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यूवेरी मुसेविनी 35 साल तक कैसे युगांडा की सत्ता में बने रहे
- Author, पेशेंस एटुहेर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, कंपाला
युगांडा की आबादी का एक तिहाई हिस्सा यानी 35 साल से कम उम्र के लोग सिर्फ़ एक ही राष्ट्रपति को जानते हैं.
यूवेरी मुसेविनी साल 1986 में सशस्त्र विद्रोह के बल पर सत्ता में आए. उन्होंने राजनीतिक नियमों को ताक पर रख दिया और अपने विपक्षियों को रास्ते से हटा दिया.
76 साल के यूवेरी मुसेविनी के 35 साल के शासन के दौरान आई शांति और विकास कार्यों के कारण कई लोग उनकी तारीफ़ करते हैं.
लेकिन सत्ता में बने रहने के लिए उन्होंने करिश्माई व्यक्तित्व के विचार को बढ़ावा दिया, स्वतंत्र संस्थानों से समझौता किया और विरोधियों को दरकिनार करके सफलता हासिल की.
पांच साल पहले पिछले चुनाव के दौरान जब उनसे सत्ता से हटने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैं केले के उस बगान से कैसे जा सकता हूं जिसे मैंने लगाया था और जिसमें फल आने लगे हैं?"
लेकिन इस क्रांतिकारी के लिए उन फलों की कटाई अब भी ख़त्म नहीं हुई है.
राष्ट्रपति से मेरा परिचय 1990 के दशक में एक स्कूल प्ले के दौरान हुआ था, जिसमें मिल्टन ओबोट और ईदी अमीन के सालों की अशांति दिखाया गया था.
इस प्ले का अंत 26 जनवरी 1986 पर हुआ जब यूवेरी मुसेविनी की नेशनल रेसिस्टेंस सेना ने देश को आज़ाद कराया और बेवजह के युद्ध और मौतों का दौर ख़त्म कर दिया.
उनकी उदार और शांतिप्रिय छवि के विचार के साथ युगांडा के कई लोग पले-बढ़े हैं और हर मौके पर इस छवि को याद किया जाता है.
पिता और दादा की छवि
लोगों के बीच उनकी छवि एक पिता और दादा की है. युगांडा के कई नौजवान उन्हें 'सेवो' के नाम से जानते हैं और यूवेरी मुसेविनी उन्हें बाज़ुकुलु (लुगांडा भाषा में नाति-पोते) कहकर बुलाते हैं.
लेकिन, किसी सामान्य दादा या नाना की तरह वह अपने बच्चों और नाती-पोतों से घिरे हुए घर में अपनी पसंसदीदा कुर्सी पर आराम नहीं कर रहे हैं.
अपने छठे कार्यकाल के लिए चुनाव प्रचार करते हुए वो देश भर में घूम रहे हैं, कारखाने खोल रहे हैं, नई सड़कें और बाज़ार शुरू कर रहे हैं.
इन चुनाव में उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वि 38 साल के पूर्व पॉप स्टार बोबी वाइन है. ऐसे में मुसेविनी भी अपनी ऊर्जावान और जोशिली छवि बनाना चाहते हैं.
पिछले साल अप्रैल में लॉकडाउन के दौरान कसरत को बढ़ावा देने के लिए उनका एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो कई पुशअप्स करते दिख रहे हैं और लोगों को घर पर में कसरत करने की सलाह दे रहे हैं.
युगांडा में बेरोजगारी एक बड़ी चिंता का विषय है. इस पर 25 साल की एंजेला किराबो कहती हैं, "अगर आपके पिता आपसे प्यार करते हैं तो वो आपको सशक्त करेंगे. अगले पांच सालों में 'सेवो' ये सुनिश्चित करेंगे कि जब हम अपना स्कूल पूरा करें तो हमें नौकरियां मिल सकें."
अर्थशास्त्र में ग्रेजुएट किराबो बाज़ुकुलु होने पर गर्व करती हैं. वो एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ी हैं जो नेशनल रेसिस्टेंस मूवमेंट (एनआरएम) का समर्थक रहा है. उन्हें लगता है कि यूवेरी मुसेविनी के पास 35 सालों के शासन के बाद भी बहुत कुछ देने को है.
संविधान में संशोधन
यूवेरी मुसेविनी के करीबी दोस्त और सलाहकर जॉन नगेंडा कहते हैं कि मुसेविनी की निस्वार्थता एक ऐसी वजह है जो लोगों को उनके प्रति वफादार रखती है.
