अमेरिका: शिकागो में क्यों नहीं थमता हत्याओं का सिलसिला?- दुनिया जहान

शिकागो

इमेज स्रोत, Getty Images

सोमवार, 31 मई को अमेरिका में मेमोरियल डे मनाया गया. इस दिन ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले सैनिकों को याद किया जाता है. मगर इस दिन अमेरिका के शिकागो शहर में इतनी हिंसा हुई कि पुलिसकर्मियों को अपनी छुट्टी रद्द करके ड्यूटी पर लौटना पड़ा.

शहर के अलग-अलग हिस्सों में गन वायलेंस के कारण तीन लोगों की मौत हो गई और 29 लोग घायल हो गए. लेकिन बीते साल, मई महीने के आख़िरी दिन इस शहर में और भी ज़्यादा ख़ून-ख़राबा हुआ था. इतना कि पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड टूट गए.

उस रोज़ शहर में कई हत्याएं हुईं. मरने वालों में छात्र, रोज़मर्रा के काम में जुटे लोग और एक-दूसरे की जान के प्यासे गिरोहों के सदस्य शामिल थे. एक ही दिन में 18 मर्डर हुए.

इससे कुछ ही हफ्ते पहले शहर के नए पुलिस चीफ़ ने अपने विभाग को लक्ष्य दिया था कि इस साल 300 से ज़्यादा हत्याएं नहीं होनी चाहिए. लेकिन 2020 के आख़िर तक हत्या के 769 केस दर्ज किए गए. पिछले साल से 55 प्रतिशत ज़्यादा.

शिकागो में हत्याओं की दर कितना ज़्यादा है, इसे इटली से तुलना करके समझा जा सकता हैं. इटली में पिछले साल 271 हत्याएं हुईं. जबकि उसकी आधी से भी कम आबादी वाले शिकागो में 769 लोगों की हत्या हुई.

अब सवाल है कि फ़ाइनैंस, संस्कृति, शिक्षा, उद्योग और कारोबार के अंतरराष्ट्रीय केंद्र कहे जाने वाले शिकागो शहर में इतनी ज़्यादा हत्याएं क्यों होती है?

शिकागो

ऐतिहासिक कारण

इस सवाल का जवाब तलाशने के क्रम में हमारे पहले एक्सपर्ट हैं डेक्स्टर वॉइसिन. उन्होंने शिकागो में बीस साल तक शोध करके ये जानने की कोशिश की है कि शिकागो में इतने हिंसक अपराध क्यों होते हैं. डेक्स्टर वॉइसिन कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ़ टॉरन्टो में फ़ैकल्टी ऑफ़ सोशल वर्क में डीन और प्रोफ़ेसर हैं.

डेक्स्टर बताते हैं कि शिकागो कई अलग-अलग तरह की आबादी वाले मोहल्लों से बना शहर है. उनका मानना है कि शहर की ऐसी हालत के लिए यहां का इतिहास, वर्तमान और भूगोल ज़िम्मेदार है.

वह कहते हैं, "शिकागो के उत्तरी हिस्से में गोरे लोग ज़्यादा रहते हैं और दक्षिण हिस्से में आपको काले लोग ज़्यादा मिलेंगे. पश्चिमी हिस्से में हिस्पैनिक और काले लोगों की आबादी ज़्यादा है. इसके साथ ही इलाके नस्लीय आधार पर भी बंटे हुए हैं. इन इलाकों के बीच आर्थिक फर्क भी साफ़ देखा जा सकता है. पूरे शहर में हिंसा नहीं होती, जो ग़रीबी वाले इलाक़े हैं, ज़्यादातर हत्याएं वहीं पर होती हैं."

बकौल डेक्स्टर, शिकागो के पश्चिमी और दक्षिणी इलाक़ों में आप ग़रीबी और अपराध ज़्यादा पाएंगे. यहां पर पूरे शहर की औसत से करीब दोगुनी गरीबी है. जिन इलाक़ों में काले और कम आय वाले हिस्पैनिक रहते हैं, वहां नस्लीय विभाजन भी ज़्यादा है. आपको आर्थिक रूप से कमज़ोर गोरे लोग पूरे शहर में बिखरे हुए मिल जाएंगे मगर काले ग़रीब लोग एक ही इलाके में ज़्यादा मिलेंगे. जैसे कि दक्षिणी इलाक़े में.

शिकागो

इमेज स्रोत, Getty Images

ऐसा होने के पीछे ऐतिहासिक वजहे हैं. 20वीं सदी में अमेरिका के दक्षिणी इलाक़ों में नस्लीय हिंसा और भेदभाव से परेशान होकर लाखों अफ्रीकी अमेरिकी पलायन करके उत्तरी राज्यों और मिडवेस्ट के शिकागो जैसे शहरों में बस गए.

