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चीन का ये क़दम क्या ऑस्ट्रेलिया पर भारी पड़ेगा?
चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच ख़राब होते राजनयिक संबंधों की ताज़ा कड़ी में चीन ने ऑस्ट्रेलिया के साथ आर्थिक बातचीत अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी है.
जब से ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जाँच की बात उठाई है और चीन की कंपनी ख़्वावे को 5जी नेटवर्क बनाने से रोका है तब से दोनों देशों के बीच रिश्ते ख़राब होते चले गए हैं.
पिछले साल चीन ने ऑस्ट्रेलिया से अपने यहां आने वाले शराब और बीफ़ पर पाबंदी लगा दी थी.
गुरुवार को चीन ने एक बयान जारी कर ऑस्ट्रेलिया पर 'शीत युद्ध के दिनों की मानसिकता' रखने का आरोप लगाया.
चीन के नेशनल डेवेलपमेंट एंड रिफ़ॉर्म कमिशन (एनडीआरसी) ने बयान जारी कर कहा, "हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के कुछ अधिकारियों ने चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच सामान्य बातचीत और सहयोग को बाधित करने के लिए शीत युद्ध के दिनों की मानसिकता और वैचारिक भेदभाव के कारण कई क़दम उठाए हैं."
चीन के इस फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री डैन टेहन ने कहा कि यह 'निराशाजनक' है लेकिन इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया ने बातचीत का रास्ता खुला रखा है.
इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने चीन के साथ होने वाली इस आर्थिक बातचीत को एक 'प्रमुख द्विपक्षीय आर्थिक बैठक' क़रार दिया था.
इससे पहले चीन ने दोनों देशों के बीच मंत्री के स्तर पर होने वाली बाचचीत को भी अनौपचारिक रूप से रोक दिया था.
ऑस्ट्रेलिया-चीन रिलेशन्स इंस्टीट्यूट के निदेशक जेम्स लॉरेनसेसन ने कहा कि चीन का यह क़दम दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में जमी बर्फ़ को और बढ़ाने वाला है.
उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "अब तक ऑस्ट्रेलिया और चीन कह रहे थे कि निचले स्तर पर रोज़मर्रा की बातचीत पहले की तरह सामान्य रूप से चलती रहेगी. और अब हम देख रहे हैं कि दोनों के बीच सहयोग और वार्ता बाधित की जा रही हैं."
व्यापारिक संबंधों में दरार
चीन का यह क़दम दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में आई दरार और जैसे को तैसा की नीति का यह सबसे ताज़ा उदाहरण है.
जेम्स लॉरेनसेसन ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई राज्य विक्टोरिया ने चीन के साथ बेल्ट एंड रोड परियोजना के तहत जो दो अनुबंध किए थे उसको ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने रद्द कर दिए थे, अब लगता है कि चीन इसी कारण जवाबी कार्रवाई कर रहा है.
उनका कहना था, "अगर चीन इसी हद तक बदला लेगा तो ऑस्ट्रेलिया काफ़ी राहत की सांस लेगा क्योंकि मुझे लगता है कि यह तो काफ़ी नपी-तुली कार्रवाई है. चीन-ऑस्ट्रेलिया मुक्त व्यापार समझौते से भी अलग हो सकता था लेकिन यह क़दम तो उससे बहुत दूर है."
ऑस्ट्रेलिया ने डार्विन बंदरगाह को चीन की एक कंपनी लैंडब्रिज को लीज़ पर दे दिया था, लेकिन अब ख़बर आ रही है कि ऑस्ट्रेलिया इस पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र दोबारा विचार कर रहा है और कुछ मीडिया घरानों का तो कहना है कि ऑस्ट्रेलिया अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर चीनी कंपनी को अपना कुछ हिस्सा बेचने के लिए मजबूर कर सकता है.
अब तक चीन ने अपनी नाख़ुशी व्यापारिक क़दमों के ज़रिए ही जताई है जिससे ऑस्ट्रेलिया की शराब, बार्ली और कोयला समेत दर्जनों कंपनियों प्रभावित हुईं हैं.
ऑस्ट्रेलिया के विदेशी मामलों और व्यापार के विभाग के अनुसार चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है और पूरी दुनिया से ऑस्ट्रेलिया जितना व्यापार करता है उसके अकेले 29 प्रतिशत व्यापार वो चीन से करता है.
साल 2020 में ऑस्ट्रेलिया में चीनी निवेश में 61 फ़ीसद की कमी आई है जो कि पिछले छह साल में सबसे कम है.
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