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म्यांमार विरोध प्रदर्शन: रविवार को यंगून में 21 प्रदर्शनकारियों की मौत, देशभर में 38 लोगों के मारे जाने का दावा
म्यांमार के मुख्य शहर यंगून में हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 21 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की ख़बर है. इससे पूर्व म्यांमार के नेताओं के एक समूह के लीडर ने अधिकारियों के खिलाफ़ "क्रांति" की बात कही थी.
हालांकि द असिस्टेंट एसोसिएशन फ़ॉर पॉलिटिकल प्रीज़नर्स (एएपीपी) के मॉनिटरिंग ग्रुप का अनुमान है कि रविवार को देश में कम से कम 38 लोगों की जान गई है.
ग्रुप का अनुमान है कि रविवार को यंगून में मारे गए 21 लोगों के अलावा देश के दूसरे हिस्सों से भी लोग मारे गए हैं.
सुरक्षा बलों ने यंगून के हलिंग थारयार इलाक़े में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां चलाईं, वहीं प्रदर्शन कर रहे लोगों ने भी लाठियों और चाकू का इस्तेमाल किया.
चीनी व्यवसायियों पर हमले के बाद से सैन्य अधिकारियों ने क्षेत्र में मार्शल लॉ की घोषणा कर दी है. प्रदर्शन कर रहे लोगों का मानना है कि चीन, सेना को समर्थन दे रहा है.
एक फ़रवरी को हुए सैन्य-तख़्तापलट के बाद से ही म्यांमार विरोध प्रदर्शनों की चपेट में है.
एक फ़रवरी को म्यांमार की सेना ने देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू ची समेत कई नेताओं को गिरफ़्तार करने के बाद सत्ता अपने हाथ में ले ली थी.
एनएलडी को पिछले साल हुए चुनावों में बड़ी जीत हासिल हुई थी लेकिन सेना ने कहा कि चुनाव में फ़र्जीवाड़ा हुआ था.
एनएलडी की प्रमुख आंग सान सू ची पर वहां की पुलिस ने भी कई आरोप लगाए हैं.
गिरफ़्तारी से बच गए सांसदों ने एक नया ग्रुप बना लिया था जिसे कमेटी फ़ॉर रिप्रेज़ेंटिंग यूनियन पार्लियामेंट या सीआरपीएच कहते हैं.
म्हान विन खाइंग थान को इसका कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया था. सीआरपीएच म्यांमार की असली सरकार के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाह रही है.
थान ने फ़ेसबुक पर अपने भाषण में कहा था, "ये वक्त इस काले समय में नागरिकों की क्षमता को टेस्ट करने का है."
"एक संघीय लोकतंत्र बनाने के लिए, वो सभी भाई, जो दशकों से तानाशाही से विभिन्न प्रकार के उत्पीड़न झेल रहे हैं, वास्तव में वांछित हैं, यह क्रांति हमारे लिए अपने प्रयासों को एक साथ रखने का मौका है."
सेना ने चुनी हुई सरकार के तख़्तापलट के बाद म्हान विम खाइंग थान को निष्कासित कर दिया था.
वो उन चुने हुए नेताओं का छुप कर नेतृत्व कर रहे हैं जिन्होंने पिछले महीने सेना के तख्तापलट को मानने से इनकार कर दिया था.
एक साल का आपातकाल
तख्तापलट की अनुवाई करने वाले सेना के जनरल मिन ऑन्ग ह्लाइंग ने देश में एक साल का आपातकाल लगा दिया है.
सेना ने तख्तापलट को ये कहते हुए सही ठहराया है कि बीते साल हुए चुनावों में धांधली हुई थी. इन चुनावों में आंग सान सू ची का पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी ने एकतरफ़ा जीत हासिल की.
चुनाव में क्या हुआ था
8 नवंबर को आए चुनावी नतीजों में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी ने 83% सीटें जीत ली थीं. इस चुनाव को कई लोगों को आंग सान सू ची सरकार के जनमत संग्रह के रूप में देखा. साल 2011 में सैन्य शासन ख़त्म होने के बाद से ये दूसरा चुनाव था.
लेकिन म्यांमार की सेना ने इन चुनावी नतीजों पर सवाल खड़े किए. सेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति और चुनाव आयोग के अध्यक्ष के ख़िलाफ़ शिकायत की गई.
कौन हैं जनरल मिन ऑन्ग ह्लाइंग
सैन्य तख़्तापलट के बाद सेना के जनरल मिन ऑन्ग ह्लाइंग म्यांमार में सबसे ताकतवर व्यक्ति बन चुके हैं. 64 वर्षीय ह्लाइंग इसी साल जुलाई के महीने में रिटायर होने वाले थे. लेकिन आपातकाल की घोषणा के साथ ही म्यांमार में ह्लाइंग की पकड़ काफ़ी मजबूत हो गई है.
लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए मिन ऑन्ग ह्लाइंग ने एक लंबा सफर तय किया है. सेना में प्रवेश के लिए दो असफल प्रयासों के बाद ह्लाइंग को तीसरी बार में नेशनल डिफेंस एकेडमी में प्रवेश मिला.
इसके बाद म्यांमार की ताकतवर सेना तत्मडा में जनरल के पद तक पहुंचने का सफर उन्होंने धीरे-धीरे तय किया है.
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