सोमालिया से अपनी सेना वापस बुलाएगा अमेरिका, ट्रंप ने दिया आदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जनवरी तक सोमालिया से अमेरिकी सेना की वापसी के आदेश दिए हैं. ये जानकारी अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई है.

सोमालिया में अमेरिका के करीब 700 सैनिक मौजूद हैं जो अल-शबाब और इस्लामिक स्टेट जैसे कथित चरमपंथी संगठनों से लड़ाई में स्थानीय सुरक्षाबलों की मदद कर रहे हैं.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक़ कुछ सैनिक पड़ोसी देशों में भेजे जाएंगे. उन्हें सीमा पार अभियान की ख़ास अनुमति दी जाएगी.

हाल के महीनों में राष्ट्रपति ट्रंप ने इराक और अफ़ग़ानिस्तान से भी अमेरिकी सैनिकों की वापसी के इसी तरह के आदेश जारी किए हैं.

डोनाल्ड ट्रंप लंबे वक्त से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने की बात करते आए हैं. वह दूसरे देशों में लंबे समय से चल रहे सैन्य अभियानों के खर्चीले और अप्रभावी होने के कारण उनकी आलोचना करते रहे हैं.

इस आदेश के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर की नीति को भी पलट दिया है. मार्क एस्पर को पिछले महीने ही पद से हटाया गया था. वो सोमालिया में अमेरिकी सेना की उपस्थिति के समर्थन में थे.

हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि अधिकतर सैनिकों और संपत्तियों को 2021 की शुरुआत तक सोमालिया से बाहर करने का आदेश अमेरिकी नीति में बदलाव का संकेत नहीं है.

रक्षा मंत्रालय ने कहा, "हम हमारे देश के लिए खतरे बनने वाले अतिवादी संगठनों को नुकसान पहुंचाना जारी रखेंगे. साथ ही अपने रणनीतिक लाभ को भी बनाए रखेंगे."

सैनिक

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अमेरिका के बाहर जाने को लेकर चेतावनी

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना की वापसी से इस अफ़ीकी देश में चरमपंथियों के हौसले एक बार फिर बढ़ सकते हैं.

पिछले महीने वरिष्ठ अमेरिकी सरकारी अधिकारियों ने सोमालिया से सेना ना हटाए जाने की सलाह दी थी. उनका कहना था कि स्थानीय सुरक्षाबल बिना अमेरिकी सहयोग के चरमपंथियों का मुक़ाबला नहीं कर पाएंगे.

सोमालिया में क़ानून निर्माताओं और अधिकारियों का भी कहना था कि सोमालिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी बहुत ख़तरनाक हो सकती है और इससे चरमपंथियों के हिम्मत और बढ़ेगी.

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़ जो भी अमेरिकी सेना सोमालिया में बचेगी वो केवल देश की राजधानी मोगादिशु में रहेगी.

सोमालिया में दशकों से राजनीतिक अस्थिरता रही है लेकन हाल के सालों में अमेरिकी सेना के साथ अफ़्रीकी संघ की शांति सेना की मदद से मोगादिशु और अन्य इलाक़ों पर फिर से नियंत्रण हो पाया है, जिन पर पहले अल-शबाब का प्रभाव था. अल शबाब अलकायदा से जुड़ा एक चरमपंथी संगठन है.

हालांकि, अमेरिका को कभी ना ख़त्म होने वाले इन युद्धों से निकालने कौ अपने 2016 के चुनावी अभियान के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने अल-शबाब के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई को बढ़ाया है, खासतौर पर हवाई हमलों के रूप में.

पिछले महीने, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में अमेरिकी सेना की संख्या घटाई जाएगी.

अधिकारियों के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद सेना को जनवरी मध्य तक 5000 से घटाकर 2500 तक कर दिया जाएगा और इराक़ में सेना की संख्या 3000 से 2500 कर दी जाएगी.

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