फिर 1930 में एक सरकारी नीति के तहत अफ्रीकी अमेरिकियों की आबादी वाले इलाक़ों को ऐसी जगह के तौर पर चिह्नित कर दिया गया जहां पर कर्ज देने पर उसके वापस मिलने की संभावना बहुत कम है. यहां तक की संघीय फंड से जिन रिहायशी इलाक़ों को विकसित किया गया, वहां पर भी शर्त रख दी गई कि यहां काले परिवारों को न रखा जाए.

डेक्स्टर वॉइसिन बताते हैं कि काले लोगों की आबादी वाले ये इलाके संसाधनों की कमी के चलते बहुत पिछड़ गए. काले लोगों को कहीं और जाकर बसने नहीं दिया गया- ये मानकर की ये समस्याएं बढ़ा देंगे. कर्ज देने में भेदभाव और उनके इलाक़ों को नज़रअंदाज़ करके काले लोगों को एक ही इलाके में सीमित कर दिया गया.

कर्ज और घर देने में भेदभाव वाला नियम तो साल 1968 में ख़त्म कर दिया गया मगर तब तक ग़लत नींव पड़ चुकी थी. आज भी काले लोग शिकागो के कुछ हिस्सों में सिमटे हुए हैं लेकिन इस सबका ज़्यादा हत्याओं से क्या संबंध है?

अमेरिका

इमेज स्रोत, Getty Images

डेक्स्टर वॉइसिन बताते हैं, " कई दशकों का डेटा बताता है कि गरीबी और बेरोजगारी का अपराध से सीधा रिश्ता है. ऊपर से समस्या ये है कि जो लोग किसी अपराध में पकड़े जाते हैं, उनके परिवार और ज़्यादा मुश्किलों में डूब जाते हैं. घर के कमाने वाले सदस्य के जेल जाने के बाद मुश्किले बढ़ जाती हैं. परिवार बच्चों पर नज़र नहीं रख पाते और वो भी अपराध के दलदल मे फंस जाते हैं."

लेकिन सवाल उठता है कि इन हत्याओं में गैंग से जुड़ी हिंसा का कितना योगदान है? इस सवाल के जवाब में डेक्स्टर कहते हैं, "ज्यादातर हत्याएं गैंग्स के कारण होती हैं. हत्या के मामलों में बच्चे भी कई बार शामिल रहते हैं क्योंकि इन इलाक़ों में शिक्षा प्रणाली सही से काम नहीं कर रही. बच्चों को लगता है कि पढ़कर भी सही कमाई लायक पैसे तो मिल नहीं पाएंगे. फिर कुछ मामले घरेलू हिंसा के भी हैं. कुछ उन लोगों की वजह से भी हैं जो अपने पास बंदूक रखते हैं और आत्मरक्षा में इन्हें इस्तेमाल करते हैं."

समाधान क्या है?

हमारे दूसरे एक्सपर्ट अर्ल फ्रेडरिक इमर्जेंसी मेडिसिन के एक्सपर्ट हैं. उनका जन्म शिकागो में हुआ और वो तीस साल से यहीं काम कर रहे हैं. वो कहते हैं, " मैं अक्सर गेस्ट लेक्चर देता हूं और इस दौरान शिकागो का नक्शा दिखाता हूं. मैं दिखाता हूं कि किन इलाकों में गुर्दे या दिल की बीमारियां, डायबिटीज़ और गन वायलेंस ज़्यादा है. ये सभी समस्याएं कुछ ही इलाकों में ज्यादा दिखती हैं."

शिकागो

इमेज स्रोत, Getty Images

अर्ल फ्रेडरिक बंदूकों से होने वाली हिंसा को एक ऐसी बीमारी मानते हैं जिसका इलाज तुरंत करना चाहिए वरना ये फैलती चली जाएगी. वह कहते हैं, "अगर इसे एक बीमारी की तरह देखें तो जिन इलाक़ों में ग़रीबी, बेरोज़गारी, कम शिक्षा, कम आमदनी, रिहायश और खाने को लेकर असुरक्षा ज्यादा होगी, वहां पर बीमारियां ही नहीं बल्कि हिंसा, खासकर गन वायलेंस ज़्यादा पनपनेगी."

गन वायलेंस अगर एक बीमारी है तो इसका इलाज कैसे होगा? इस सवाल के जवाब में अर्ल फ्रेडरिक कहते हैं कि इसका निदान करना है तो पहले इसे जन्म देने वाले कारणों को खत्म करना होगा.

अर्ल कहते हैं, "देश में मौजूद नस्लवाद और अलगाव तक इसकी जड़ें जाती हैं. इसके कारण इतनी विषमता पैदा हुई है कि मौजूदा तौर-तरीकों से बदलाव की उम्मीद नहीं दिखती. इसका इलाज किया जा सकता है पिछड़े समुदायों को आर्थिक रूप से मज़बूत करके."

