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नलेली कोबो: तेल के कुंओं से होने वाले प्रदूषण के ख़िलाफ़ लड़ने वाली 19 साल की लड़की
- Author, पैट्रिसिया सल्बरन लोवेरा
- पदनाम, बीबीसी मुंडो
अमेरिकी प्रांत लॉस एंजेल्स में जब आम लोगों ने एक तेल कंपनी के ख़िलाफ़ संघर्ष शुरू किया तो उसके केंद्र में एक छोटी-सी बच्ची थी जो सांस की बीमारी से जूझ रही थी. लोगों का कहना था कि तेल कंपनी उनके वातावरण को प्रभावित कर रही है.
नलेली कोबो तब सिर्फ 9 साल की थीं जब वह अस्थमा, नाक से खून निकलने और सिर दर्द से परेशान होने लगीं थीं.
यहीं से शुरू हुई उनकी लड़ाई.
लॉस एंजेल्स में उनके घर से सिर्फ़ कुछ दूरी पर तेल का एक कुंआ था, जो कि सक्रिय था. नलेली ने इसके ख़िलाफ़ लड़ाई शुरू की. नलेली और उनकी मां को कुछ समय बाद पता चला कि उस तेल के कुंए का असर सिर्फ़ वो ही महसूस नहीं कर रहे थे, उनके पड़ोसियों में से भी कुछ बीमार हो रहे थे.
नलेली जहां रहती थीं, वहां रहने वाले ज़्यादातर लोग कम आय वाले ही थे. लेकिन उन्होंने अपनी आवाज़ तब तक बुलंद रखी जब तक उन्होंने उस साइट को अस्थाई तौर पर बंद नहीं करवा दिया.
लेकिन नलेली यहीं नहीं रुकीं. उन्होंने युवा कार्यकर्ताओं के संगठन के साथ मिलकर और दूसरे संस्थानों के सहयोग से तेल के कुंए से तेल निकालने को लेकर लागू प्रतिबंधों को और सख़्त करने की मांग की और उन्हें इसमें कामयाबी भी मिली.
तेल के कुंए के अधिकार वाली कंपनी के ख़िलाफ़ एक आधिकारिक मामला दर्ज करवाया गया. हालांकि जब हमने इस कंपनी से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनक़ार कर दिया.
नलेली की तुलना पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग से की जाती है. हालांकि नलेली को स्थानीय लोग बीते एक दशक से अधिक समय से जानते हैं.
19 साल की उम्र में चला कैंसर का पता
नलेली उस समय 19 साल की थीं जब उन्हें पता चला कि उन्हें कैंसर है. इसके बाद उन्होंने साल 2020 की शुरुआत में ही पर्यावरण और दूसरे सामाजिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता को सीमित कर दिया.
उनके डॉक्टर को नहीं पता है कि उन्हें कैंसर कैसे और क्यों हुआ. तीन ऑपरेशन और मेडिकल ट्रीटमेंट के बाद हाल ही में उन्हें कैंसर-फ्री घोषित किया गया है.
नलेली की कहानी
मैं साउथ-सेंट्रल लॉस एंजेल्स के यूनिवर्सिटी पार्क में पली और बड़ी हुई. जहां हम रहते थे वहां से सड़क पार करके महज़ 30 फ़ीट की दूरी पर एलेनको के स्वामित्व वाला एक तेल का कुंआ था. जिसे कंपनी ने साल 2009 में लिया था.
मैं मेरी मां के साथ रहती थी. मेरे तीन भाई-बहन थे. मेरी दादी थीं, मेरे पर-दादा, पर-दादी थीं. हम सभी एक ही अपार्टमेंट में रहते थे. मुझे लेकर हमारे परिवार में कुल आठ सदस्य थे.
मेरी मां मेक्सिको से हैं और मेरे पिता कोलंबिया से. जब मैं दो साल की थी तो उन्हें डिपोर्ट कर दिया गया और उनके बाद मेरी मां ने ही मुझे पाला.
