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इसराइल को सालों से चकमा दे रहे हैं एक आँख वाले हमास प्रमुख मोहम्मद ज़ाएफ़
- Author, जोशुआ नेवेट
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
इसी महीने फ़लस्तीनी लड़ाकों की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग से इसराइल को चेतावनी दी गई.
ऑडियो में कहा गया है कि अगर हमास की मांगे पूरी नहीं की गईं, तो इसराइल को इसकी 'बड़ी क़ीमत' चुकानी पड़ेगी.
हमास ग़ज़ा पट्टी पर शासन करने वाला एक चरमपंथी संगठन है और ये आवाज़ मोहम्मद ज़ाएफ़ की थी, जो हमास के सैन्य विंग के प्रमुख हैं. वो इसराइल के मोस्ट वॉन्डेट लिस्ट में हैं और उन्होंने सात सालों के बाद चुप्पी तोड़ी है.
लेकिन उनकी चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया गया. इसराइल और ग़ज़ा के बीच युद्धविराम से पहले 11 दिनों तक लड़ाई चली.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ इसमें ग़ज़ा में 242 लोगों की मौत हो गई. 10 से 21 मई तक चली इस लड़ाई में इसराइल के 13 लोगों की मौत हुई.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ ग़ज़ा में मरने वालों में 129 आम नागरिक थे. हमास के नेता याह्या सिनमार के मुताबिक़ उनके 80 लड़ाके इस लड़ाई में मारे गए. ज़ाएफ़ भी फ़ायरिंग लाइन पर ही थे, लेकिन मरने वालों की लिस्ट में वो शामिल नहीं हैं.
ज़ाएफ़ ग़ज़ा पट्टी में सैन्य ऑपरेशन चलाते हैं
इसराइल डिफेंस फ़ोर्स (आइडीएफ) ने प्रवक्ता ने हिदाई ज़िबरमेन ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, "पूरे ऑपरेशन के दौरान हमने मोहम्मद ज़ाएफ़ को मारने की कोशिश की."
आइडीएफ के अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि लड़ाई के दौरान दो बार ज़ाएफ़ को मारने की कोशिश की गई.
उन्हें मारने की ये पहली नाकाम कोशिश नहीं थी. पिछले दो दशकों में सात बार उनकी हत्या की नाकाम कोशिशें हो चुकी हैं. चूहे-बिल्ली की तरह चल रहे इस खेल ने इसराइल को परेशान कर दिया है.
मध्य पूर्व के सुरक्षा विशेषज्ञ मैथ्यू लिविट बताते हैं, "उन लोगों की एक लिस्ट तैयार की गई है, जो हमास की सैन्य क्षमता के लिए बहुत ज़रूरी हैं. उस लिस्ट में सबसे ऊपर मोहम्मद ज़ाएफ़ का नाम है."
ग़ज़ा पट्टी के 'मेहमान'
ज़ाएफ़ के बारे में ज़्यादातर जानकारियाँ हमें इसराइली या फ़लस्तीनी मीडिया रिपोर्ट से मिलती हैं. उनके मुताबिक़ ज़ाएफ़ का जन्म 1965 में ग़ज़ा के ख़ान यूनिस शरणार्थी कैंप में हुआ था. उस वक़्त वहाँ मिस्र का क़ब्ज़ा था.
उनका नाम मोहम्मद दियाब इब्राहिम अल-मरसी रखा गया था, लेकिन उनकी खानाबदोश जीवनशैली और इसराइली हवाई हमलों के बचने के लिए लगातार भागते रहने के कारण उन्हें ज़ाएफ़ कहा जाने लगा. अरबी में इस शब्द का मतलब "मेहमान" होता है.
उनकी परवरिश से जुड़ी बहुत कम जानकारियाँ उपलब्ध हैं. जब हमास बना था, तब वो एक युवा रहे होंगे. 1980 में वो इस गुट से जुड़े. इसराइल के खिलाफ़ सशस्त्र विद्रोह के लिए तैयार रहने वाले ज़ाएफ़ जल्द ही हमास की सैन्य इकाई के इज़ेदिन अल-कसम ब्रिगेड में एक जाना पहचाना नाम बन गए.
ग़ज़ा पर शासन करने वाला फलस्तीनी चरमपंथी संगठन
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के पूर्व आतंकवाद-विरोधी सलाहकार लेविट बताते हैं, "उन्हें ख़ासतौर पर हमास का कट्टर अधिकारी माना जाता है." बताया जाता है कि ज़ाएफ़ चरमपंथी कमांडर याह्या अय्याश के क़रीबी रहे हैं. बम बनाने के लिए मशहूर याह्या अय्याश को 'इंजीनियर' कहा जाता है.
90 के दशक के शुरुआती सालों में इसराइल में बसों को उड़ाने का आरोप अय्याश पर ही है. 1996 में इसराइल द्वारा की गई उनकी हत्या के बाद बसों पर हमले बढ़ गए थे. माना जाता है कि अय्याश की मौत का बदला लेने के लिए ज़ाएफ़ ने ये प्लान तैयार किया था, इसके अलावा कई दूसरे हमलों में उनका हाथ है.
