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बाइडन सरकार ने बताया कि उसके लिए भारत क्यों है ख़ास
अमेरिका ने कहा है कि वो एक अग्रणी विश्व शक्ति के रूप में भारत के उभरने का स्वागत करता है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ''भारत अमेरिका का हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अहम सहयोगी है. हम भारत के एक अग्रणी विश्व शक्ति के तौर पर उभरने और इस इलाक़े में सुरक्षा प्रदान करने वाले देश के तौर पर स्वागत करते हैं.''
नेड ने ये भी कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात की है. बीते 14 दिनों में दोनों मंत्रियों के बीच ये दूसरी बातचीत है.
फ़ोन पर बात करते हुए दोनों नेताओं ने अमेरिका-भारत साझेदारी की ताक़त की बात दोहराई और म्यांमार की मौजूदा परिस्थिति सहित आपसी चिंता के मुद्दों पर चर्चा की.
ब्लिंकन ने म्यांमार में हुए तख़्तापलट और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी पर चिंता व्यक्त की.
एक फ़रवरी को म्यांमार की सेना ने देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू ची समेत उनकी सरकार के बड़े नेताओं को गिरफ़्तार करके तख़्तापलट कर दिया था.
दोनों देशों के नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-अमेरिका के सहयोग की अहमियत सहित क्षेत्रीय विकास पर भी चर्चा की.
प्राइस ने बताया, ''दोनों ही देशों ने क्वार्ड और अन्य तरीक़ो से क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया. साथ ही कोविड-19 और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्धता ज़ाहिर की.''
भारत-अमेरिका साझेदारी
एक सवाल के जवाब में प्राइस ने कहा कि ''भारत-अमेरिका की वैश्विक सामरिक भागीदारी ना सिर्फ़ व्यापक है बल्कि बहुआयामी भी है. हम कई मोर्चों पर उच्च-स्तरीय सहयोग को आगे बढ़ाएँगे. हमें यक़ीन है कि हमारी साझेदारी और रिश्ते आने वाले वक़्त में और भी गहरे होंगे.''
उन्होंने कहा, ''अमेरिका और भारत रक्षा, हिंद-प्रशांत में क्षेत्रीय सहयोग, आतंकवाद, शांति, पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, अंतरिक्ष जैसे कई विस्तृत कूटनीति और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में सहयोगी हैं.''
''दोनों देश अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी साथ काम करते हैं. हम सुरक्षा परिषद में अगले दो साल के लिए भारत के शामिल होने का स्वागत करते हैं.''
नेड प्राइस ने ये भी कहा कि भारत अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी बना रहेगा. साल 2019 में दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ कर 146 बिलियन डॉलर हो चुका है.
इसके अलावा अमेरिकी कंपनियाँ भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा ज़रिया हैं.
व्यापार और राजनयिक ,संबंधों के इतर प्राइस ने भारत और अमेरिका के बीच एक दिल का रिश्ता बताया. उन्होंने कहा- ''इस देश (अमेरिका) में 40 लाख भारतीय-अमेरिकी रहते हैं, जो अब अमेरिका को अपना घर मानते हैं. वो अपने समाज और देश की गर्व से सेवा करते हैं.''
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