यह साल 2010 की घटना है और उस समय मैं नौ साल की थी. अचानक से एक दिन मुझे पेट में तेज़ दर्द हुआ और उल्टियां शुरू हो गईं.
मेरा शरीर इस तरह दर्द से ऐंठने लगा कि मैं चल तक नहीं पा रही थी. मेरी मां को मुझे उठाकर लेकर जाना पड़ा क्योंकि मैं एकदम जम-सी गई थी. मेरी नाक से खून आना शुरू हो गया था. मुझे नीचे बैठे-बैठे सोना पड़ता था ताकि जब मैं सुबह सोकर उठूं तो अपने ही खून से नहाई हुई ना दिखूं. मैं मेरे ही घर में थी, जहां मुझे कोई साइलेंट किलर धीरे-धीरे ज़हर में डुबो रहा था.
जब मैंने और मेरी मां ने इस पर ध्यान दिया तो हमें समझ आया कि इससे सिर्फ़ मेरे स्वास्थ्य पर असर नहीं पड़ रहा था बल्कि हर किसी पर इसका अपने तरीक़े से असर पड़ रहा था.
मेरी मां को चालीस साल की उम्र में ही सांस की बीमारी हो गई थी, जो अपने-आप में अचरज की बात है. मेरी दादी को 70 साल की उम्र में अस्थमा की शिकायत हो गई. मेरी बहन को फाइब्रॉयड की समस्या थी और मेरे भाई को भी अस्थमा था. हर कोई किसी ना किसी तरह की बीमारी से जूझ रहा था.
लेकिन इन बीमारियों का शिकार सिर्फ़ मेरा परिवार नहीं हो रहा था. वहां रहने वाले और भी लोग इससे जूझ रहे थे.
लोगों ने एक-दूसरे को जब इस बारे में कुछ-कुछ बताना शुरू किया तब हर किसी ने इस संबंध में अपना मत रखा और सभी ने यह माना कि कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है.
इस गड़बड़ी या बदली हवा को हम सूंघ कर समझ सकते थे. यह गंध सड़े हुए अंडे की तरह थी और अगर यह गंध एक बार घर में घुस जाती थी तो आसानी से दूर नहीं होती थी. कई बार अमरूद या फिर चॉकलेट-सी महक आती थी, जो कि कृत्रिम खूशबू होती थी.
शुरुआत में हमने अपनी बिल्डिंग में ही देखना शुरू किया कि कहीं बिल्डिंग में ही तो कुछ नहीं रिस रहा. लेकिन उसके बाद हमने टॉक्सिकोलॉजिस्ट की मदद ली और फिर उस इलाक़े में रहने वाले लोगों से बात की.
टॉक्सिकोलॉजिस्ट्स ने हमें बताया कि तेल को साफ़ करने और उसके उत्सर्जन के लिए कुछ रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है. उन्होंने यह भी बताया कि अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक इसके संपर्क में रहेगा को उसकी सेहत पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
यही वो समय था जब हमने सड़क पार के उस तेल के कुंए के बारे में जाना.
हमने लोगों को जमा करना शुरू किया और पीपुल नॉट पोज़ोस नाम से एक कैंपेन तैयार किया. पोज़ोस एक स्पेनिश शब्द है जिसका मतलब तेल के कुंए होता है.
हमने साउथ कोस्ट एयर क्वालिटी मैनेजमेंट डिस्ट्रिक्ट में इस संबंध में शिकायत दायर करवायी. हमने घर-घर जाकर लोगों का दरवाज़ा खटखटाया और उनसे कहा कि क्या वे सिटी हॉल में आकर अपनी कहानी बताएंगे. यह अपने आप में बेहद प्रभावित करने वाला था कि स्पैनिश लोग, काले और भूरे लोग और प्रवासी सभी सिटी हॉल में आकर हमें सुनते थे.
