म्यांमार तख़्तापलट: सेना के 'ख़ूनी संघर्ष' में 100 से ज़्यादा लोगों की मौत

म्यांमार

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म्यांमार में शनिवार को 'ऑर्म्ड फ़ोर्सेज़ डे' के मौक़े पर सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच ज़बर्दस्त झड़पें हुई हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सुरक्षाबलों की गोलियों से 100 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी मारे गए हैं जिनमें बच्चे भी शामिल हैं.

अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन के अधिकारियों ने म्यांमार में शनिवार को हुई हिंसा की भर्त्सना की है.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने ट्वीट किया है, "बर्मा के सुरक्षाबलों के ज़रिए किए गए ख़ून-ख़राबे से हमलोग स्तब्ध हैं. ऐसा लगता है कि मिलिट्री जुनटा कुछ लोगों की सेवा करने के लिए आम लोगों की ज़िंदगी क़ुर्बान कर देगी. मैं पीड़ितों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं भेजता हूं. बर्मा की बहादुर जनता ने सेना के आंतक के युग को नकार दिया है."

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ब्रितानी राजदूत डेन चग ने एक बयान में कहा है कि सुरक्षाबलों ने निहत्थे नागरिकों पर गोलियां चलाकर अपनी प्रतिष्ठा खो दी है.

अमेरिकी दूतावास का कहना है कि सुरक्षाबल 'निहत्थे आम नागरिकों की हत्या' कर रहे हैं.

प्रदर्शनकारी

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लोकतंत्र की रक्षा करेगी सेना: सैन्य प्रमुख

इससे पहले सैन्य प्रमुख मिन आंग लाइंग ने शनिवार को नेशनल टेलीविज़न पर अपने संबोधन में कहा कि वो 'लोकतंत्र की रक्षा' करेंगे.

उन्होंने वादा किया कि देश में चुनाव कराए जाएंगे लेकिन चुनाव कब कराए जाएंगे, इस बारे में सैन्य प्रमुख मिन आंग लाइंग ने कुछ नहीं बताया.

सैन्य प्रमुख मिन आंग लाइंग

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उन्होंने कहा कि सेना को सत्ता में आना पड़ा क्योंकि लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी गईं नेता आंग सांग सू ची और उनकी पार्टी ने 'ग़ैर-क़ानूनी कार्य' किए थे.

सैन्य प्रमुख ने यह नहीं बताया कि सेना को प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने के आदेश दिए गए हैं या नहीं. हालांकि इससे पहले उन्होंने दावा किया था कि गोलियां प्रदर्शनकारियों की तरफ़ से चलाई जा रही हैं.

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म्यांमार को बर्मा के नाम से भी जाना जाता है. यह देश वर्ष 1948 में ब्रिटेन से आज़ाद हुआ और उसके बाद अधिकतर वर्षों तक सैन्य शासन के अधीन रहा.

म्यांमार में इस साल फ़रवरी में सेना ने तख़्ता पलट किया और सत्ता पर क़ाबिज़ हो गई. तब से सेना विरोधी प्रदर्शनों में 400 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

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सरकारी टेलीविज़न ने शुक्रवार को चेतावनी देते हुए कहा कि लोगों को बीते दिनों हुई मौतों से सबक़ लेना चाहिए कि उन्हें भी सिर या पीछे से गोली लग सकती है.

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शनिवार को म्यांमार में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं जबकि सेना ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सख़्ती से पेश आने की चेतावनी पहले ही दे दी थी.

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म्यांमार के प्रमुख शहरों ख़ासतौर पर रंगून में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षाबलों ने काफ़ी तैयारी की थी.

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एक पत्रकार ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई हैं.

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