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चीन बढ़ते ट्रेड वॉर के बीच अपनी अर्थव्यवस्था कैसे बचाने जा रहा है
- Author, तमारा गिल
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
हाल के महीनों में दो शब्द चीन के आधिकारिक दस्तावेजों और नेताओं के बयानों में प्रमुखता से सुनाई पड़ रहा है. ये दो शब्द हैं 'डबल सर्कुलेशन.' यह एक तरह की आर्थिक रणनीति है जो एक 'संभावित बड़े बदलाव' की ओर इशारा करता है.
मई के महीने में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसका प्रस्ताव रखा था और फिर अक्टूबर के महीने में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमिटी की सलाना बैठक में इस पर बात होने की उम्मीद थी.
इस बैठक में अगले पांच सालों के लिए निर्धारित किए गए लक्ष्य को लेकर विचार-विमर्श हुआ. लेकिन इस बंद दरवाजे के पीछे होने वाली बैठक में डबल सर्कुलेशन को लेकर क्या बात हुई इसके बारे में बहुत कम पता चल पाया है.
बैठक के बाद जो बयान जारी किया गया, उसमें सिर्फ इस बात का जिक्र भर है कि यह योजना आपूर्ति संबंधी सुधारों के जरिए घरेलू मांग को बढ़ाएगा.
हालांकि अब तक जो कुछ भी छपा है और चीन पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों के विश्लेषण से पता चला है, उससे कुछ बातें सामने आई हैं.
बिलकुल नया आइडिया नहीं
कथित 'डबल सर्कुलेशन' का सिद्धांत दो चीजों पर आधारित है. पहला है आंतरिक सर्कुलेशन यानी कि आंतरिक वितरण. इसका ताल्लुक आंतरिक आर्थिक गतिविधियों से है जबकि इस सिद्धांत का दूसरा पहलू बाहरी आर्थिक गतिविधियों यानी दूसरे देशों के साथ होने वाले व्यापार संबंध से जुड़ा हुआ है.
चीन का सरकारी चैनल सीजीटीएन ने लिखा है, "चीन के इस कदम से ऐसा लगता है कि चीन अपनी अर्थव्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की भूमिका को कम करना चाहता है और घरेलू बाज़ार पर आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना चाहता है."
इस योजना के तहत राष्ट्रीय बाज़ार पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही जा रही है ताकि निर्यात पर आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भरता कम की जा सके. हालांकि इसे पूरी तरह से छोड़ने की भी बात नहीं की गई है.
शी जिनपिंग ने पार्टी की केंद्रीय कमिटी की बैठक में 14वीं पंचवर्षीय योजना के तहत "धीरे-धीरे विकास के नए मॉडल को खड़ा करने की बात कही है जिसमें घरेलू स्तर पर होने वाला वितरण निर्णायक भूमिका अदा करेगा."
हालांकि 'चाइनाज रेगुलेटरी स्टेट: ए न्यू स्ट्रैटजी फॉर ग्लोबलाइजेशन' के लेखक रोजलिन सू का कहना है, "यह बिलकुल भी कोई नई रणनीति नहीं है. वैश्विक रणनीति में चीन जिस तरह के कदम उठाता रहा है, यह उन्हीं विचारों और कार्यक्रमों पर आधारित है."
वैश्विक अर्थव्यवस्था
चीन की मौजूदा आर्थिक रणनीति चीनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव से बचाना है.
अमेरिका के साथ सालों से चल रहे ट्रेड वार की वजह से चीन पर काफी अंतरराष्ट्रीय दबाव है. इसके अलावा दुनिया भर में आर्थिक संरक्षणवाद की बढ़ती नीति और महामारी ने भी अर्थव्यवस्था को लेकर आशंकाओं को बढ़ाया है.
डबल सर्कुलेशन की मौजूदा रणनीति पर चीन का जोर वैश्विक पैमाने पर आपूर्ति चेन में होने वाली कुछ नई प्रवृत्तियों पर भी आधारित है. इसमें से एक ग्लोबल सप्लाई चेन का घरेलू सप्लाई चेन से जुड़ना भी है. कुछ मामलों में यह फायदेमंद भी हो सकता है.
शी जिनपिंग ने पिछले अगस्त के महीने में चेतावनी देते हुए कहा था, "आने वाले वक्त में हम अंतरारष्ट्रीय स्तर पर कई सारी विषम परिस्थितियों का सामना करने वाले हैं. हमें नई चुनौतियों और जोखिमों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए."
उन्होंने आगे कहा, "आज दुनिया जिन बड़े बदलावों से गुजर रही है, वैसा पिछले एक सदी में भी नहीं हुआ है."