लॉस एंजेल्स टाइम्स ने हमारे बारे में एक कहानी लिखी और इसने यूएस के पूर्व कैलिफ़ोर्निया सीनेटर बारबरा बॉक्सर का ध्यान अपनी ओर खींचा.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बॉक्स अपने साथ पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के जांचकर्ताओं को साथ लेकर आए और इसके बाद उन्होंने जांच की. वे कुछ ही मिनटों के लिए उस जगह पर रह पाए क्योंकि उस गंध का असर उन पर होने लगा था.
(स्थानीय और संघीय जांच के बाद एलनको ने अस्थाई तौर पर साइट को बंद करने के लिए सहमति दे दी.)
(लॉस एंजेल्स शहर ने कंपनी पर मुक़दमा दायर किया और 2016 में अदालत का आदेश आया. जिसमें कहा गया कि कंपनी और सख़्त नियमों का पालन करने की ज़रूरत है. कोर्ट के आदेश में कहा गया कि अगर वे दोबारा से ड्रिलिंग शुरू करना चाहते हैं तो उन्हें पहले से अधिक सख़्त नियमों की पालन करना होगा.)
जब यह घोषणा हुई तो हम सभी बहुत खुश हुए लेकिन यह एक लंबी लड़ाई के बाद हुआ. हमने यह लड़ाई 2010 में शुरू की थी लेकिन यह फ़ैसला साल 2013 में आया. और अब हम चाहते हैं कि यह स्थायी तौर पर बंद हो जाएं.
मैं साउथ सेंट्रल यूथ लीडरशिप कोलिएशन के सह-संस्थापकों में से एक हूं और अन्य संगठनों के साथ मिलकर हमने कैलिफ़ोर्निया पर्यावरण गुणवत्ता अधिनियम के उल्लंघन के लिए 2015 में लॉस एंजेल्स शहर पर मुक़दमा भी दायर किया था. हम जीत गए और इसका मतलब ये हुआ कि अब जब भी कोई नए कुंओं को खोलेगा या फिर उनका विस्तार करेगा तो उसे नए तरीक़े से आवेदन करना होगा.
भले ही अब मैं वहां नहीं रहती लेकिन मैं तेल के कुंओं और स्कूलों या फिर अस्पतालों या फिर पार्क के बीच कम से कम 2300 फ़ीट के बफ़र ज़ोन बनाने के लिए अभियान चलाती हूं.
एक कार्यकर्ता होने के अलावा मैं किसी भी दूसरे बच्चे की तरह हूं. मुझे मेकअप पसंद है, मुझे घूमना पसंद है. मैं एक डांसर हूं और मैं फ़िलहाल कॉलेज में पढ़ रही हूं.
केवल एक चीज़ जो मुझे कई दूसरे लोगों से अलग करती है वो यह कि मुझे किस चीज़ को करने में सबसे अधिक खुशी मिलती है और जिसे मैं जुनून के साथ करती हूं वो मुझे की लोगों की तुलना में पहले पता चल गया.
15 जनवरी साल 2020 में मुझे मेरे कैंसर के बारे में पता चला. निश्चित तौर पर यह परेशानी में डालने वाली बात थी. मैं और मेरी मां मेडिकल बिल को लेकर काफी परेशान रहे लेकिन हम भाग्यशाली रहे कि क्राउड-फंडिंग से यह भी परेशानी दूर हो सकी.
मेरे डॉक्टर अभी भी यह नहीं जानते हैं कि मुझे कैंसर क्यों हुआ. हां लेकिन जांच से वो ये जान पाये हैं कि यह आनुवांशिक नहीं है.
लेकिन अब मैं कैंसर मुक्त हो चुकी हूं और इस बात से बेहद खुश हूं. मैं एक सिविल राइट्स अटॉर्नी के तौर पर अपना करियर बनाना चाहती हूं और बाद में राजनीति में जाना चाहती हूं.
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