इमरान ख़ान को अपने ही पूर्व राजनयिकों ने दिखाया 'आईना'

पाकिस्तानी राजनयिकों को सरेआम फ़टकार लगाने के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान अब आलोचनाओं से घिरते नज़र आ रहे हैं.

कई राजनयिकों ने विदेश मंत्री, शाह महमूद क़ुरैशी और विदेश सचिव से प्रधानमंत्री के इस बर्ताव के खिलाफ़ आपत्ति ज़ाहिर की है.

दरअसल, बुधवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पाकिस्तान के राजदूतों के साथ एक सार्वजनिक बैठक की और मध्य-पूर्व में स्थित पाकिस्तानी दूतावास के लोगों के ‘ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये’ पर राजदूतों को खरी-खरी सुनाई.

दरअसल, हाल ही में सऊदी अरब स्थित पाकिस्तानी दूतावास में एक पाकिस्तानी मज़दूर से दुर्व्यवहार की ख़बरें सामने आई थीं, जिसके बाद पाकिस्तान सरकार ने मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. ये बैठक इस मामले के बाद ही बुलाई गई थी.

वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए की जा रही बैठक में उन्होंने कहा, ‘’जिस तरह के फीडबैक सऊदी अरब और यूएई के दूतावास से मिले हैं वह हैरान करने वाला है. लोगों की मदद करने के बजाय दूतावास के लोग रिश्वत ले रहे हैं. ग़रीब लोगों को नीचा समझ कर उनकी मदद ना करना ये सब जानकर मैं हैरान हूं.’’

उन्होंने बताया कि कई शिकायतें सिटीज़न पोर्टल से मिली है जो विदेशों में रह रहे लोगों ने भेजी हैं.

‘’दूतावास का काम विदेशों में रह रहे हमारे लोगों की मदद करना है और मुल्क़, जो इस वक़्त बेहद मुश्किल आर्थिक हालात में है उसमें निवेश के लिए काम करना है. वो वक़्त अब चला गया जब इंग्लैंड में पाकिस्तान के राजदूत अंग्रेज़ों से मिल कर ख़ुश हो जाया करते थे और उन्हें नहीं लगता था कि इस मुल्क को निवेश की ज़रूरत है. मैं ये कहना चाहूंगा कि भारत के राजदूत इस मामले में हमसे कहीं ज़्यादा सक्रिय रहते हैं, वे निवेश भी लाते हैं.’’

‘’ख़ासकर संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के दूतावास से सबसे ज़्यादा शिकायतें मिलती हैं. यहां लोगों को मुलाक़ात का वक़्त दे कर मिलते नहीं हैं. ग़रीब अपने पैसे जोड़ कर दूतावास आता है लेकिन यहाँ का स्टाफ़ उनकी सुनता नहीं है. इन दो देशों से ही सबसे ज़्यादा हमारे लोग रहते हैं.’’

इसके बाद विदेशी कार्यालयों से अधिकारियों ने एक के बाद विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और विदेश सचिव से इस पूरे वाकये पर कड़ी आपत्ति ज़ाहिर की.

निशाने पर इमरान ख़ान

कई पूर्व राजनयिकों और मंत्रालय के पूर्व कर्मचारियों ने ट्विटर पर इमरान ख़ान की आलोचना की.

पूर्व विदेश सचिव रहीं तहमीना जुनेजा ने लिखा, ‘’विदेश मंत्रालय की ग़ैर-ज़रूरी आलोचना ने बेहद निराश किया है, ऐसा लगता है कि दूतावासों के काम की जानकारी का अभाव है. दूतावासों में स्टाफ़ की कमी है और कई ऐसे विभाग की भूमिका भी होती है जो दूतावास के दायरे से बाहर होते हैं.‘’

‘’अधिकरियों की मानसिकता औपनिवेशिक है? ये सोचना भी सच्चाई से कोसो दूर है. कोविड के ही दौरान कैसे दूतावासों ने वुहान में फंसे पाकिस्तानियों की मदद की ये सबने देखा. क्वालिटी सर्विस के लिए मुद्दों को उठाना चाहिए लेकिन ये ट्वीट्स के ज़रिए या सार्वजनिक रूप से नहीं किया जा सकता. ‘’

एक अन्य पूर्व विदेश सचिव जलील अब्बास जिलानी ने ट्विटर पर लिखा, ‘’ हमें कूटनीतिक क्षमता बढ़ाने की ज़रूरत है, संसाधनों को बढ़ाने और दूतावास की सराहना करने की ज़रूरत है. इस मुश्किल वक़्त में एक सामंजस्य बिठाने की ज़रूरत है, अपनी महत्वकांक्षाओं के बीच और क्या मौजूद हालात में हासिल किया जा सकता है इसके बीच. ‘’

विपक्षी पार्टी के लोगों ने भी इमरान ख़ान को आड़े हाथों लिया.

पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की वरिष्ठ नेता और अमेरिका में पाकिस्तान की राजदूत रहीं शेरी रहमान ने कहा, ‘’फॉरन सर्विस ख़ुद से व्यापार सृजित नहीं कर सकती. यक़ीनन वह कुछ मिशन में बेहतर सेवा देकर मदद कर सकती हैं, लेकिन ये बात इस तरीक़े से रखना सरासर अनुचित है. कई दूतावास में कर्मचारी दिन रात काम कर रहे हैं और उन्हे हताश नहीं किया जाना चाहिए. ‘’

ट्विटर पर पाकिस्तान के कई पत्रकारों ने लिखा है कि दूतावास का काम देश में निवेश लाना नहीं होता है लेकिन प्रधानमंत्री खुलेआम अपने राजदूतों से इस तरह की शिकायतें कर रहे हैं.

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