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सऊदी अरब में तेल और गैस के चार नए ख़ज़ानों की हुई खोज
सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी (एसपीए) ने बताया है कि सऊदी अरब में चार नए तेल और गैस क्षेत्रों की खोज हुई है.
सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अज़ीज़ बिन सलमान ने रविवार को इसकी घोषणा की है.
उत्तर-पश्चिम धाहरन के अल-रीश तेल क्षेत्र में ग़ैर-पारंपरिक तेल की खोज हुई है.
पूर्वी प्रांत में मौजूद यह शहर देश के तेल उद्योग का एक प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है.
कितने तेल का होगा उत्पादन
अल-रीश के दो नंबर कुएं से हर रोज़ 4,452 बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और 32 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक फ़ीट प्राकृतिक गैस का उत्पादन होगा.
वहीं, 4 नंबर कुएं से 3,654 बैरल प्रतिदिन और 16 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिट फ़ीट गैस का उत्पादन होगा. 3 नबंर कुएं का शुरुआती उत्पादन 2,745 बैरल प्रतिदिन और 30 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक फ़ीट गैस प्रतिदिन होगा.
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मंत्री के मुताबिक़, अल-रीश क्षेत्र की खोज ख़ासतौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि तुवैक़ पहाड़ों से अरब एक्स्ट्रा लाइट क्रूड ऑयल निकालना संभव है.
अल-मिनहाज़ कुएं पर स्थित अल-सराह तालाब में भी ग़ैर-पारंपरिक तेल की खोज हुई है. यह दक्षिण-पश्चिम के घावर तेल क्षेत्र में है.
दूसरे प्राकृतिक संसाधन मिलने की संभावना
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि सऊदी आरामको ने अल-अजरामियाह में भी तेल की खोज की है. टेस्ट के परिणाम बताते हैं कि यहां से प्रतिदिन 3,850 बैरल का उत्पादन होगा.
यह जगह रफ़हा शहर से उत्तर-पश्चिम में सऊदी-इराक़ी सीमा पर स्थित है.
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एसपीए ने प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ के हवाले से कहा कि सऊदी आरामको नए खोजे गए क्षेत्रों के आकार और उनके आयतन पर काम कर रहा है ताकि अंदाज़ा लगाया जा सके कि वहां पर कुल कितना तेल और गैस है.
उन्होंने यह भी बताया कि सऊदी अरब को इस खोज में बड़ी मात्रा में दूसरे प्राकृतिक संसाधनों के होने का भी पता चला है.
सऊदी अरब के पास कितना तेल है और कब तक चलेगा?
पिछले पाँच दशकों से तेल विशेषज्ञों के लिए यह सवाल किसी रहस्य से कम नहीं है. तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) को सऊदी की सरकार ने जो अनुमानित भंडार की जानकारी दी है उसके मुताबिक़ प्रमाणित तेल भंडार 266 अरब बैरल्स है. ओपेक ने 2015 में अपनी वार्षिक बुलेटिन में इसकी जानकारी दी थी.
अगर ये नंबर सही है तो औसत 1.2 करोड़ बैरल प्रतिदिन उत्पादन के हिसाब से सऊदी का तेल भंडार अगले 70 सालों में ख़त्म हो जाएगा. लेकिन आधिकारिक आंकड़ों को लेकर पर्याप्त संदेह हैं. इसकी वजह यह है कि 1987 में सऊदी ने अपना तेल भंडार 170 अरब बैरल्स बताया था, जिसे 1989 में बढ़ाकर 260 अरब बैरल्स कर दिया था.
स्टटिस्टिकल रिव्यू ऑफ़ वर्ल्ड एनर्जी 2016 की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी 94 अरब बैरल्स तेल बेच चुका है या खर्च कर चुका है, फिर भी आधिकारिक रूप से उसका भंडार 260 से 265 अरब बैरल्स ही है.
अगर सरकार का डेटा सही है तो इसका मतलब यह हुआ कि सऊदी ने तेल के नए ठिकाने खोजे हैं या फिर अनुमानित भंडार को ही बढ़ा दिया है.
अनुमानित भंडार को बढ़ाने का एक आधार यह हो सकता है कि जिन ठिकानों से तेल का उत्पादन हो रहा है वहीं और तेल है या फिर अब तक जितने तेल निकाले गए हैं उसकी आपूर्ति फिर से हो गई है.
लेकिन सऊदी में 1936 से 1970 के बीच ही तेल भंडार के विशाल और बेशुमार ठिकानों की खोज की गई है. इसके बाद इसकी तुलना में सऊदी में तेल के नए ठिकानों की खोज नहीं की गई है.
समस्या यह है कि जहां-जहां तेल उत्पादन हो रहा है उसका लेखा-जोखा और अनुमानित भंडार सरकार काफ़ी गोपनीय रखती है. इसकी जानकारी भीतर के एक गिने-चुने लोगों की होती है.
ऐसे में किसी भी तथ्य की पुष्टि करना असंभव सा लगता है. तेल विश्लेषकों की विश्वसनीयता पर भी यह सवालिया निशान है कि वो इस बात को बताने की हालत में नहीं हैं कि सऊदी में तेल उत्पादन कब गिरना शुरू होगा.
सऊदी अभी सबसे ज़्यादा तेल का उत्पादन कर रहा है. इससे उस भविष्यवाणी को झटका लगा है जिसमें बताया गया था कि सऊदी का तेल उत्पादन शिखर पर जाने के बाद नीचे आ जाएगा.
अनुमानित भंडार
भविष्य में तेल उत्पादन की क्षमता को जानने के लिए अलग-अलग तरीक़े हो सकते हैं. इससे भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि तेल इंडस्ट्री में कितने लोग काम कर रहे हैं.
तेल भंडार को समझने के लिए एक ज़रिया यह भी है कि उत्पादन शुरू होने से पहले तेल का ख़ज़ाना कितना बड़ा था. उत्पादन शुरू होने से पहले तेल ख़ज़ाने का मतलब ओरिज़नल ऑइल इन प्लेस (ओओआईपी) से है.
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