एक 82 साल के शख़्स कहते हैं, "मुसेविनी यूगांडा के लिए मरने को तैयार थे. मैं कहूंगा कि हम बहुत किस्मत वाले हैं जो वो हमें मिले हैं."
"राष्ट्रपति रहे जिन दूसरे लोगों को मैं जानता हूं वो अपने लिए ऐसा करना चाहते थे, वो प्रतिष्ठा चाहते थे. लेकिन, मुसेविनी ऐसा देश के लिए करना चाहते हैं... वह एक अफ़्रीकी हैं."
1995 के संविधान के मूल खंड के तहत कोई 2005 के बाद फिर से राष्ट्रपति चुनाव में खड़ा नहीं हो सकता था.
पहले माना जाता था कि मुसेविनी सत्ता में बने रहने के ख़िलाफ़ हैं. उन्होंने कहा था कि वो अपने खेतों की ओर लौटना पसंद करेंगे.
एक समय पर मुसेविनी के करीबी रहे पत्रकार विलियम पाइक ने अपने संस्मरण में बताया है कि कैसे राष्ट्रपति उस वक़्त नाराज़ हो गए थे जब 1990 की शुरुआत में एक डिनर के दौरान उनसे पूछा गया था कि वो आजीवन सत्ता में बने रहना चाहते हैं या नहीं.
संस्मरण में लिखा है, "मुसेविनी ने कहा था, बिल्कुल नहीं. लेकिन, उन्होंने इसे असल में अपना अपमान माना था और वो इस पर नाराज़ भी हुए थे. हालांकि, उनका जवाब झूठ नहीं था. उस वक़्त वो वाकई सत्ता में बने नहीं रहना चाहते थे."
लेकिन, 2004 में उनके विचार में कुछ बदलाव हुआ था. हालांकि, ये साफ नहीं है कि वो बदलाव क्या था. उनके सांसदों ने इस विचार का समर्थन किया कि राष्ट्रपति कार्यकाल की सीमा को हटाने के लिए संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए. उन्हें 75 साल की उम्र तक चुनाव लड़ने के लिए ग्रीन सिग्नल मिल गया.
वहीं, 2017 में उन्हें राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए तय आयु सीमा की संवैधानिक बाधा को भी अपने रास्ते से हटा दिया. इस पर संसद में विवाद भी हुआ.
कई लोगों ने इसे मुसेविनी के आजीवन राष्ट्रपति बने रहने की कोशिश के तौर पर देखा.
इन संविधानिक बदलावों को इसलिए स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि संसद अपने लंबे समय तक सेवारत नेता को पुरस्कृत करना चाहती थी बल्कि इसकी वजह ये थी कि सांसद मानते थे कि उन्हें ये पद राष्ट्रपति के कारण मिला है.
सत्ता के सामने बहुत कम चुनौतियां
यूवेरी मुसेविनी के समर्थक युगांडा के परिवर्तन के लिए उन्हें अगले और पांच साल देना चाहते हैं.
सरकार की नेशनल यूथ काउंसिल का नेतृत्व करने वाले 28 साल के जैकब इयेरू कहते हैं, "अगर आप उत्तर और पूर्व से आते हैं तो आप समझ पाएंगे कि वहां शांति स्थापित करके एक बड़ी उपलब्धि पाई गई है. ये इलाक़े पिछले सालों से युद्ध की मार झेल रहे थे."
बेरोजगारी की समस्या को स्वीकार करते हुए वो कहते हैं कि एनआरएम ने "अर्थव्यवस्था को केवल क्षेत्रीय रूप से प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए रूपांतरित किया है."
लेकिन, इन बदलावों के बावजूद उन्होंने देश के कुछ महत्वपूर्ण संस्थानों की स्वतंत्रता को भी कमज़ोर किया है ताकि उनकी सत्ता को कम चुनौतियां मिल सकें.
न्यायपालिका भी इससे अछूती नहीं रही है. हाल के सालों में मुसेविनी पर अपने लिए निष्ठा रखने वाले न्यायाधीशों की नियुक्ति करने के आरोप लगे हैं.
जब न्यायाधीशों ने स्वतंत्र निर्णय लिए हैं, तो उनका अधिकारियों के साथ टकराव हुआ है.
