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नेपाल में आधी रात को दोबारा संसद भंग, क्या हो रहा है आख़िर
नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने संसद भंग कर दी है और इसी साल नवंबर में चुनाव कराने का फ़ैसला किया है.
नेपाल की प्रमुख विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने राष्ट्रपति के इस फ़ैसले की आलोचना की है और कहा है कि उनका ये क़दम असंवैधानिक है और वो इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी.
इससे पहले राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा था कि न तो प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली केयरटेकर सरकार और न ही विपक्ष ये साबित कर पाया कि सरकार बनाने के लिए उनके पास बहुमत है.
इसी तरह का क़दम राष्ट्रपति की ओर से पिछले साल दिसंबर में भी उठाया गया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक क़रार दिया था.
भारत के पड़ोसी देश में यह घटना तब हो रही है जब वहां पर कोरोना वायरस संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और डॉक्टर राजनेताओं को उनके राजनैतिक गुणा-गणित को पीछे छोड़कर ज़िंदगियां बचाने पर ज़ोर दे रहे हैं.
विपक्ष का निशाना
विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने शनिवार को फ़ैसला किया कि संसद भंग करने के राष्ट्रपति के फ़ैसले के ख़िलाफ़ वह राजनीतिक और क़ानूनी क़दम उठाएगी.
साथ ही विपक्षी दल ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी पर अपने लाभ के लिए संविधान के दुरुपयोग का आरोप लगाया है.
राष्ट्रपति भंडारी ने शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात को 275 सदस्यों वाले सदन को भंग करने की घोषणा की थी और कहा कि 12 और 19 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होंगे.
भंडारी ने यह फ़ैसला प्रधानमंत्री ओली की आधी रात में हुई कैबिनेट की बैठक के बाद लिया. इस बैठक में सदन को भंग करने की सिफ़ारिश की गई थी.
ओली 10 मई को संसद में विश्वास मत नहीं जीत पाए थे जिसके बाद राष्ट्रपति ने विपक्ष को 24 घंटे के अंदर विश्वास मत पेश करने का प्रस्ताव दिया था.
नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देऊबा ने अपने लिए प्रधानमंत्री पद का दावा किया था और कहा था कि उनके पास 149 सांसदों का समर्थन है.
नेपाली कांग्रेस ने बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति पर ओली को प्रधानमंत्री बनने में मदद करने का आरोप लगाया है.
बयान में लिखा है, "पीएम ओली ने नई सरकार के गठन का प्रस्ताव दिया, राष्ट्रपति भंडारी ने 24 घंटों में नई सरकार के गठन के लिए विश्वास मत पेश करने को कहा और प्रधानमंत्री नियुक्त नहीं किया. संविधान के प्रावधान के अनुसार, आधी रात में कैबिनेट की बैठक के बाद संसद भंग करना असंवैधानिक और लोकतंत्र विरोधी है."
देऊबा ने सभी लोकतांत्रित ताक़तों से एक होने का निवेदन करते हुए "संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए और संसद भंग करने के ख़िलाफ़ राजनीतिक और क़ानूनी कार्रवाई करने के लिए एक साथ मिलकर" काम करने की अपील की है.
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
इसी बीच नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-माओवादी केंद्र, सीपीएन-यूएमएल का माधव नेपाल धड़ा और समाजबादी पार्टी-नेपाल के उपेंद्र यादव धड़े के नेताओं ने शनिवार को संसद भवन में मुलाक़ात की और भविष्य की योजना पर चर्चा की है.
विपक्ष प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की संसद भंग करने और जल्दी चुनाव कराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई की योजना बना रहा है.
पिछले साल 20 दिसंबर को राष्ट्रपति भंडारी ने संसद भंग कर दी थी लेकिन फ़रवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इसे बहाल कर दिया था.
राष्ट्रीय जनमोर्चा की सांसद दुर्गा पोडल ने कहा है कि ओली के अगले क़दम को लेकर रणनीति बनाई जाएगी.
उन्होंने कहा, "हम यह भी चर्चा करेंगे कि शेर बहादुर देऊबा को नए प्रधानमंत्री बनाने को लेकर जिन 149 सांसदों ने समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं उसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट में रिट पिटिशन दायर की जाए."
वहीं, सत्तारूढ़ सीपीएन-यूएमएल की स्टैंडिंग कमिटी की शनिवार को बैठक हो रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक प्रधानमंत्री आवास पर होगी.
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