सेना का कोई दबाव नहीं, ख़ुद लेता हूँ विदेश नीति से जुड़े फ़ैसले: इमरान ख़ान-पाकिस्तान से उर्दू प्रेस रिव्यू

    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते इमरान ख़ान का एक निजी टीवी चैनल को दिया गया इंटरव्यू, विपक्षी महागठबंधन से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में थीं.

सबसे पहले बात इमरान ख़ान के इंटरव्यू की.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि उन पर सेना का कोई दबाव नहीं है और पाकिस्तान की विदेश नीति क्या होगी इसका फ़ैसला वो ख़ुद करते हैं.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार एक्सप्रेस न्यूज़ के एक प्रोग्राम 'टू द पॉइंट' में शामिल होकर इमरान ख़ान ने कहा कि उनपर सेना का किसी तरह का कोई दबाव नहीं है और सेना ने कभी उनको किसी काम को करने से नहीं रोका.

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार उसी पर अमल कर रही है, जो उनकी पार्टी के मैनिफ़ेस्टो में था. इमरान ख़ान ने कहा कि सेना के किसी पूर्व अधिकारी को कोई पद देने का ये मतलब कतई नहीं है कि सेना के दबाव में ऐसा किया गया है.

चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर की ज़िम्मेदारी सेना के अधिकारी जनरल आसिम बाजवा को दिए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि उनको ये पद इसलिए दिया गया था क्योंकि जनरल आसिम दक्षिणी कमांड के कमांडर रह चुके हैं और सुरक्षा मामलों के जानकार रहे हैं.

इमरान ख़ान का कहना था कि उन्हें लगा कि जनरल बाजवा इस काम के लिए बहुत उपयुक्त व्यक्ति होंगे, इसके लिए उन पर किसी की तरफ़ से कोई दबाव नहीं था.

विपक्षी नेताओं पर चलने वाले मुक़दमों के बारे में उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधी संस्था नेशनल एकाउंटिबलिटी ब्यूरो (नैब) उनके मातहत काम नहीं करती है.

ख़ुद को 'सेलेक्टेड' प्रधानमंत्री कहे जाने पर इमरान ख़ान का कहना था, "मुझको सेलेक्टेड कहने वाले नेता ख़ुद सेलेक्टेड हैं. नवाज़ शरीफ़ और आसिफ़ अली ज़रदारी दोनों सेलेक्टेड थे. 2018 के चुनाव 2013 के चुनाव की तुलना में ज़्यादा साफ़-सुथरे थे."

पाकिस्तान की विदेश नीति के बारे में इमरान ख़ान ने कहा, ''सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से रिश्ते बिल्कुल ठीक हैं, कोई मसला नहीं है. तुर्की से भी बहुत अच्छे संबंध हैं और चीन से तो वो संबंध हैं जो आज से पहले कभी नहीं थे.''

उन्होंने कहा, ''अफ़ग़ानिस्तान से भी ऐसे रिश्ते हैं जो पहले कभी नहीं थे. अमेरिका आज 'डू मोर' (Do More) कहने के बजाए अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में मदद करने के लिए पाकिस्तान की तारीफ़ करता है.''

भारत प्रशासित कश्मीर का ज़िक्र करते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि नवाज़ शरीफ़ ने कभी भी नरेंद्र मोदी से कश्मीर के बारे में बात नहीं की लेकिन उन्होंने कश्मीर के मुद्दे को हर अंतरराष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म पर उठाया है.

इमरान ख़ान और विपक्ष एक दफ़ा फिर आमने-सामने

विपक्षी महागठबंधन जिसे पाकिस्तान में 'डेमोक्रैटिक मूवमेंट' कहा जाता है, ने 30 नवंबर को मुल्तान में रैली करने का फ़ैसला किया है. लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण सरकार ने रैली की इजाज़त नहीं दी है.

विपक्षी महागठबंधन इस बात पर अड़ा हुआ है कि रैली हर हाल में की जाएगी.

उसी दिन पाकिस्तान पीपल्स पार्टी का स्थापना दिवस भी है और पीपीपी ने उसी दिन दूसरे विपक्षी दलों के साथ मिलकर पार्टी का 53वां स्थापना दिवस मनाने का फ़ैसला किया है.

पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने ट्वीट कर कहा, "जो करना है, कर लें. 30 नवंबर को पीडीएम के नेताओं के साथ अपना स्थापना दिवस मनाने से पीपीपी को कोई नहीं रोक सकता है."

बिलावल ने इमरान ख़ान की सरकार पर हमला करते हुए कहा कि फ़ासीवादी सरकार मुल्तान में उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर रही है. उन्होंने इमरान ख़ान की सरकार को कठपुतली क़रार देते हुए कहा कि सरकार उनके बहादुर कार्यकर्ताओं से डर गई है.

