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नेपाल में सियासी संकट के बीच ओली ने ख़ुद को कहा असली नेता
संसद भंग करने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने विरोधियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के असली नेता हैं.
दरअसल, संसद भंग होने और मध्यावधि चुनाव की घोषणा के बाद दो हिस्सों में बंटी सत्तारूढ़ एनसीपी के दोनों खेमे ख़ुद को असली पार्टी बता रहे हैं.
ओली ने कहा कि चुनाव आयोग ने भी विरोधी गुट को बता दिया है कि 'हम असली है.'
शनिवार को काठमांडू में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "जिसका घर होता है, जिसकी ज़मीन होती है, क्या वो याचिका दायर करता है कि फलां चीज़ उसकी है? हमने इस पार्टी को बनाया है. हम पार्टी को क़ानूनी तरीक़े से चला रहे हैं."
संसद भंग करने का निर्णय क्यों लिया?
ओली ने कहा कि संसद भंग करनी पड़ी क्योंकि उसे चलने नहीं दिया जा रहा था, सरकार को काम नहीं करने दिया रहा था.
उन्होंने कहा, "लोकतंत्र ख़तरे में है. संविधान ख़तरे में है. स्थिरता ख़तरे में है."
अपनी पार्टी के पुराने सहयोगियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि भारत और चीन ने 'समृद्ध नेपाल, ख़ुशहाल नेपाल' के नारे का समर्थन किया लेकिन प्रचंड, माधव कुमार नेपाल और झाला नाथ जैसे पार्टी नेताओं ने इस पर कोई चर्चा नहीं की.
उन्होंने विरोधियों को चुनौती दी कि वे सामने आकर अपनी हैसियत दिखाएं क्योंकि निर्वाचन आयोग, सुरक्षाकर्मी और जनता चुनाव में शामिल हो गए हैं.
ओली ने पूछा कि उनके पास क्या विकल्प था, अगर 63-64 फ़ीसद सांसदों के समर्थन के बावजूद उन्हें सरकार नहीं चलाने दिया जा रहा था.
उन्होंने कहा कि एक नए जनादेश की ज़रूरत है ताकि देश का वक़्त बर्बाद ना हो. उनका कहना था कि संसद को दोबारा नहीं बहाल किया जा सकता.
बादल भी गरजे
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उप-प्रधानमंत्री ईश्वर पोखरियाल ने कहा कि ये स्थिति पार्टी में पदों के बँटवारे को लेकर बनी है.
उन्होंने कहा, "ये स्थिति कुछ पार्टी नेताओं की निजी महत्वकांक्षाओं और पद प्राप्ति की मानसिकता के चलते बनी है."
गृह मंत्री राम बहादुर थापा बादल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने साहसी राजनीतिक क़दम उठाया है क्योंकि पार्टी के अंदर से ही राजनीतिक तख्तापलट की तैयारियां की जा रही थीं.
राम बहादुर थापा ने पार्टी विवाद के बाद प्रचंड का साथ छोड़ ओली के खेमे में आ गए थे.
उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को संसद भंग करनी पड़ी क्योंकि संसद को अस्थिरता का केंद्र बनाए जाने की कोशिश हो रही थी.
उन्होंने कहा, "फ़िलहाल जो हुआ, वो इसलिए क्योंकि पार्टी ने पीएम के ख़िलाफ़ लगाए आरोपों को वापस लेने से इनकार कर दिया था"
पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने ओली के काम करने के तरीक़ों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट पेश की थी.
पीएम की सिफ़ारिश के बाद राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने संसद भंग कर दी और तबसे ही पार्टी दो गुटों में बँट गई है.
प्रधानमंत्री ओली के गुट का कहना है कि वे अप्रैल में होने वाले चुनाव पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और प्रचंड-माधव कुमार नेपाल के गुट का कहना है कि वे संसद बहाल करवाने के लिए प्रदर्शन करेंगे.
प्रचंड-नेपाल की योजना
इस बीच, प्रचंड-माधव कुमार नेपाल के गुट ने 6 जनवरी ये 8 जनवरी तक दूसरे चरण का विरोध प्रदर्शन करने का एलान किया है.
बताया गया है कि सात जनवरी को काठमांडू के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर अलग-अलग ज़िलों मे रैलियां निकाली जाएंगी.
योजना के मुताबिक़ आठ दिसंबर को प्रधानमंत्री को संविधान की किताब दी जाएगी और उनसे ग़लत क़दम को सही कर देश से माफ़ी मांगने की अपील की जाएगी.
पार्टी के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा कि पहले चरण के विरोध प्रदर्शन के बाद सभी पार्टियों ने साझे संघर्ष पर बातचीत की थी लेकिन कोई फ़ैसला नहीं हो पाया.
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