16 दिसंबर 2005 को सुरक्षा बलों ने राजधानी कंपाला में हाई कोर्ट में छापा मारा था और विद्रोही पीपल्स रिडेम्पशन आर्मी के सदस्यों को फिर से गिरफ़्तार कर लिया था. उन्हें कुछ ही समय पहले देशद्रोह के आरोपों में बरी किया गया था.
न्यायाधीश जेम्स उगूला ने इस घटना के बारे में एक कविता 'रेप ऑफ़ द टेंपल' में लिखा था, "उन्होंने शांति के मंदिर को युद्ध के रंगमंच में बदल दिया."
जहां तक बात चुनाव के नतीजों को चुनौती देने की है तो साल 2001 के बाद से हर चुनाव के नतीजों का विवाद कोर्ट में पहुंचा है. सभी मामलों में, कोर्ट ने फ़ैसला दिया है कि सभी अनियमितताएं इतनी गंभीर नहीं हैं कि नतीजों को रद्द कर दिया जाए.
मीडिया की स्वतंत्रता पर भी ख़तरा मंडराता रहा है. ऊपरी तौर पर युगांडा में मुसेविनी के कार्यकाल में एक लाइव मीडिया इंडस्ट्री फली-फूली है जिसमें सैकड़ों निजी रेडियो स्टेशंस, टीवी चैनल, अख़बार और न्यूज़ वेबसाइट्स हैं.
कंपाला में नेशन मीडिया ग्रुप की जनरल मैनेजर डेनियल कैलीनाकी कहती हैं, "शुरुआती दिनों में सत्ता में मौजूद लोग इतने बौद्धिक थे जो अपनी निंदा और विरोधी विचारों को सहन कर सकते थे और उस पर चर्चा करने और असहमति जताने में सक्षम थे."
लेकिन, जैसे-जैसे सत्ता में मौजूद खुले विचारों के लोग कमज़ोर होते गए वैसे-वैसे मीडिया हाउस पर छापे मारे गए और पत्रकारों को हिरासत में लिया जाने लगा. मुसेविनी के इतने लंबे समय तक सत्ता में बने रहने का एक कारण ये भी है कि विरोधियों को रास्ते से हटा दिया गया.
विपक्षी समर्थकों की मौत
20 साल पहले ही यह स्पष्ट हो गया था कि यूवेरी मुसेविनी सत्ता में बने रहेंगे. तब उनके पूर्व सहयोगियों ने उनसे अलग होना शुरू कर दिया था. धीरे-धीरे वो सुरक्षा बलों का निशाना बनने लगे.
फोरम फॉर डेमोक्रेटिक चेंज के कित्ज़ा बिसेजी ने 2001 में मुसेविनी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा था. रेप और देशद्रोह समेत कई आरोपों में उन्हें हिरासत में लिया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया, लेकिन वो कभी दोषी नहीं ठहराए गए.
अब गायक बोबी वाइन मुसेविनी को चुनौती दे रहे हैं जिनका असली नाम रॉबर्ट कायजुअनली है. उन्हें भी सुरक्षा बलों के कोप का भाजन बनना पड़ा है.
उन्हें साल 2018 में अपने एक सहकर्मी के उपचुनाव के दौरान बेरहमी से गिरफ़्तार किया गया था. उसके बाद उन पर देशद्रोह के आरोप लगाए गए जो बाद में हटा लिए गए थे.
इस चुनाव में प्रचार अभियान के दौरान पुलिस ने कोरोना वायरस के नियमों को तोड़ने के लिए उन्हें और उनके समर्थकों को गिरफ़्तार किया, उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े और गोलियां चलाईं.
बोबी वाइन की गिरफ़्तारी को लेकर हुए दो दिनों के विरोध प्रदर्शनों में 54 लोग मारे गए. माना जाता है कि उनमें से कई लोगों को सुरक्षा बलों की गोलियां लगी हैं. अपनी 35 साल की सत्ता में यूवेरी मुसेविनी देश में शक्ति के केंद्र बन गए हैं और पूरा नियंत्रण उनके पास है. वो खुद को फिर से मजबूत करने में भी कामयाब हुए हैं.
लगभग 40 साल की उम्र में उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी लेकिन आज अगर कोई और उस भूमिका में आ रहा है तो वो यूवेरी मुसेविनी के गुस्से को बढ़ाने का ख़तरा भी उठा रहा है.
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