लेकिन क्या बंदूक चलाने वाले की ज़िम्मेदारी नहीं बनती? किसी मारने या घायल करने का फैसला गोली चलाने वाला ही तो करता है. इस पर अर्ल कहते हैं, "ऐसा फैसला आप कैसे और क्यों लेते हैं, उसका एक संदर्भ होता है."

शिकागो

इमेज स्रोत, Getty Images

अर्ल उदाहरण देते हैं, "मान लीजिए आपको राशन की ज़रूरत है. अगर आपके पास नौकरी, घर और पैसा है तो आप अपनी कार में बैठेंगे और जरूरत का सामान खरीद लाएंगे. लेकिन बात तब अलग हो जाती है जब आपके पास राशन खरीदने के लिए पैसे न हों, नौकरी भी न हो. और जो पैसा आपके पास आ रहा हो, वो किसी आपराधिक काम में शामिल होकर आ रहा है. कोई अपने फैसले के लिए ख़ुद ज़िम्मेदार होता है, इसमें कोई शक नहीं. लेकिन उसने वो फैसला किन हालात में लिया, इस पर भी विचार करना होगा."

हत्या करके बच निकलना

शिकागो के बाशिंदों, नेताओं, पुलिस अधिकारियों और विशेषज्ञों इन सबका मानना है कि यहां पर लंबे समय से हो बेतहाशा हत्याएं हो रही हैं और ये सिलसिला रुकना चाहिए. मगर इन हत्याओं की वजह को लेकर सबकी राय बंटी हुई है.

हमारे तीसरे एक्सपर्ट राफ़ेल ए मैंगुआल हत्याओं के लिए आर्थिक-सामाजिक कारणों को ज़्यादा ज़िम्मेदार नहीं मानते. मैनहटन इंस्टिट्यूट में लीगल पॉलिसी में सीनियर फ़ेलो और उप-निदेशक राफ़ेल कहते हैं, " गंभीर हिंसा वाले अपराधों के पीछे सामाजिक-आर्थिक कारणों को मैं ज़्यादा ज़िम्मेदार नहीं मानता. ऐसे कुछ सबूत हैं जो बताते हैं कि बेरोज़गारी बढ़ने या कुछ इलाक़ों में निवेश घटने के कारण प्रॉपर्टी से जुड़े अपराध तो बढ़ सकते है लेकिन इनका रिश्ता हिंसक अपराधों से भी है, इसके समर्थन में ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं."

हत्या दर घटाने में नाकाम रहने के लिए शिकागो पुलिस की भारी आलोचना होती है. एक मसला ये भी है कि हत्या के मामलों को सुलझाने की दर भी यहां बहुत कम है.

शिकागो

इमेज स्रोत, Getty Images

2019 में 486 लोगों की हत्याएं हुईं मगर सिर्फ 109 मामलों में गिरफ्तारियां हुईं. यानी 22 प्रतिशत मामलों में ही. इसके कई कारण हैं मगर एक बड़ी वजह है- लोगों में पुलिस की मदद करने को लेकर हिचक.

राफेल कहते हैं, "ये काफी परेशान करने वाली बात है और मामलों की जांच करने वाले अफसरों को लोगों के असहयोग सामना करना पड़ता है. ऐसा अमेरिका के कई शहरों में है. लोगों का पुलिस से भरोसा इसलिए टूटा है क्योंकि उन्हें नहीं लगता कि जिसके ख़िलाफ़ वो गवाही देंगे, वो ज्यादा समय तक जेल जा पाएगा. लोग इसलिए भी डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि गवाही देने पर पुलिस उन्हें सुरक्षा नहीं दे पाएगी. और सिस्टम भी इस खामी को दूर करने में इच्छुक नहीं दिखता."

पुलिस क्रूरता के मामलों के कारण भी लोगों में पुलिस विरोधी भावना बढ़ी है. राफ़ेल का कहना है कि पुलिस की क्रूरता के चर्चित मामलों और 'ब्लैक लाइव्ज़ मैटर्स' प्रदर्शनों के कारण पुलिस अधिकारी अपने करियर को बचाने की चाहत में कार्रवाई करने से झिझकने लगे हैं.

राफ़ेल ये भी मानते हैं कि अपराधियों को लंबे समय तक जेल भेजा जाना चाहिए. वह कहते हैं, "अगर अपराधी लंबे समय तक सलाखों के पीछे रहेगा तो उसे अपराध करने के कम मौके मिलेंगे. हमने देखा है कि जब जेल भेजे जाने की दर बढ़ती है तो अपराध कम होते हैं क्योंकि बड़ी संख्या में अपराधी सलाखों के पीछे जले जाते हैं. लेकिन शिकागो में ऐसा कम हो रहा है और इसी कारण हत्याओ का सिलसिला जारी है."

