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कोरोना से बचाव के लिए दो और जीवनरक्षक दवाएं मिलीं
- Author, मिशेले रॉबर्ट्स
- पदनाम, हेल्थ एडिटर, बीबीसी न्यूज़
कोरोना संक्रमण से जकड़े मरीज़ों की जान बचाने के लिए दो और जीवन रक्षक दवाई मिल गई हैं. ये दवाई कोरोना मरीज़ों की मौत के आँकड़े में एक चौथाई कमी ला सकती हैं.
एनएचएस के इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में इन वैक्सीन का ट्रायल करने वाले शोधकर्ताओं ने बताया कि ये दवा ड्रिप के ज़रिए दी जाती है और इलाज किए जाने वाले हर 12 लोगों में से एक अतिरिक्त की जान बचाती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि इन दवाओं की सप्लाई पूरे ब्रिटेन में पहले से ही उपलब्ध है, इसलिए इनका इस्तेमाल तुरंत किया जा सकता है ताकि सैकड़ों जानें बचाई जा सकें.
ब्रिटेन के अस्पतालों में 30 हज़ार से अधिक कोरोना मरीज़ हैं. यह आँकड़ा बीते साल अप्रैल के मुक़ाबले 39 फ़ीसदी अधिक है.
ब्रिटेन सरकार दवा निर्माता कंपनी से लगातार संपर्क बनाए हुए है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सकते कि ब्रिटेन में मरीज़ों के लिए टोसीलिजुमैब और सरीलूमैब, दवाएं उपलब्ध रहें.
जानें बचाने के साथ ही यह दवा, इसके इस्तेमाल से मरीज़ जल्दी ठीक हो रहे हैं और गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों को एक हफ़्ते तक आईसीयू में रखने की ज़रूरत पड़ रही है.
प्रतिदिन के अस्पताल के खर्च से कम में दवा
दोनों दवाएं बराबर असरदार हैं. और सस्ते एस्टेरॉयड डेक्सामेथासोन के साथ और असरदार है.
हालांकि दवाएं बहुत सस्ती नहीं है. इनकी क़ीमत प्रति मरीज़ 750 पाउंड (करीब 69,784 रुपये) से 1000 पाउंड ( करीब 99,649 रुपये) के बीच आती है, जो डेक्सामेथासोन के पाँच पाउंड (करीब 500 रुपये) के कोर्स के कहीं ज़्यादा है.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन टीकों को लगवाने का फ़ायदा यह है कि ये आईसीयू में प्रति दिन के बेड के खर्च से कम में उपलब्ध हैं. आईसीयू का प्रति दिन का चार्ज़ 2000 पाउंड (क़रीब दो लाख रुपये) है.
मुख्य शोधकर्ता और इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रो. एंथनी गॉर्डोन ने कहा, ''हर 12 मरीज़ जो इन दवाओं से ठीक होंगे वो एक ज़िंदगी बचा सकेंगे. ये बड़ा प्रभावी है.''
ब्रिटेन समेत छह अलग-अलग देशों में आईसीयू के करीब 800 मरीज़ों पर रीमैप-कैप ट्रायल हुआ.
स्टैंडर्ड केयर में रखे गए क़रीब 36 फ़ीसदी कोविड मरीज़ों की मौत हो गई.
आईसीयू में भर्ती होने के 24 घंटों के भीतर ये नई दवाएं देने पर मौतों का आंकड़ा एक चौथाई गिरकर 27% हो गया.
एनएचएस के नेशनल मेडिकल डायरेक्टर प्रो. स्टीफ़न पॉविस ने कहा, ''कोरोना मरीज़ों की मौत के आँकड़े में कमी लाने के लिए अब दूसरी दवाई आ गई है ये बेहद खुसी की बात है और कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई में एक सकारात्मक क़दम है.''
सरकार ने निर्यात पर लगाई रोक
ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने कहा, ''ब्रिटेन ने वक्त-वक्त पर साबित किया है और फिर कर रहा है कि वो अपने यहां मरीज़ों के लिए सबसे आशाजनक और बेहतर इलाज देने में सबसे आगे है.
हालांकि इन दवाओं के ख़तरे भी हो सकते हैं. कोविड मरीज़ों को अधिक मात्रा में दिए जाने पर फेफड़ों और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है.
डॉक्टरों को ये दवा उन सभी कोविड मरीज़ को देने की सलाह दी जा रही है, जो डेक्सामेथासोन देने बावजूद गंभीर हालत में हों और जिन्हें काफ़ी देखभाल की ज़रूरत हो.
टोसीलिजुमैब और सरीलूमैब, इन दोनों दवाओं के निर्यात पर सरकार ने रोक लगा रखी है.
दवाओं को लेकर सामने आई ये रिसर्च अब तक रिव्यू नहीं की गई है और न ही किसी मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुई है.
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