सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हूथी विद्रोहियों के हमलों की गूँज भारत में

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
यमन में ईरान समर्थित हूथी बाग़ी ग्रुप के सऊदी अरब के तेल भंडारों पर हमलों की गूँज भारत में भी सुनाई पड़ रही है.
रविवार को हूथी विद्रोहियों के सऊदी अरब पर एक हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल का दाम (बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम) लगभग तीन प्रतिशत बढ़ कर 71.37 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँचा. ज़ाहिर है इसका असर भारत पर भी पड़ेगा, क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था की निर्भरता काफ़ी हद तक तेल के आयात पर है.
पिछले साल फ़रवरी के बाद शुरू हुए महामारी के शुरुआती हफ़्तों में ब्रेंट क्रूड (कच्चे तेल) का दाम घट कर 20 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँचा था. उस समय से अब तक इसमें 83 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो भारत में पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दाम के कई कारणों में से एक बड़ा कारण है.
सऊदी अरब दुनिया में सबसे अधिक तेल पैदा करता है और ये भारत को तेल निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश है. भारत तेल आयात करने वाला अमेरिका और चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा देश है और इसने पिछले साल अपनी ज़रूरत के पेट्रोलियम उत्पाद का 85 प्रतिशत हिस्सा आयात किया था, जिस पर इसने 120 अरब डॉलर ख़र्च किए थे.
भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर

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इसलिए सऊदी अरब पर हमलों का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर होता है.
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल कई गुना बढ़ जाता है.
दूसरी तरफ़ पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीज़ल के दाम भी बढ़ जाते हैं. इन दिनों भारत के कुछ शहरों में पहली बार पेट्रोल का दाम 100 रुपये प्रति लीटर तक पहुँच गया है.
कच्चे तेल और पेट्रोलियम पदार्थों के आयात और निर्यात पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञ और मुंबई में गुप्ता कमोडिटीज़ के अध्यक्ष प्रतीक गुप्ता के अनुसार खाड़ी देशों में पिछले छह सालों से छिड़े युद्ध से तेल के बाज़ार में अनिश्चितता आई है.
वो कहते हैं, "भारत चाहता है कि सऊदी अरब और यमन के हूथियों के बीच शांति स्थापित हो, क्योंकि दोनों के बीच जारी युद्ध से कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं और ये भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है."
लेकिन ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) के पूर्व अध्यक्ष आरएस शर्मा के अनुसार सऊदी अरब पर हमलों से तेल के भाव जो बढ़ते हैं, वो कुछ समय के लिए होते हैं. एक-दो दिनों के बाद दाम फिर से कम होने लगते हैं.
वो कहते हैं, "दुनिया के सभी विशेषज्ञ भविष्यवाणी कर रहे हैं कि इस साल तेल के दाम और भी बढ़ेंगे. मेरे विचार से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में दाम नहीं बढ़ेंगे, क्योंकि रूस और अमेरिका तेल का उत्पादन बढ़ाएँगे, जिसके कारण बाज़ार में तेल सप्लाई ठोस रहेगी और दाम नियंत्रण में रहेगा."
रविवार को ईरान समर्थित हूथी बाग़ी ग्रुप के प्रवक्ता याहिया सारी ने दावा किया कि ग्रुप ने सऊदी अरब में आठ बैलिस्टिक मिसाइलें दाग़ी और 14 बम से लदे ड्रोनों से हमला किया.
सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि रविवार को रास तनुरा निर्यात टर्मिनल पर ड्रोन से हमला किया गया, जिसमें कोई जान या माल का नुक़सान नहीं हुआ.
रास तनुरा दुनिया का सबसे बड़ा तेल टर्मिनल है, जो एक दिन में लगभग 65 लाख बैरल निर्यात करने में सक्षम है, जो दुनिया की माँग का 7% तेल है. ये सबसे सुरक्षित टर्मिनलों में से एक है.
हूथी विद्रोहियों के हमले

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छह साल पहले यमन में गृहयुद्ध के बाद शिया हूथी मिलिशिया ने देश के उत्तरी भाग और राजधानी सना पर क़ब्ज़ा कर लिया. सऊदी अरब ने कहा कि इस मिलिशिया को ईरान का समर्थन हासिल है. इसने संयुक्त अरब अमीरात जैसे कुछ खाड़ी देशों के साथ सैन्य गठबंधन करके 2015 में यमन में हूथी मिलिशिया पर चढ़ाई कर दी.
इस युद्ध में अब तक 12000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो गए हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि युद्ध के कारण यमन में दुनिया का सबसे बुरा मानवीय संकट पैदा हो गया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में हूथी विद्रोहियों को चरमपंथी घोषित कर दिया गया था, लेकिन जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद उस फ़ैसले को वापस ले लिया गया. इसके बाद से हूथी बाग़ियों के सऊदी अरब के अंदर ड्रोन और मिसाइल हमले बढ़ गए हैं. रविवार का हमला एक सप्ताह में दूसरी बार था.
इन हमलों से बाइडन प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं. साथ ही तेल का अंतरराष्ट्रीय बाज़ार अस्थिर हो गया है. इस अनिश्चितता के कारण तेल के दाम में बढ़ोतरी हो रही है. दूसरी तरफ़ तेल पैदा करने वाले देशों के संगठन ओपेक ने तेल का उत्पादन कम कर दिया है, ताकि माँग बढ़े और तेल के दाम भी.
भारत सरकार ने सऊदी अरब और तेल पैदा करने वाले दूसरे बड़े देशों से अपील की थी कि वो तेल का उत्पादन बढ़ाएँ, ताकि तेल के दाम कम हो सकें. लेकिन इन देशों ने भारत की माँग को ठुकरा दिया.
तेल विशेषज्ञ और ओएनजीसी के पूर्व अध्यक्ष आरएस शर्मा कहते हैं, "तेल के बाज़ार में अनिश्चितता देश में पेट्रोल पंप पर मिलने वाले पेट्रोल और डीज़ल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के भाव से जुड़े होते हैं. इसका मतलब ये हुआ कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल का दाम घटे या बढ़े, तो भारत में भी इसी तरह का उतार-चढाव नज़र आना चाहिए. लेकिन पिछले छह साल में ऐसा हुआ नहीं."
भारत की विशाल अर्थव्यवस्था के विकास में तेल ईंधन का काम करता है. अगर तेल की क़ीमतें बढ़ती रहीं, तो मुद्रा स्फ़ीति, जीडीपी और चालू खाता पर दबाव बढ़ेगा. जिससे अर्थव्यवस्था की सेहत ख़राब हो सकती है और इसका गंभीर असर माँग पर पड़ सकता है और फिर आर्थिक विकास भी प्रभावित होगा.

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