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फ़ेसबुक पर भड़के ट्रंप, अकाउंट बंद होने को बताया लाखों अमेरिकियों का 'अपमान'
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले दो साल के लिए अपना फ़ेसबुक अकाउंट सस्पेंड होने पर कंपनी की आलोचना की है.
ट्रंप ने कहा कि उनका फ़ेसबुक अकाउंट निलंबित होना उन लाखों अमेरिकी नागरिकों का "अपमान" है, जिन्होंने उन्हें बीते साल हुए राष्ट्रपति चुनावों में वोट दिया था.
पूर्व राष्ट्रपति ने फ़ेसबुक के इस कदम को एक तरह की 'सेंसरशिप' बताया है.
ट्रंप की सेव अमेरिका पॉलिटिकल एक्शन कमिटी ने एक बयान जारी कर कहा है, "फ़ेसबुक का फ़ैसला उन 7.5 करोड़ लोगों का अपमान है, जिन्होंने हमें वोट दिया. वो हमें इस तरह सेंसर करके चुप नहीं करा सकते. हम ज़रूर जीतेंगे."
बयान में ट्रंप ने कहा कि वो फ़ेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क ज़करबर्ग को वो डिनर के लिए आमंत्रित नहीं करेंगे.
बयान में लिखा गया है, "अगली बार जब मैं व्हाइट हाउस में रहूंगा, मार्क ज़करबर्ग और उनकी पत्नी के लिए वहां डिनर का आयोजन नहीं किया जाएगा."
फ़ेसबुक ने क्यों लिया यह फ़ैसला?
इससे पहले फ़ेसबुक ने शुक्रवार को ट्रंप के फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट को दो साल के लिए निलंबित कर दिया था.
उनके फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट पर इसी साल जनवरी के महीने में अनिश्चितकालीन पाबंदी लगाई गई थी.
सोशल मीडिया कंपनी फ़ेसबुक ने ट्रंप पर यूएस कैपिटल में दंगा भड़काने का आरोप लगाया था. लेकिन पिछले महीने फ़ेसबुक की निगरानी बोर्ड की बैठक हुई थी और इसमें ट्रंप के अकाउंट पर बेमियादी पाबंदी की आलोचना हुई थी.
जनवरी में यूएस कैपिटल में हुए दंगों के बाद ट्रंप ने कई पोस्ट किए थे जिन्हें फ़ेसबुक ने "नियमों का गंभीर उल्लंघन" बताया था.
फ़ेसबुक अब उस नीति को भी ख़त्म करने जा रहा है जिसके तहत नेताओं को कॉन्टेंट की निगरानी से छूट मिली थी. अब यह छूट नहीं मिलेगी.
फ़ेसबुक ने कहा है कि अब नेताओं की पोस्ट को भी कोई सुरक्षा कवच नहीं मिलेगा. ट्रंप पर लगा ये प्रतिबंध सात जनवरी से माना जाएगा और सात जनवरी 2023 तक रहेगा.
इसका मतलब ये है कि अगली बार यानी 2024 में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों तक ट्रंप फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर वापसी कर सकते हैं.
ट्विटर से हमेशा के लिए सस्पेंड हो चुका है ट्रंप का अकाउंट
इससे पहले ट्विटर ने इस साल जनवरी में ही ट्रंप का अकाउंट हमेशा के लिए निलंबित कर दिया था.
ट्विटर का कहना था कि ऐसा हिंसा को बढ़ावा देने की आशंका को देखते हुए किया गया था.
अमेरिका में इस साल चुनावी नतीजे आने के बाद और बाइडन के शपथग्रहण के पहले बड़े स्तर पर हिंसा हुई थी. ट्रंप समर्थकों का एक समूह कैपिटल हिल में घुस आया था और उन्होंने यहां तोड़फोड़ मचाई थी.
डोनाल्ड ट्रंप लगातार आरोप लगा रहे थे कि चुनाव के नतीजों से छेड़छाड़ की गई है. इतना ही नहीं, उन्होंने कैपिटल हिल में घुसने वालों को 'देशभक्त' भी बताया था.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोशल मीडिया पर काफ़ी सक्रिय रहते थे और उनके फ़ॉलोवर्स भी करोड़ों की संख्या में थे.
ट्रंप के विवादित सोशल मीडिया पोस्ट
ट्रंप अपने बड़े फ़ैसलों की जानकारी भी अक्सर ट्विटर और फ़ेसबुक जैसे सोशल मीडिया माध्यमों से दिया करते थे.
हालाँकि उनके पोस्ट और ट्वीट्स को लेकर अक्सर विवाद होता रहता था. उन पर कई बार फ़ेक न्यूज़ को बढ़ावा देने के आरोप भी लगे और कई बार हिंसा भड़काने के भी.
मसलन, अमेरिका में जब 'ब्लैक लाइव्स मैटर' आंदोलन चल रहा था तब ट्रंप ने सेना तैनात करने की धमकी देते हुए कहा था, 'लूटपाट करने वालों को शूट कर दिया जाएगा.''
कैपिटल हिल में हिंसा के दौरान भी ट्विटर ने ट्रंप के लगभग हर ट्वीट में 'विवादित दावा' वाला टैग लगाए रखा था.
अमेरिका के कई सांसदों सांसदों, मिशेल ओबामा और कई हस्तियों ने ट्विटर से ट्रंप को हटाने की माँग की थी.
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