शिकागो

इमेज स्रोत, Getty Images

पूरी तस्वीर

शिकागो काफ़ी बड़ा शहर है. भले ही यहां अमेरिका के बाकी शहरों की तुलना में ज़्यादा हत्याएं होती हैं लेकिन मर्डर रेट के मामले में ये देश के कुछ और शहरों से पीछे है.

हमारी अगली एक्सपर्ट जेनिफ़र डोलिएक टेक्सस ए एंड एम यूनिवर्सिटी में इकॉनमिक्स की प्रोफ़ेसर हैं और क्राइम, क्रिमिनल बिहेवियर और इसे घटाने के तरीकों की एक्सपर्ट हैं. जेनिफ़र बताती हैं यहां के कुछ इलाकों में ही ज़्यादा हत्याएं होती हैं और इसकी एक ख़ास वजह है.

वह कहती हैं, "शिकागो में कई दूसरे शहरों के मुक़ाबले गैंग वायलेंस ज़्यादा है. मेरे ख्याल से यही वजह है कि बाकी जगहों पर जिन तरीकों से हिंसा घटती है, वो यहां पर काम नहीं आते. आमतौर पर हिंसक अपराध, प्रॉपर्टी या आर्थिक कारणों से होते हैं. शराब पीने से भी हिंसा होती है क्योंकि लोग पीने के बाद बेवकूफियां करते हैं. इससे घरेलू हिंसा और हत्याएं तक होती हैं. लेकिन शिकागो में गैंग वायलेंस ज़्यादा है जो एक तरह का संगठित अपराध माना जा सकता है."

साल 2020 में शिकागो ही नहीं, पूरे अमेरिका में अपराध बढ़े. ऐसा क्यों हुआ, इसका पता लगाना मुश्किल है. लेकिन जेनिफ़र भी मानती हैं कि न्याय व्यवस्था औऱ पुलिस के व्यवहार में सुधार लाने की ज़रूरत है.

लेकिन क्या 2020 में अपराध बढ़ने के लिए कोरोना महामारी ज़िम्मेदार है? इस सवाल पर जेनिफ़र कहती हैं, "मैं ऐसा नही मानती. ऐसा सामने आया है कि महामारी की शुरुआत में अचानक बंदूकों की बिक्री बढ़ गई थी. जिनके पास बंदूकें नहीं थीं, उन्होंने भी खरीदी. बंदूकें ज्यादा होंगी तो हिंसक मुठभेड़ों की आशंका ज्यादा रहेती."

शिकागो

इमेज स्रोत, Getty Images

अमेरिका 1990 के दशक की शुरुआत में बहुत हिंसक अपराध होते थे. मगर नब्बे के दशक के बीच से उनमें रहस्यमय ढंग से गिरावट आने लग गई. अभी तक इसका पता लगाने की कोशिश हो रही है कि ये कमी क्यों आई. अभी 2020 में जो उछाल देखने को मिला, वो भी 90 के दशक के मुकाबले काफ़ी कम है.

अमेरिका में 90 के दशक के बाद क्राइम रेट क्यों गिरा, इसकी वजह साफ नहीं है.

इसे लेकर वो कहती हैं, "अपराध दर मे कमी क्यों आई, अभी तक इसे समझा नहीं जा सका है. इससे हम राहत की सांस तो ले लकते हैं लेकिन एक डर हमेशा बना रहेगा कि कहीं हम कुछ ऐसा न कर दें कि मामला उलट जाए. जिस वजह से अपराध घटे हों, उसमें गलती से भी बदलाव ला दिया तो न चाहते हुए भी हम खुद ही क्राइम रेट बढ़ने के लिए जिम्मेदार बन जाएंगे."

इतना तो साफ़ है कि शिकागो में इतनी ज़्यादा हत्याएं इसलिए होती हैं क्योंकि ये शहर कई सारे पेचीदा मसलों की गिरफ्त से बाहर नहीं निकल पा रहा. ऊपर से समस्या ये है कि इन सभी मसलों का निदान किसी एक तरीक़े से नहीं किया जा सकता.

यहां होने वाली हत्याओं के सिलसिले में बहुत कम गिरफ्तारियां होती हैं. इसे बदलना होगा. साथ ही, अपराधियों को सज़ा दिलाने की दर बढ़ाने से भी हालात कुछ बेहतर होंगे. लेकिन फ़िलहाल कोई पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि इस ख़ूबसूरत शहर को हर रोज़ होने वाले ख़ून-ख़राबे से कब राहत मिलेगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)