टर्निंग प्वॉइंट
बीबीसी मॉनिटरिंग के ईस्ट एशिया विशेषज्ञ प्रतीक जाखड़ कहते हैं कि 'आर्थिक स्वावलंबन' का सिद्धांत माओ के समय से सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के विचारधारा का हिस्सा रहा है. खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ प्रतिकूल हो जाए.
शी जिनपिंग ने जुलाई के महीने में कहा था, "हम जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनमें से कई लंबे वक्त तक चलने वाली हैं और कई बहुत लंबे वक्त नहीं चलने वाली. हमें एक लंबी लड़ाई के लिए खुद को मानसिक तौर पर तैयार रखना चाहिए."
उन्होंने ऐसा कहते हुए माओ के लिखे 1938 के लेख का भी जिक्र किया. जब जापान ने चीन पर अधिपत्य जमाया हुआ था.
इसके अलावा ख्वावे जैसी कंपनियों को चीन और अमेरिका के बीच शुरू हुए ट्रेड वार की वजह से जिस तरह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा है, वो चीनी अधिकारियों के लिए एक टर्निंग प्वॉइंट की तरह है.
चीनी अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ और रिसर्च कंपनी 'चाइना बेश बुक' के सीईओ लेलांड मिलर ने वाशिंगटन में सेंटर फॉर स्ट्रैटजी एंड इंटरनेशनल स्टडीज की ओर से आयोजित चर्चा में कहा, "उन्होंने वाकई में चीन के नेतृत्व की आंखे खोल दी. अगर वो आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कुछ निश्चित बदलाव नहीं लाते हैं तो वाकई में ये नुकसान पहुँचाने वाला हो सकता है. वो इस दिशा में नीतिगत बदलाव लाकर अमेरिका से वीटो पावर वाली स्थिति छीन सकते हैं."
'डबल सर्कुलेशन' योजना
माना जा रहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के एक करीबी सलाहकार ली ही 'डबल सर्कुलेशन' योजना के मुख्य रणनीतिकार है और उनका अमेरिका के साथ समझौते करने का जो अनुभव है वो इस आर्थिक नीति में किसी ना किसी तरह से प्रतिबिंबित होने वाला है.
हालांकि चीनी सरकार और मीडिया ने इस बात पर जोर दिया है कि चीन दुनिया से अपना मुंह नहीं मोड़ने जा रहा है और वो दुनिया के साथ अपना मजबूत संबंध बना कर चलेगा. ये उसे विकास दर के दहाई अंक में पहुँचने में मदद करेगा.
हालांकि किसी ठोस रणनीति के अभाव में आय की असमानता और उच्च बचत दर के बीच चीनी अर्थव्यवस्था को डबल सर्कुलेशन के रास्ते पर ले जाना चुनौतीपूर्ण होगा.
चीन की जीडीपी में घरेलू उपभोक्ता दर का योगदान काफी कम बना हुआ है. चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2019 में यह 2007 की तुलना में सिर्फ़ दो फ़ीसद तक ही बढ़ पाया है.
चीनी अर्थव्यवस्था के प्रमुख विश्लेषक और प्रतिष्ठित पेकिंग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल पेटीस ने फाइनेंसियल टाइम्स के एक लेख में लिखा है कि इस रणनीति को लेकर सबसे बड़ी समस्या अर्थव्यवस्था में होने वाले "बदलाव" को लेकर है.
आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा
पहली बात चीन में घरेलू उपभक्ता दर बहुत कम है जिसकी वजह से जीडीपी में इसका योगदान किसी भी दूसरे देश से ऐतिहासिक रूप से कम है. इसे बदलने के लिए जरूरी है कि लोगों के हाथ में पैसा आए और उनकी आमदनी बढ़े जो कि अभी "आसान नहीं लग रहा."
दूसरी समस्या चीन के निर्यात संबंधी प्रतिस्पर्धता को लेकर है. यह मूल तौर पर "कामगारों को मिलने वाली आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा पर निर्भर है. वो जो निर्यात के लिए उत्पाद पैदा करते हैं, उसका बहुत कम हिस्सा उन्हें मिलता है. घरेलू स्तर पर उपभोक्ता दर को बढ़ाने के लिए इसमें उनकी हिस्सेदारी बढ़ाए जाने की जरूरत है."
"डबल सर्कुलेशन के तहत जिस आंतरिक वितरण को बढ़ाने की जरूरत है वो अंतरराष्ट्रीय निर्यात की कीमत पर ही संभंव हो सकता है और ऐसा होता है तो पैसा और ताकत दोनों चीनी उच्च तबके से आम लोगों के पास पहुँच जाएगा."
पेटीस का मानना है कि यह सरकार और समाज दोनों के लिए तब फायदेमंद हो सकता है जब यह 'स्थानीय उच्च तबके' की कीमत पर हो. "इससे दूसरी समस्याएँ पैदा होंगी. लेकिन मैं यह कहना चाहता हूँ कि यह 2012 से चल रहा है."
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