पीडीएम ने सरकार के ख़िलाफ़ अब तक गुजरानवाला, कराची, क्वेटा और पेशावर में बड़ी रैलियां की हैं जिनमें हज़ारों लोग शरीक़ हुए थे.

एक और भुट्टो के सियासी सफ़र की शुरुआत

मुल्तान की रैली की एक और ख़ासियत है. इसमें पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और पूर्व राष्ट्रपति आसिल अली ज़रदारी की सबसे छोटी बेटी और बिलावल भुट्टो की बहन आसिफ़ा भुट्टो ज़रदारी मुल्तान की रैली से अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुआत करेंगी.

बिलावल भुट्टो ने ट्वीट करके ख़ुद इसकी जानकारी दी. बिलावल भुट्टो कोरोना संक्रमित हो गए हैं, इसलिए वो मुल्तान रैली को वीडियो के ज़रिए संबोधित करेंगे लेकिन उनकी बहन आसिफ़ा मुल्तान रैली में शामिल होकर उनका प्रतिनिधित्व करेंगी.

इसको लेकर अख़बारों में काफ़ी चर्चा हो रही है.

अख़बार नवा-ए-वक़्त में संपादकीय पेज पर मोहम्मद अकरम चौधरी ने 'ख़ुश आमदेद आसिफ़ा भुट्टे ज़रदारी' (Most Welcome Aseefa Bhutto Zardari) के शीर्षक से एक कॉलम लिखा है.

अकरम चौधरी लिखते हैं कि अगर पंजाब में पीपीपी को कोई दोबारा ज़िंदा कर सकता है तो वो आसिफ़ा भुट्टो ज़रदारी होंगी.

पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत पंजाब के विधानसभा में अगर पीपीपी दोबारन नज़र आना चाहती है तो यह ख़ूबी सिर्फ़ और सिर्फ़ आसिफ़ा में है. बेनज़ीर भुट्टो के बाद बिलावल भुट्टो ने पंजाब में कोई ध्यान नहीं दिया जिसके कारण सबसे बड़े प्रांत में पीपीपी लगभग पूरी तरह ख़त्म हो गई है.

लेख में कहा गया है कि अब अगर आसिफ़ा भुट्टो पंजाब में अच्छी शुरुआत करती हैं तो यह नवाज़ शरीफ़ और इमरान ख़ान दोनों के लिए ख़तरे की घंटी हो सकती है.

शाह महमदू क़ुरैशी की सऊदी विदेश मंत्री से मुलाक़ात

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इस्लामी देशों के संगठन ओआईसी के विदेश मंत्रियों की काउंसिल की नाइजर में हुई बैठक के साइडलाइन्स पर सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रमान अल-सऊद से मुलाक़ात की.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार इस मौक़े पर सऊदी विदेश मंत्री ने इस बात पर बहुत ज़ोर दिया कि सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ अपने भाई जैसे और सामरिक संबंधों को बड़ी अहमियत देता है.

ओआईसी की बैठक को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि प्रताड़ित कश्मीरी मदद के लिए ओआईसी और इस्लामी दुनिया की तरफ़ देख रहे हैं. ओआईसी कश्मीर घाटी में भारत की तरफ़ से हो रहे कथित ज़ुल्म को रुकवाए.

क़ुरैशी ने कहा कि मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता पाकिस्तान की प्राथमिकता है लेकिन पाकिस्तान हमेशा एक स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र का समर्थन करता रहेगा.

शरीफ़ भाइयों की मां का निधन

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और पाकिस्तानी संसद में नेता प्रतिपक्ष शहबाज़ शरीफ़ की मां बेगम शमीम अख़्तर का शनिवार (28 नवंबर) को अंतिम संस्कार किया गया.

बेग़म शमीम अख़्तर का लंबी बीमारी के बाद 95 साल की उम्र में 22 नवंबर को लंदन में निधन हो गया था. वो अपने बेटे नवाज़ शरीफ़ के पास थीं जो ख़ुद बीमारी के इलाज के लिए इन दिनों लंदन में रह रहे हैं.

नवाज़ शरीफ़ बीमारी के कारण अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पाकिस्तान नहीं आ सके.

शहबाज़ शरीफ़ और उनके बेटे हमज़ा शहबाज़ भ्रष्टाचार के मामले में इन दिनों जेल में हैं लेकिन मां और दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उन दोनों को पाँच दिनों का परोल दिया गया है.

कोरोना प्रोटोकॉल के कारण अंतिम संस्कार में केवल परिवार के लोग ही शामिल हो सके.

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