भारत आएंगे अमरीकी विदेश और रक्षा मंत्री, चीन पर हो सकती है बात

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ और रक्षा सचिव मार्क एस्पर

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अमरीका में चुनाव से ठीक एक सप्ताह पहले, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप के दो शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोगी चीन की बढ़ती वैश्विक ताकत समेत दूसरे मुद्दों पर बातचीत के लिए भारत का दौरा करेंगे.

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर मंगलवार को रणनीतिक और सुरक्षा वार्ता के लिए अपने भारतीय समकक्षों से मिलेंगे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक माना जा रहा है कि चुनाव की गहमा-गहमी के बीच अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप की कोशिश होगी कि अपने चीन विरोधी अभियान के संदेश को एक बार फिर सामने रखा जाए.

अमरीकी रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री 27 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ तीसरे भारत-अमेरिका 2 + 2 मंत्रीस्तरीय संवाद में भाग लेंगे और अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ वो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे.

वीडियो कैप्शन, Cover Story: अमरीका राष्ट्रपति चुनाव: ट्रंप VS बाइडन, कौन किस पर भारी?

अमरीकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ भारत और अमरीका के बीच आगामी 2 + 2 मंत्रीस्तरीय संवाद चार विषयों पर केंद्रित होगा -क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, रक्षा सूचना साझाकरण, सैन्य सैन्य संपर्क और रक्षा व्यापार.

शुक्रवार को अमरीकी विदेश मंत्रालय ने मीडिया से बात करते हुए ये जानकारी दी.

मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग से हमारा मतलब है कि हम क्षेत्र के देशों के साथ सुरक्षा, सहयोग और निर्माण क्षमता के समन्वय से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं."

अमरीकी पक्ष ने पहले ही कहा था कि लद्दाख में भारत-चीन सीमा गतिरोध को 2 + 2 वार्ता में आँकने की उम्मीद है.

इस महीने की शुरुआत में टोक्यो पॉम्पियो ने भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के अपने समकक्षों के साथ क्वाड की बैठक में हिस्सा लिया था.

क्वाड को चीन के प्रति प्रतिकार के रूप में देखा जाता है. आलोचकों का कहना है कि ये समूह इस पूरे क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत को मज़बूत कर रहा है.

पॉम्पियो

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क्वाड मीटिंग में क्या हुआ था?

इस बैठक में माइक पोम्पियो ने कहा था, ''क्वाड में सहयोगी होने के नाते ये अब और भी ज़्यादा ज़रूरी हो गया है कि हम मिलकर अपने लोगों और सहयोगियों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के शोषण, भ्रष्टाचार और दादागिरी से बचाएँ. हमने ये दक्षिण में, पूर्वी चीन सागर, मेकांग, हिमालय, ताइवान जलडमरूमध्य में देखा है. ये तो कुछ उदाहरण भर हैं."

क्वाड बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि समूह के सभी सदस्य 'नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिसमें क़ानून के शासन, पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय समुद्रों में नौवहन की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के प्रति सम्मान और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान शामिल हो.'

भारत ने एक बार भी चीन का नाम नहीं लिया था. हालाँकि बैठक ख़त्म होने के कुछ घंटों के अंदर ही चीनी विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी.

चीन ने एक बयान में कहा था, ''तीसरे पक्षों पर निशाना साधने और उनके हितों को कम आँकने के बजाय, क्षेत्रीय देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास बनाने के लिए सहयोग होना चाहिए.''

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