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कमला हैरिस के शपथ ग्रहण के साथ क्या अमेरिकी राजनीति में भारतीय और अहम हो जाएंगे?
- Author, शदाब नाज़मी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अमेरिका के उपराष्ट्रपति पद के लिए कमला हैरिस के डेमोक्रैटिक उम्मीदवार होने की घोषणा के साथ ही भारतीय-अमेरिकी समुदाय में एक नए उत्साह का संचार हुआ.
कमला हैरिस के पिता जमैका से अमेरिका आए थे. उनका नाम डोनाल्ड हैरिस था. उनकी मां श्यामलन गोपालन एक भारतीय-अमेरिकी थीं. उनका जन्म चेन्नई में हुआ था.
डोनाल्ड हैरिस 1964 में अमेरिका आए थे. इसके एक साल के बाद 1965 में अप्रवासन और राष्ट्रीयता क़ानून पारित हुआ. इस क़ानून के तहत जन्म के बजाए काम के आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान है. इसके बाद एशिया से बड़ी संख्या में लोग अमेरिका आने शुरू हो गए.
अमेरिका में भारतीय अमेरिकियों की संख्या
1957 में दलीप सिंह सौंद पहले भारतीय अमेरिकी थे जो अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए थे.
उसके बाद से पीयूष 'बॉबी' जिंदल और प्रमिला जयपाल जैसे कई लोग अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए.
भारतीय-अमेरिकी लोगों की आबादी अमेरिका की कुल आबादी का सिर्फ़ 1.5 फ़ीसद है.
अमेरिकी जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक़ साल 2000 में अमेरिका में 19,00,000 भारतीय रह रहे थे जो साल 2015 तक लगभग दोगुने होकर 39,82,000 हो चुके थे.
अमेरिका में भारतीय लोग ना सिर्फ़ एक प्रभावी अप्रवासी समूह के तौर पर हैं बल्कि दूसरे अप्रवासी समूहों की तुलना में इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी अच्छी है.
थिंक टैंक पीउ रिसर्च सेंटर के मुताबिक़ अमेरिका में रहने वाले 40 फ़ीसद भारतीयों के पास मास्टर्स की डिग्री है और भारतीयों की कुल आबादी का सिर्फ़ 7.5 फ़ीसद आबादी ग़रीबी रेखा से नीचे रह रही है जबकि अमेरिकियों की 15.7 फ़ीसद आबादी ग़रीबी रेखा से नीचे रही है.
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इतनी कम संख्या में होने के बावजूद वे अमेरिकी राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं? इसे समझने के लिए हमें यह जानने की ज़रूरत है कि भारतीय-अमेरिकी वाक़ई में कैसे वोट करते हैं.
भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का विवरण
अमेरिका में 40 लाख भारतीय-अमेरिकी आबादी रहती है. यह अमेरिका में मेक्सिको के बाद सबसे अधिक तेज़ी से बढ़ती हुई अप्रवासी आबादी है. अमेरिकी जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक़ साल 2000 और 2018 के बीच भारतीयों की आबादी में 137.2 फ़ीसद की वृद्धि हुई है.
इनमें से ज्यादातर न्यूयॉर्क, शिकागो, सैन जोस और सैन फ्रांसिस्को जैसे महानगरों में रहते हैं. सिर्फ़ न्यूयॉर्क में ही छह लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं जबकि शिकागो में दो लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं.
पीउ रिसर्च के मुताबिक़ लेकिन जब बात अमेरिका से बाहर जन्म लिए योग्य वोटरों की आती है तब भारतीय-अमेरिकियों की मेक्सिको और फ़िलीपींस के लोगों के बाद तीसरी सबसे बड़ी तदाद है.
साल 2016 में हुए एक सर्वे (एनएएएस पोस्ट-इलेक्शन) से पता चलता है कि 48 फ़ीसद भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट हैं या फिर डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर उनका रुझान है. सिर्फ़ 22 फ़ीसद भारतीय ही रिपब्लिकन हैं.
राष्ट्रपति चुनाव नज़दीक आते ही रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच भारतीय वोटरों को अपनी ओर करने को लेकर होड़ मच जाती है. पिछले कुछ दशकों में यह ट्रेंड दिखा है. आख़िर इसकी वजह क्या है?
भारतीय-अमेरिकी वोटरों की कड़े मुक़ाबले वाले राज्यों फ्लोरिडा, पेनसिल्वेनिया और मिशिगन में मज़बूत मौजूदगी है. ये राज्य चुनावों में नतीजों को पलटने की क्षमता रखते हैं.
इंडियन-अमेरिकन एट्युच्यूड सर्वे (आईएएएस) के हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक़ 70 फ़ीसद से ज्यादा अमेरिकी भारतीयों ने नवंबर में हुए चुनाव में ट्रप के मुक़ाबले जो बाइडन को तरजीह देने के संकेत दिए थे.
एच1बी वीजा - ट्रंप बनाम बाइडन
भारतीय दुनिया में सबसे ज्यादा एच1बी वीज़ा रखने वाला समुदाय हैं. इसे वैश्विक संदर्भ में देखे तो सालाना 85,000 जारी होने वाले एच1बी वीज़ा का 70 फ़ीसद वीज़ा भारतीयों के पास है.
लेकिन चुनाव के ठीक पहले ट्रंप ने भारतीयों के 'अमेरिकी सपने' को झटका दे डाला.
पिछले साल की शुरुआत में अमेरिकी नौकरियों को 'बचाने' के लिए ट्रंप ने एक आदेश पर हस्ताक्षर किए थे. यह आदेश संघीय एजेंसियों को विदेशियों को नौकरी देने पर पाबंदी लगाता है. ख़ासकर एच1बी वीज़ा पर आए लोगों को. यह आईटी में काम करने वाले उन लोगों के लिए एक झटके की तरह था जो हर साल इस वीज़ा पर अमेरिका आते हैं.
इसका असर सितंबर में हुए एएपीआई के सर्वे में दिखा जब 35 फ़ीसद एशियाई-भारतीयों ने ट्रंप को राष्ट्रपति के तौर पर देखना नापसंद किया.
अब बहुत सारे भारतीय चुनाव में विजेता रहे जो बाइडन की ओर उम्मीद से देख रहे हैं क्योंकि उन्होंने पिछले साल भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एच1बी वीज़ा को लेकर कहा था कि, "मेरा दिल आप उन सभी लोगों के साथ है जो घृणा के शिकार बने हैं. अप्रवासन को लेकर जिन्हें मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं. इसमें दशकों से जारी उस एच1बी वीज़ा को लेकर अचानक से लिया गया फ़ैसला भी शामिल हैं जिसकी वजह से अमेरिका अब तक मज़बूत बनता रहा है."
इससे पहले 84 फ़ीसद भारतीय-अमेरिकियों ने चुनाव में ओबामा को वोट किया था.
डेमोक्रैट्स अल्पसंख्यकों और अप्रवासियों के प्रति रिपब्लिकन की तुलना में ज्यादा नरम रहे हैं.
और अब कमला हैरिस के उपराष्ट्रपति बनने के साथ हम और भी कई भारतीय मूल के अमेरिकियों को अमेरीका की नई सरकार में अहम ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए देख सकते हैं.
उम्मीद है कि अमेरिका में हम आने वाले दिनों में भारतीयों का उज्ज्वल भविष्य देख पाएँगे.
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