तालिबान ताक़त के बल पर सत्ता हासिल कर लेता है तो क्या पाकिस्तान उनको मान्यता देगा, इस पर इमरान ख़ान का कहना था, "पाकिस्तान किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहता. हम शरणार्थियों की बाढ़ फिर नहीं चाहते. तालिबान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई करने के अलावा हम हर क़दम उठाने को तैयार हैं. हम अपनी सीमा सील कर देंगे. पाकिस्तान सिर्फ़ उसी को स्वीकार करेगा जो अफ़ग़ानिस्तान की अवाम के ज़रिए चुनी गई सरकार होगी."

90 के दशक में तालिबान ने पहली बार जब अफ़ग़ानिस्तान पर अपनी सत्ता क़ायम की थी तो पाकिस्तान उन तीन देशों में से एक था जिसने तालिबान सरकार को मान्यता दी थी.

अमेरिका से रिश्ते के बारे में इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान, अमेरिका के साथ नई बुनियादों पर संबंध बनाना चाहता है. इमरान ख़ान ने कहा कि अमेरिका के साथ वो वैसा ही रिश्ता चाहते हैं जैसा कि अमेरिका का ब्रिटेन के साथ रिश्ता है या भारत के साथ जैसा रिश्ता है.

इमरान ख़ान का कहना था, "बदक़िस्मती से वॉर ऑन टेरर (आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध) के दौरान पाकिस्तान और अमेरिका का संबंध एकतरफ़ा था. अमेरिका को लगता था कि वो पाकिस्तान की मदद कर रहा है तो वो वही करे जो अमेरिका चाहता है. लेकिन इस दौरान 70 हज़ार से ज़्यादा पाकिस्तानी मारे गए और 120 अरब डॉलर से ज़्यादा का आर्थिक नुक़सान हुआ क्योंकि पूरे पाकिस्तान में आत्मघाती हमले हो रहे थे या बम धमाके हो रहे थे."

इमरान ख़ान ने कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में एक दूसरे के बीच विश्वास की कमी थी क्योंकि आम पाकिस्तानी को लगता था कि पाकिस्तान ने इसकी भारी क़ीमत चुकाई है और अमेरिका को लगता था कि पाकिस्तान ने अमेरिका के लिए उतना नहीं किया जितना उसे करना चाहिए था.

एक भी अमेरिकी सैनिक रहा तो प्रतिक्रिया का अधिकार रखते हैं: तालिबान

तालिबान ने कहा है कि 11 सितंबर के बाद अगर एक भी अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में रुकता है तो तालिबान उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का अधिकार रखता है.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार, तालिबान के प्रवक्ता सोहैल शाहीन ने अल-जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि 11 सितंबर तक अगर सारे अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान छोड़ कर नहीं जाते तो यह दोहा समझौते का उल्लंघन होगा जिस पर तालिबान लड़ाके उचित कार्रवाई करने का अधिकार रखते हैं.

दरअसल एक दिन पहले अमेरिकी अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एपी से कहा था कि अमेरिकी राजनयिकों की सुरक्षा के लिए 650 अमेरिकी सैनिक 11 सितंबर के बाद भी अफ़ग़ानिस्तान में रहेंगे.

तालिबान प्रवक्ता ने उसी बयान की प्रतिक्रिया देते हुए यह बातें कहीं हैं.

तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि दोहा समझौते की अनदेखी के लिए अमेरिका ज़िम्मेदार होगा. पिछले साल 29 फ़रवरी को तालिबान और अमेरिका के बीच दोहा में समझौता हुआ था कि अमेरिका समेत सारे विदेशी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर चले जाएंगे और इस दौरान तालिबान अमेरिकी और विदेशी सैनिकों पर हमले नहीं करेंगे.

इमरान ख़ान की सरकार में भारत ने कश्मीर को हड़प लिया: मुस्लिम लीग (नवाज़)

जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ मोदी की 24 जून को दिल्ली में हुई मुलाक़ात को पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने फ़्लॉप शो क़रार दिया है. लेकिन विपक्ष इमरान ख़ान की कश्मीर नीति को लेकर ख़ूब हमले कर रहा है.

पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री और मुस्लिम लीग (नवाज़) के वरिष्ठ नेता अहसन इक़बाल ने इमरान ख़ान पर हमला करते हुए कहा, "इमरान ख़ान की हुकूमत में भारत ने कश्मीर को हड़प लिया है. इमरान ने कश्मीर और पाकिस्तान की अवाम के साथ धोखा किया है. भारत ने कश्मीर पर सेंसरशिप लगा दी है जिससे कोई भी ख़बर बाहर निकलकर नहीं आ रही है."

उधर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने इमरान ख़ान पर हमला करते हुए कहा कि कश्मीरी और पीपीपी मिलकर इमरान ख़ान और मोदी दोनों को भगाएंगे.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में एक चुनावी रैली के दौरान बिलावल ने कहा कि पीपीपी और पूरा पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ है. उन्होंने इमरान ख़ान को सुरक्षा के लिए ख़तरा क़रार दिया.

दरअसल एक इंटरव्यू में इमरान ख़ान ने कहा था कि अगर कश्मीर का मसला हल हो गया तो पाकिस्तान को परमाणु हथियारों की ज़रूरत नहीं होगी. इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए बिलावल ने कहा, "जब 'कठपुतली' कहते हैं कि देश को एटमी प्रोग्राम की ज़रूरत नहीं तो क्या वो देश के लिए ख़तरा नहीं बन जाते हैं?"

लेकिन पूर्व विदेश मंत्री और पीपीपी की नेता हिना रब्बानी खार ने कहा कि कोई पाकिस्तानी नेता ना तो कश्मीर का सौदा कर सकता है और ना ही करेगा.

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