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कोरोनाः ब्रिटेन में बसे भारतीय संकट की इस घड़ी में अपनों के लिए क्या कर रहे हैं?
- Author, सीमा कोटेचा और जोसेफ़ ली
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, लंदन
भारत में ऑक्सीजन के लिए गिड़गिड़ाते लोगों को देख दुनिया दंग है. कोरोना के रिकॉर्ड मामलों के बीच पैदा हुई इस स्थिति ने तमाम देशों को हिला दिया है.
दुनियाभर में सबसे ज़्यादा संख्या में भारतीय ही विदेशों में रहते हैं. ऐसे में ब्रिटेन में रह रहे भारतीय मूल के लोगों का इस संकट पर क्या रुख़ रहा?
उत्तर-पश्चिम लंदन में वेम्बली के एक मंदिर में एक छोटी सी मंडली हज़ारों मील दूर रह रहे अपनों के लिए हनुमान चालीसा का पाठ कर रही है. भक्ति से भरे इन भजनों से ज़रूरतमंदों के कल्याण की कामना की जा रही है.
हालाँकि ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय के कई लोग दूसरे व्यावहारिक तरीक़ों से भी मदद करने में जुटे हैं. ऐसे ही लोगों में से एक ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट के चेयरमैन मनोज बडाले हैं.
वो कहते हैं, ''भारत में जो आपदा आई है, उससे यहाँ रहने वाला शायद ही कोई भारतवंशी अछूता रहा हो.''
उन्होंने कहा, ''मेरे परिवार के काफ़ी लोग भारत में हैं. मेरी बहन डॉक्टर हैं. मेरी भांजी और भांजा भी डॉक्टर हैं. हम दिल दहलाने वाली कहानियाँ सुन रहे हैं. यह सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि किस तरह पिछले सप्ताह यह संकट इतना बढ़ गया.''
ब्रिटेन में रह रहे एशियाई मूल के लोगों की यह संस्था, जो विकास की परियोजनाओं को मदद देती है, फ़िलहाल सबसे अहम ऑक्सीजन की कमी को दूर करने पर अपना ध्यान लगा रही है.
प्रिंस ऑफ वेल्स प्रिंस चार्ल्स ने इस ट्रस्ट की इमरजेंसी अपील को अपना समर्थन दिया है. उन्होंने कहा है कि भारत के पीड़ित लोगों के लिए वे चिंतित हैं और उनके लिए दुआ कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि इस महामारी के दौरान भारत की ओर से दूसरे देशों को काफ़ी मदद मिली. भारत ने दूसरों की जैसी मदद की, अब हमें भी उनकी मदद करनी चाहिए.''
प्रिंस ने ट्रस्ट के 'ऑक्सीजन फ़ॉर इंडिया' अभियान को अपनी ओर से निजी दान भी दिया है.
ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर्स ख़रीदने की अपील ने पहले ही लाखों पाउंड जुटा लिए हैं. आपदा की इस घड़ी में अस्पतालों पर दबाव बढ़ने पर यह उपकरण बड़ा काम का साबित हो रहा है. यह सीधे हवा से ऑक्सीजन सोखकर मरीज़ों को ऑक्सीजन मुहैया कराता है.
मदद जुटाने में लगी कई संस्थाएँ
यह ट्रस्ट अपने मिशन में अकेला नहीं है. ब्रिटिश इंडियंस नाम की संस्था ने 'गो फंड मी' अभियान की शुरुआत की है. इसने पहले ही दिन चंदे के शुरुआती लक्ष्य 1,60,000 पाउंड को पा लिया. इससे आराम से 200 ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर्स ख़रीदे जा सकते हैं. अब तक इस संस्था ने 3,00,000 पाउंड से अधिक चंदा जमा कर लिया है.
बडाले ने बताया कि ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट ने 14 सालों से दक्षिण एशिया में आए संकटों के दौरान मदद पहुँचाई है. लेकिन यह संकट सबसे अलग है.
वे कहते हैं, "इस आपदा ने सब पर असर डाला है. ऐसा नहीं है कि इससे सिर्फ़ ब्रिटेन के एशियाई मूल के लोग महसूस कर रहे हैं, बल्कि अंग्रेज़ भी इससे आहत हैं. हमें मिली बड़ी दान राशियों में से कई उन अंग्रेज़ों ने दी हैं, जो ख़बरों में भारत के संकट को देख रहे हैं.''
भारतीय डॉक्टर भी कर रहे हैं प्रयास
ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय डॉक्टरों के समूह लोगों की मदद के अन्य तरीक़े खोज रहे हैं.
ब्रिस्टल में कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में काम करने वाले अमरदीप दस्तीदार भारत के परेशान मरीज़ों को टेलीमेडिसिन चिकित्सा मुहैया करा रहे हैं.
वे कहते हैं, ''किसी भी बीमारी की दूसरी लहर हमेशा मुश्किल होती है, क्योंकि पहली लहर की तुलना में मानसिक दशा पूरी तरह से अलग होती है.''
उन्होंने बताया, ''इस संकट से निजी तौर पर मुझे भी दो-चार होना पड़ा है. मेरा भाई कोरोना से संक्रमित हुआ था. उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. सात दिनों तक वह आईसीयू में रहा. वह बहुत कठिन समय समय था.''
अमरदीप दस्तीदार भारत के अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के ज़रिए लोगों की मदद कर रहे हैं. कोविड का इलाज करने में अपनी कुशलता को लोगों से उनकी भाषा में साझा कर रहे हैं. वे कहते हैं कि सब इससे डरे हुए हैं. मुझे लगता है कि सभी को थोड़ी मदद की ज़रूरत है.''
भारतीय मूल के ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन नाम की संस्था को संक्षेप में बापियो भी कहते हैं. इससे जुड़े डॉक्टर डॉ. दस्तीदार की तरह ही टेलीमेडिसिन के एक आधिकारिक कार्यक्रम के ज़रिए भारत के डॉक्टरों की अनौपचारिक मदद करने जा रहे हैं. इनकी कोशिश है कि भारत के डॉक्टरों पर काम के दबाव को कम किया जा सके. इसके अलावा ये लोग ऑक्सीजन देने वाले उपकरण के लिए भी पैसे इकट्ठा कर रहे हैं.
लाचारों के लिए प्रार्थना बहुत ज़रूरी
वेंबली में श्री वल्लभ निधि मंदिर के अध्यक्ष नरेंद्र ठकरार ने कहा कि ब्रिटेन का भारतीय समुदाय भारत में आई आपदा को बहुत गहराई से महसूस कर रहा है.
उन्होंने आगे कहा, ''यहां रह रहे भारतीयों के सभी रिश्तेदार वहां रहते हैं. कई लोग तो वहां जाना भी चाहते हैं. कई लोग अपने संबंधियों को देख नहीं पाए, जबकि कई लोग तो मृतकों के अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो पाए.''
इसलिए चंदा जमा करने और ऑक्सीजन के उपकरण खरीदने की तरह वेंबली के मंदिर में जुटी भीड़ लोगों के लिए दुआ कर रही है.
मंदिर के पुजारी भाविक पंड्या कहते हैं, ''एक पुजारी के रूप में यह मेरा कर्तव्य है कि हम इस ब्रह्मांड और दुनिया के लिए प्रार्थना करें. ये पूरी दुनिया हमारा परिवार है और हर जगह हमारी ज़िम्मेदारी है.''
वे कहते हैं, ''ऑक्सीजन की कमी होने का मतलब है कि लोग बहुत डरे हुए हैं. हम भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि वे कृपया हमारी मातृभूमि की रक्षा करें.''
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