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यरूशलम ईसाई, इस्लाम और यहूदी तीनों के लिए इतना अहम क्यों हैं?
यरूशलम का मुद्दा इसराइल और फ़लस्तीनी अरबों के बीच के पुराने विवाद में एक अहम मुद्दा रहा है.
बीबीसी की एरिका चेर्नोफ्स्काई ने इस मुद्दो को विस्तार से समझने की कोशिश की और जानना चाहा कि आखिर क्यों ईसाई, इस्लाम और यहूदी, तीनों धर्मों के लिए ये शहर इतना महत्वपूर्ण है.
तीनों ही धर्म अपनी शुरुआत की कहानी को बाइबल के अब्राहम से जोड़ते हैं.
यरूशलम- ईसाई, यहूदी और मुस्लिम, सभी इस शहर से प्यार करते हैं और अपने धर्म की अलग-अलग कहानियों से जोड़ते हैं, जिनके इतिहास को लेकर विवाद है.
हिब्रू में इसे यरूशलाइम कहते हैं और अरबी में अल-कुद्स. ये दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है.
यह शहर अक्सर विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच विभाजन और संघर्ष की कहानियों का केंद्र रहा है, लेकिन इसकी पवित्रता को लेकर सबकी एक ही राय है.
ये पुराना शहर संकरी गलियों और ऐतिहासिक वास्तुकला का एक संगम है, ये चार भागों में बंटा हुआ जो कि जहां ईसाई, मुस्लिम, यहूदी और आर्मीनियाई सभ्यता के अंश हैं.
दुनिया के सबसे पवित्र स्थलों में से एक ये शहर किसी किले जैसी पत्थर की दीवार से घिरा हुआ है.
हर भाग अपनी आबादी को दर्शाता है. ईसाईयों के पास दो भाग हैं क्योंकि आर्मीनियाई भी ईसाई हैं.
उनका हिस्सा, जो कि चारों में सबसे छोटा है, आर्मीनिया के सबसे पुराने सेंटर में से एक है.
सेंट जेम्स चर्च औ मोनैस्ट्री, जो कि उनके सेक्शन का एक बड़ा हिस्सा है, वहाँ इस समुदाय ने अपनी सभ्यता और संस्कृति को बचाकर रखा है.
चर्च
ईसाईयों के क्वॉटर में चर्च ऑफ द होली स्पेलकर है, जो कि ईसाईयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. ये जगह यीशू की कहानी, मृत्यु, सलीब पर चढ़ाने और पुनर्जीवन की कहानी का केंद्र है.
अधिकांश ईसाई परंपराओं के अनुसार, गोलगोथा, या कलवारी की पहाड़ी पर यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था, उनका मकबरा स्पेलकर के अंदर स्थित है और यह उनके पुनरुत्थान का स्थल भी था
चर्च को अलग-अलग ईसाई संप्रदायों के प्रतिनिधियों द्वारा संयुक्त रूप से मैनेज किया जाता है. मुख्य रूप से ग्रीक ऑर्थोडॉक्स पैट्रिआचेट, फ्रैंकिसन फ्रैगर रोमन कैथोलिक चर्च और आर्मीनियाई पैट्रिआर्क.
इसके अलावा इथियोपियाई, कॉप्टिक और सीरियाई ऑर्थोडॉक्स चर्च भी इसमें मदद करते हैं. यह दुनिया भर के लाखों ईसाइयों के लिए प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है.
मस्जिद
मुस्लिम क्वार्टर चारों में से सबसे बड़ा है. यहां पर डोम ऑफ रॉक और अल-अक्सा मस्जिद स्थित हैं. इसे मुसलमानों को हरम अल-शरीफ़ या पवित्र जगह की तरह जाना जाता है.
ये मस्जिद इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल है और वक्फ नामक एक इस्लामिक ट्रस्ट के प्रशासन के अधीन है.
मुसलमानों का मानना है कि पैगंबर मुहम्मद ने यात्रा के दौरान मक्का से यहां तक का सफ़र तय किया और सभी प्रॉफेट की आत्माओं के साथ प्रार्थना की.
कुछ ही कदम की दूरी पर, डोम ऑफ द रॉक की आधारशिला है, मुस्लिम मानते हैं कि यहीं से वो जन्नत की की ओर गए थे.
पूरे साल मुस्लिम पवित्र स्थान पर आते हैं, ख़ासतौर पर रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान हर शुक्रवार को हजारों की संख्या में मुसलमान यहां नमाज़ अदा करते हैं.
द वॉल
यहूदियों वाले हिस्से में कोटेल या वेस्टर्न वॉल है, ये दीवार पवित्र मंदिर का अवशेष है.
उस मंदिर के अंदर यहूदियों का सबसे पवित्र स्थान था.
यहूदियों का मानना है कि यही वो जगह है जहां आधारशिला रख पूरी दुनिया का निर्माण किया गया था औऱ यही पर अब्राहम ने अपने बेटे आईज़ैक की क़ुर्बानी दी थी.
यहूदी मानते हैं कि कि 'डोम ऑफ द रॉक' 'होली ऑफ होलीज़' की जगह है.
इस जगह की देखरेख रबी ऑफ़ द वेस्टर्न वॉल करती है और हर साल यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं, ख़ासतौर पर छुट्टियों के समय.
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