इसके बाद ज़ाएफ़ का क़द और ओहदा बढ़ गया. 2020 में हमास की सैन्य इकाई के संस्थापक सलाह सहेदेह की हत्या के बाद उन्होंने इसकी कमान संभाली, हमास के ख़ास कसम रॉकेट और ग़ज़ा में सुरंगों का श्रेय ज़ाएफ़ को दिया जाता है.
माना जाता है ज़ाएफ़ का ज़्यादातर समय इन्हीं सुरंगों में बीतता है ताकि इसराइल के हमलों से बचा जा सके और हमास के ऑपरेशन को छिपकर चलाया जा सके.
'नौ ज़िंदगियों वाली बिल्ली'
ज़ाएफ़ का रडार में रहना ज़िंदगी और मौत से जुड़ा है. 2000 के दशक के दौरान इसराइल ने चार बार उनकी हत्या की कोशिश की लेकिन वो बच गए. कुछ हमलों में उन्हें चोटें आईं, कुछ हमलों में वो गंभीर रूप से घायल हुए. इनमें उनकी एक आंख और शरीर के अंगों को नुक़सान हुआ.
आईडीएफ के एक पूर्व प्रमुख ने इस बात की पुष्टि की थी कि 2006 में हमास के एक सदस्य के घर पर किए गए हमले में उन्हें कुछ गंभीर चोटें आईं थीं. उन्होंने बीबीसी को बताया, "लोगों को लगा था कि वो फिर कभी भी एक नेता या सेना के रणनीतिकार की तरह काम नहीं कर पाएँगे."
"लेकिन वो ठीक हो गए. आप अपनी आँख खो देते हैं, तो खो देते हैं"
हत्या की इन नाकाम कोशिशों से बच जाने के कारण ज़ाएफ़ की ख्याति बढ़ी और उनके दुश्मनों ने उन्हें "द कैट विद नाइन लाइव्स" कहना शुरू किया.
2014 में ज़ाएफ़ की हत्या की पाँचवीं कोशिश की गई.
इसराइल ने उनके पड़ोसी शेख रादवान के घर पर हमला किया. इसमें ज़ाएफ़ की पत्नी, विदाद और छोटे बच्चे की मौत हो गई. हमले के कुछ ही देर बाद हमास ने कहा कि ज़ाएफ़ "अभी ज़िदा हैं और सैन्य ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे हैं."
सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इसराइली सेना से बचने की एक बड़ी वजह ज़ाएफ़ का किसी भी आधुनिक संचार तकनीक का इस्तेमाल नहीं करना है.
लेविट के मुताबिक, "अगर आप फ़ोन या कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं करते, तो आधुनिक ख़ुफ़िया सर्विस के लिए आपके बारे में जानकारी जुटाना मुश्किल है."
लेविट के मुताबिक हमास के सुरंगों की गहराई, पुराने ख़ुफ़िया तंत्र, जानमाल के नुक़सान का ख़तरा और हथियारों का काम नहीं करना हत्या की कोशिशों के नाकाम होने की कुछ और वजहें हैं.
'अलग' और ज़रूरी भूमिका
लड़ाई के ख़त्म होने से एक दिन पहले हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को बताया था कि ज़ाएफ़ ग़ज़ा में सैन्य कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे थे. माना जा रहा है कि युद्धविराम के बाद भी कमान उनके हाथों में है.
आइडीएफ से एक अधिकारी ने बीबीसी इसराइली को बताया कि ज़ाएफ़ को लेकर कोशिशें चल रही हैं लेकिन खुफ़िया मिशन होने कारण इससे जुड़ी अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया.
लेविट कहते हैं, "वो (इसराइल) उसे मारना चाहेंगे. इसकी मुख्य वजह ये है कि वो उस पुराने दौर से आते हैं, उनकी अपनी पहुँच है."
"वरिष्ठ लड़ाकों की संख्या बहुत कम है, वो जो शुरू से जुड़े हुए हैं. इस मामले में वो अलग हैं."
ज़ाएफ़ की एक और ख़ासियत ये है कि वो एक रहस्यमयी व्यक्ति हैं, जो कुख्यात भी है और गुमनाम भी. ग़ज़ा की सड़कों पर कुछ ही लोग ज़ाएफ़ को पहचान सकते हैं.
लेविट कहते हैं कि फ़लस्तीनी "हमास के ज़्यादातर नेताओं से प्रभावित" नहीं दिखते.
लेकिन जब युद्धविराम की घोषणा हुई तब कुछ फलस्तीनियों ने ज़ाएफ़ का नाम जपना बंद नहीं किया. ग़ज़ा में तबाही के बाद कई लोग जश्न मनाते दिखे, कुछ गा रहा थे, "हम आपके साथ हैं ज़ाएफ़."
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