इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष: बाइडन की युद्धविराम की अपील, पर यूएन का रास्ता रोकना जारी

गज़ा में तबाही का मंज़र

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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने गज़ा में इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच संघर्ष के आठ दिन बाद युद्धविराम किए जाने की माँग का समर्थन किया है.

हालाँकि अमेरिका ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से हिंसा बंद करने के लिए बयान जारी करने के प्रयास में बाधा डाली है.

इस बीच संघर्षविराम की अपीलों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच हिंसा जारी है. इसराइल ने मंगलवार को कहा कि गज़ा में उसके हमलों में अभी तक कम-से-कम 150 चरमपंथी मारे गए हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक़ बाइडन ने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से कहा है कि अमेरिका गज़ा में हिंसा रोकने के लिए अमेरिका मिस्र और अन्य देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है.

जो बाइडन ने इसराल से कहा कि वो बेगुनाह लोगों की रक्षा के लिए हरसंभव कोशिश करे.

बयान में कहा गया है, “दोनों नेताओं ने गज़ा में हमास और अन्य आतंकी संगठनों के ख़िलाफ़ इसराइल की सैन्य कार्रवाइयों पर चर्चा की.”

जो बाइडन

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जल्दी हिंसा रुकने के आसार बहुत कम

इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच संघर्ष का यह दूसरा हफ़्ता है और इसके जल्दी रुकने के आसार बहुत कम नज़र आ रहे हैं.

हिंसा के बीच गज़ा में 61 बच्चों समेत 212 लोगों की मौत गई है. वहीं इसराइल में दो बच्चों समेत 10 लोग मारे गए हैं.

इसराइल का कहना है कि गज़ा में मारे गए ज़्यादातर लोग हमास के चरमपंथी हैं और आम नागरिकों की मौतें ग़ैर-इरादतन हुई हैं.

दूसरी तरफ़, गज़ा पर काबिज़ हमास इसराइल के दावे को ख़ारिज करता है. गज़ा में जारी ख़ून-खराबे ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

कई देशों के नेताओं और मानवीय मदद मुहैया कराने वाली संस्थाओं ने हिंसा में बेतहाशा हो रही मौतों और नुक़सान को रोकने की अपील की है.

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अमेरिका ने सुरक्षा परिषद को तीन बार रोका

अमेरिका ने अपने कूटनीतिक प्रयासों का हवाला देते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लगातार तीन बार वो बयान जारी करने से रोका था, जिसमें इसराइल से सैन्य कार्रवाई रोकने के लए कहा गया था.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जेन साकी ने इस बारे में कहा था, “हमें लगता है कि पर्दे के पीछे से बात करना सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है.”

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ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि इसराइल को आम नागरिकों को निशाना बनाने से बचना चाहिए. लेकिन साथ ही उन्होंने यह चिंता भी जताई कि ‘हमास लोगों के घरों और घनी आबादी वाली सार्वजनिक जगहों को ढाल बनाकर हमला कर रहा है.”

जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने भी नेतन्याहू से बात करते हुए यह संघर्ष रोकने की अपील की. मर्केल के प्रवक्ता के मुताबिक़ उन्होंने यह भी कहा कि इसराइल को आत्मरक्षा का अधिकार है.

फ़्रांस और मिस्र समेत कुछ देश गज़ा में तुरंत युद्धविराम लागू करने की बात कह रहे हैं.

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बाइडन का चिर परिचित अंदाज़ या नई शुरुआत?

बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट-अशर का विश्लेषण

जो बाइडन पारंपरिक रूप से इसराइल का समर्थन करने वाले डेमोक्रेट नेता रहे हैं.

जब बात फ़लस्तीनी चरमपंथियों के हवाई हमलों की आती है तो अमेरिका अक्सर एक ही ढर्रे पर चलता है.

अमेरिकी प्रशासन इसराइल का यह कहकर मज़बूती से समर्थन करता है कि हमास के रॉकेट दागने के बाद उसे आत्मरक्षा का अधिकार है.

विश्लेषकों के अनुसार, शुरुआत में अमेरिकी प्रशासन संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य सार्वजनिक मंचों पर इसराइली हवाई हमलों की आलोचना करने से बचता है ताकि इस दौरान इसराइल को फ़लस्तीनी चरमपंथियों और उनके ठिकानों को निशाना बनाने का मौका मिल जाए.

हालाँकि जैसे ही हमलों में आम नागरिकों के मौतों की संख्या बढ़ने लगती है, अमेरिका इसराइल की आलोचना करना शुरू कर देता है और उस पर सैन्य कार्रवाई पर लगाम लगाने का दबाव बनाने लगता है.

इस बार हमास के हमले भी पहले के मुकाबले कहीं ज़्यादा गंभीर हैं. लेकिन इसके बावजूद बाइडन ने सार्वजनिक रूप से युद्धविराम का समर्थन किया है. शायद यह एक नए दौर की शुरुआत है.

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गज़ा में तबाही का मंज़र

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स्कूल, अस्पताल...सब तबाह हो रहे हैं

संयुक्त राष्ट्र ने भी लगभग 20 लाख की आबादी वाले और पहले से ही जर्जर गज़ा पट्टी में हो रही तबाही को लेकर चिंता जताई है.

यूएन ने कहा कि गज़ा में 40 स्कूल और चार अस्पताल या तो ‘पूरी तरह नष्ट हो गए हैं या फिर आंशिक रूप से’.

संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि गज़ा में ईंधन की आपूर्ति भी ख़त्म होने की कगार पर है जिससे बुनियादी सेवाओं के ठप होने का ख़तरा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के इमर्जेंसी चीफ़ डॉक्टर माइक रायन ने कहा है कि स्वास्थ्य तंत्र पर होने वाले सभी हमले तुरंत रुकने चाहिए.

वीडियो कैप्शन, मुस्लिम देश बोले, अल-अक़्सा की रेखा पार ना करे इसराइल

ताज़ा हालात कैसे हैं?

अभी भी इसराइल गज़ा पर लगातार हवाई हमले कर रहा है और हमास भी इसराइल के शहरों में रॉकेट दाग रहा है.

सोमवार रात को भी इसराइल में सायरन बजते रहे और लेबनान से सटी सीमा के पास रॉकेट छोड़े जाते रहे.

इसराइली सेना ने बताया कि उसने भी हमास के रॉकेटों के जवाब में लेबनान की तरफ़ हवाई हमले किए.

इसराइल डिफ़ेंस फोर्सेज़ (आईडीएफ़) का दावा है कि उसने रात भर में 160 ‘आतंकी ऑपरेटिव्स’ और गज़ा पट्टी में हमास की 15 किलोमीटर तक लंबी सुरंगों को नष्ट कर दिया है.

सोमवार को गज़ा पर हुए इसराइली हवाई हमलों में कम से कम सात फ़लस्तीनियों के मारे जाने की ख़बर है.

आयरन डोम डिफ़ेंस सिस्टम देखने के लिए इकट्ठा हुए इसराइली लोग

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इतने लोग मर रहे हैं कि शव रखने की जगह नहीं

गज़ा में बच्चों के डॉक्टर मोहम्मद अहू रया ने बीबीसी से वहाँ हुई तबाही के बारे में बताया.

उन्होंने कहा, “हमारे पास यहाँ इतना बड़ा शवगृह नहीं है जहाँ हम मारे गए लोगों के शव रख सकें. गज़ा में हालात बद से बदतर हो रहे हैं. अभी गज़ा में जो नुक़सान हुआ है, उसकी भरपाई करने में हमें कम से कम 10 साल लगेंगे.”

सोमवार को गज़ा की एकमात्र कोविड-19 टेस्टिंग लैब भी नष्ट कर दी गई. वहाँ कोरोना वायरस संक्रमण की पॉज़िटिविटी दर 28 फ़ीसदी यानी काफ़ी ज़्यादा है.

इसराइल के टेक एग्ज़िक्युटिव और तीन बच्चों के पिचा ईतन सिंगर ने बीबीसी से कहा, “यह बिल्कुल आसान नहीं है. पिछली सात रातों से हम अपने बच्चों को बिस्तर से उठाकर सुरक्षित जगहों पर भाग रहे हैं. हमारे पास सिर छिपाने के लिए सुरक्षित जगह ढूँढने के लिए बस 30-60 सेकेंड तक का समय होता है.”

वीडियो कैप्शन, आयरन डोमः इसराइल को रॉकेट हमलों से बचाने वाला सुरक्षा कवच

इसराइल में अरब और यहूदियों के बीच झड़पें

इसराइल का दावा है कि पिछले एक हफ़्ते में हमास ने उस पर 3,000 से ज़्यादा रॉकेट बरसाए हैं.

यह भी बताया जा रहा है कि इसराइल के आयरन डोम डिफ़ेंस सिस्टम ने तकरीबन 90 फ़ीसदी रॉकेटों को नाकाम कर दिया है.

इसराइल की आपातकालीन सेवाओं के अनुसार वहाँ हमलों और हिंसा में अब तक कम से कम 311 लोग घायल हुए हैं जिनमें से छह लोगों को गंभीर चोटें आई हैं.

इनमें एक व्यक्ति इसराइल में हुए दंगों में भी मारा गया है. इसराइल में अरब और यहूदियों के बीच हुए संघर्ष में 193 लोग घायल हुए हैं जिनमें 10 लोग गंभीर रूप से घायल हैं.

कैसे शुरू हुई ऐसी हिंसा?

संघर्ष का यह सिलसिला यरुशलम में पिछले लगभग एक महीने से जारी अशांति के बाद शुरू हुआ है.

इसकी शुरुआत पूर्वी यरुशलम के शेख़ जर्रा इलाक़े से फ़लस्तीनी परिवारों को निकालने की धमकी के बाद शुरू हुईं जिन्हें यहूदी अपनी ज़मीन बताते हैं और वहाँ बसना चाहते हैं.

इस वजह से वहाँ अरब आबादी वाले इलाक़ों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हो रही थीं.

सात मई को यरुशलम की अल-अक़्सा मस्जिद के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई.

वीडियो कैप्शन, इसराइल और फ़लस्तीन के बीच विवाद की जड़

अल-अक़्सा मस्जिद के पास पहले भी दोनों पक्षों के बीच झड़प होती रही है मगर सात मई को हुई हिंसा पिछले कई सालों में सबसे गंभीर थी.

इसके बाद तनाव बढ़ता गया और पिछले सोमवार से ही यहूदियों और मुसलमानों दोनों के लिए पवित्र माने जाने वाले यरुशलम में भीषण हिंसा शुरू हो गई.

हमास ने इसराइल को यहाँ से हटने की चेतावनी देते हुए रॉकेट दागे और फिर इसराइल ने भी जवाब में हवाई हमले किए. इससे पैदा हुई हिंसा एक हफ़्ते के बाद अब भी जारी है.

हालाँकि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच समझौता कराने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं.

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