मोदी के दौरे पर बांग्लादेश के ब्राह्मणबरिया में इतनी हिंसा कैसे शुरू हुई

    • Author, शहनाज़ परवीन
    • पदनाम, बीबीसी बांग्ला, ढाका

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के ख़िलाफ़ हुए हिंसक प्रदर्शनों में सबसे ज़्यादा मौतें बांग्लादेश के ब्राह्मणबरिया ज़िले में हुई हैं.

हालांकि, मोदी के दौरे को लेकर झड़पें ढाका के बैतूल मुकर्रम इलाक़े में शुरू हुई थीं, लेकिन ब्राह्मणबरिया में इसने सबसे हिंसक रूप ले लिया.

जिन 12 मौतों की पुष्टि हुई है, उनमें से छह इसी ज़िले में हुई हैं. रविवार को शहर में कई सरकारी दफ़्तरों और सांस्कृतिक संस्थाओं में आगजनी की गई.

चश्मदीदों के अनुभव

ब्राह्मणबरिया के बनिक पारा में एक परिवार अपने घर में लगी आग में फंस गया था.

एक गृहणी और दो बच्चों की मां अपने घर पर रविवार को हुए हमले के बारे में बताती हैं. वो कहती हैं, "हम इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं. वो आए और बोले कि बाहर निकलो. उन्होंने आग लगा दी. लेकिन हम में दरवाज़ा खोलने की हिम्मत नहीं थी. दरवाज़े के सामने आग लगी हुई थी."

घर से बाहर निकलने में असमर्थ वो अपने पति के साथ 90 साल की सास को लेकर पांच मंज़िला इमारत की छत पर चली गईं.

वो बताती हैं, "पूरी इमारत धुएं से काली हो गई थी. मेरा एक बच्चा शारीरिक रूप से अक्षम है. मैं बच्चों को धुएं में ढूंढ नहीं पा रही थी."

स्थानीय पत्रकार माशूक ह्रदय ने रविवार को ब्राह्मणबरिया में हुई हिंसा की तुलना युद्ध के मैदान से की.

उन्होंने कहा, "हमलावरों ने डर का माहौल बना दिया, जिसमें व्यापारी से लेकर वहां के घरों के लोग, हर कोई डरा हुआ था."

आगजनी, हमला और लूट

कई अन्य ज़िलों की तरह ही ब्राह्मणबरिया एक सड़क के आस-पास बसा है. सड़क का नाम है टी-ए रोड.

शहर के लिए महत्वपूर्ण सब कुछ इस सड़क के दोनों किनारों पर स्थित है.

स्थानीय प्रशासन, पत्रकारों और चश्मदीदों के मुताबिक़, ज़िला मुख्यालय, नगर पालिका परिषद, कला, केंद्रीय पुस्तकालय, नगरपालिका सभागार, भूमि कार्यालय और प्रेस क्लब समेत टी-ए रोड के दोनों तरफ स्थित अन्य सरकारी इमारतों को आग लगा दी गई थी. हिंसा सुबह 11 बजे से शुरू हुई थी.

जला दिए गए रेलवे स्टेशन से गुज़र रही ट्रेन पर भी हमला किया गया.

एक अन्य चश्मदीद, जो कि एक वकील हैं, उन्होंने बताया कि शहर के काली मंदिर में उन्होंने क्या देखा.

"मैं काली मंदिर गया और देखा कि वहां लूट चल रही है. मंदिर की मूर्तियां तोड़ी जा रही थीं और दान पात्र को खोला जा रहा था और पुलिस कहीं भी नहीं थी. वो पुलिस स्टेशन में थी. उनके पास दो वॉटर कैनन थे और दो जला दिए गए थे. लेकिन उनके पास आत्म-रक्षा के लिए कोई तरीक़ा नहीं था."

रविवार की हिंसा ऐसे शुरू हुई?

हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम ने आरोप लगाया कि ज़िले के 100 साल पुराने जामिया यूनुसिया मदरसे पर शनिवार शाम आवामी लीग के जुलूस के दौरान हमला किया गया था.

स्थानीय पत्रकार भी इस तरह के हमले का हवाला करते हैं और कहते हैं कि इसकी वजह से हालात और बिगड़े.

ब्राह्मणबरिया में हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम के प्रचार सचिव मुफ़्ती इनामुल हक़ कहते हैं, ब्राह्मणबरिया में जामिया इस्लामी यूनुसिया मदरसा नाम का एक 100 साल पुराना मदरसा है.

हालांकि उन्होंने आगजनी और तोड़फोड़ की ज़िम्मेदारी से इनकार किया.

"हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम का मुख्य कार्यक्रम मोदी के पहुंचने के साथ था. लेकिन कुछ राजनीतिक पार्टियों ने अराजकता का माहौल बना दिया. ब्राह्मणबरिया के लोग इस हमले के लिए स्थानीय सांसद पर उंगली उठा रहे हैं."

सांसद का क्या कहना है?

जिस तरह हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम शहर में बड़े पैमाने पर हुई आगजनी और तोड़फोड़ की ज़िम्मेदारी नहीं ले रहा है, वैसे ही वो सांसद भी नहीं ले रहे जिन पर संगठन ने आरोप लगाए हैं.

सदर क्षेत्र ब्राह्मणबरिया-3 निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इस निर्वाचन क्षेत्र से सांसद ओबैदुल मुक्तदिर चौधरी ने शनिवार शाम के जुलूस का नेतृत्व किया था.

उनका कहना है कि जुलूस ने मदरसे के इलाक़े में प्रवेश नहीं किया था.

उन्होंने कहा, "इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है. एक दिन पहले बंगबंधु का भित्ति-चित्र तोड़ा गया था. प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों पर हमला किया गया था. रेलवे स्टेशन को जलाया गया था. इन्हीं वजहों से हमने प्रदर्शन जुलूस निकाला. हम मदरसा क्षेत्र में नहीं गए. मैं उनसे (हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम से) कहूंगा कि वो झूठ का सहारा ना लें."

इससे एक दिन पहले बांग्लादेश के गृह मंत्री ने पत्रकारों से कहा था कि हमले से लगता है कि प्रतिबंधित चरमपंथी समूह के सदस्य इसमें शामिल थे.

क्या किसी तीसरे पक्ष ने इतनी तबाही की, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है. स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने पर जवाब नहीं मिला.

ब्राह्मणबरिया में प्रदर्शन शुरू होने के बाद से ज़िले की पुलिस निशाने पर है.

बीबीसी बांग्ला ने सोमवार को पूरे दिन पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की. लेकिन उनसे कोई जवाब नहीं मिली.

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