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पाकिस्तान का नया रेप क़ानून- बलात्कारियों के लिए कड़ी सज़ा, नपुंसक बनाने का प्रावधान
पाकिस्तान में बलात्कार के मामलों से निपटने के लिए एक नया क़ानून लाया गया है जिसका मक़सद मुक़दमे की जल्द सुनवाई और कड़ी सज़ा का प्रावधान करना है.
कड़ी सज़ा के अंतर्गत बलात्कार के लिए दोषी पाए गए व्यक्ति का केमिकल कैस्ट्रेशन यानी उसे केमिकल के इस्तेमाल से नपुंसक भी बनाया जा सकता है.
मंगलवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने इस नए रेप विरोधी क़ानून पर दस्तखत कर दिए.
इस अध्यादेश के तहत यौन अपराध में शामिल लोगों का नेशनल रजिस्टर तैयार किया जाएगा और पीड़िता की पहचान गुप्त रखने का भी फ़ैसला किया गया है. साथ ही कुछ अपराधियों को दवा देकर उन्हें नपुंसक भी किया जा सकता है.
इन मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा और ये अदालतें चार महीनों में सुनवाई पूरी कर फ़ैसला सुना सकेंगी.
लाहौर की बर्बर घटना
लाहौर शहर के बाहर एक महिला के साथ हुई गैंग रेप की घटना को लेकर देश में यौन अपराधों के ख़िलाफ़ जिस तरह का माहौल बना था, ये क़ानून उसे देखते हुए लाया गया है.
ये महिला अपने दो बच्चों के साथ लाहौर की तरफ़ आ रही थी, तभी हाईवे के किनारे उस पर हमला किया गया. घटना के वक़्त महिला के दोनों बच्चे वहीं पर मौजूद थे.
लाहौर के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी ने इस घटना के अगले दिन ये कहा कि पीड़िता भी अपने गैंग रेप के लिए एक हद तक ज़िम्मेदार है. उनकी टिप्पणी और इस बर्बर घटना ने आम पाकिस्तानियों को उद्वेलित कर दिया.
इसके बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार को कड़े कदम उठाने का वादा करना पड़ा.
क़ानून की आलोचना
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और उनकी कैबिनेट ने पिछले महीने ही इस अध्यादेश को मंज़ूरी दी थी.
मुल्क के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने मंगलवार को इस अध्यादेश पर दस्तखत कर दिए.
इमरान ख़ान की हुकूमत के पास अब 120 दिनों का वक़्त है जिसके अंदर उसे इस क़ानून को संसद के सामने रखना होगा ताकि इसे स्थाई क़ानून का दर्जा दिया जा सके. तब तक ये क़ानून लागू रहेगा.
हालांकि पाकिस्तान में ऐेसे लोग भी हैं जो इस क़ानून की आलोचना कर रहे हैं.
उनका कहना है कि सज़ा बहुत कड़ी है और सरकारी अधिकारियों ने इसे तैयार करने से पहले ज़रूरी विचार-विमर्श की प्रक्रिया का पालन नहीं किया है.
केमिकल कैस्ट्रेशन
दुनिया के कुछ देशों में केमिकल कैस्ट्रेशन यानी दवा देकर नपुंसक बनाए जाने का प्रावधान है.
यौन अपराधियों के मामलों में इसका मक़सद दवा के ज़रिये टेस्टोस्टेरोन हार्मोन कम करना होता है.
साल 2016 में इंडोनेशिया ने बच्चों के ख़िलाफ़ यौन अपराध करने वालों के लिए केमिकल कैस्ट्रेशन का प्रावधान किया था. साल 2009 में पोलैंड ने बच्चों का रेप करने वाले व्यस्कों के लिए इसे अनिवार्य रूप से लागू किया था.
हाल के सालों में पाकिस्तान में यौन हिंसा के ख़िलाफ़ लोगों की जागरूकता बढ़ी है.
साल 2015 में एक महिला का एक दूरदराज़ के गांव में रेप हुआ था जिसके वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर जारी कर दिए गए थे.
पाकिस्तान में इस तरह के कॉन्टेंट को इंटरनेट पर शेयर करने से रोकने के लिए फिलहाल कोई क़ानून नहीं है.
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