नरेंद्र मोदी की भाषा बोल रहे हैं नवाज़ शरीफ़: इमरान ख़ान- पाकिस्तान से उर्दू प्रेस रिव्यू

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते नवाज़ शरीफ़ पर इमरान ख़ान का हमला, अफ़ग़ानिस्तान के प्रमुख वार्ताकार अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह का पाकिस्तान दौरा, और कोरोना से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ पर हमला जारी है.
अख़बार जंग के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा है कि नवाज़ शरीफ़ और भारत मिलकर पाकिस्तानी संस्थाओं को कमज़ोर करना चाहते हैं. इमरान ख़ान ने कहा कि नवाज़ शरीफ़ नरेंद्र मोदी की बोली बोल रहे हैं जिससे उनका भारत से रिश्ता बेनक़ाब हो गया है.
शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने ये बातें कहीं.पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियों ने मिलकर इमरान ख़ान की सरकार के ख़िलाफ़ एक आंदोलन शुरू कर दिया है.
विपक्षी गठबंधन में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और मुस्लिम लीग (नून) के अलावा फ़ज़लुर्रहमान की जमीयत-उल-उलेमाइस्लाम भी शामिल है. विपक्षी पार्टियों ने एक साथ मिलकर 20 सितंबर को राजधानी इस्लामाबाद में एक रैली की थी जिसको लंदन से नवाज़ शरीफ़ ने संबोधित भी किया था.
इसी रैली के बाद विपक्षी पार्टियों ने मिलकर पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) का गठन किया. यह पार्टियां भी पहले एक दूसरे की विरोधी रही हैं लेकिन फ़िलहाल यह सब इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ लामबंद हो गईं हैं.
अब इमरान ख़ान इसी गठबंधन पर हमले कर रहे हैं और ख़ासकर नवाज़ शरीफ़ को निशाना बना रहे हैं. नवाज़ शरीफ़ ने अपने भाषण में पाकिस्तानी सेना की कड़ी आलोचना की थी.

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इमरान ख़ान ने नवाज़ शरीफ़ के भाषण के बाद कहा था कि नवाज़ शरीफ़ की सेना के ख़िलाफ़ भाषण की ख़ुशियां भारत में मनाई गईं थीं. उसके बाद से ही इमरान लगातार नवाज़ शरीफ़ पर भारत समर्थित होने के आरोप लगा रहे हैं.
इमरान ख़ान ने कहा कि पूरी क़ौम एक साथ मिलकर भारतीय साज़िश को नाकाम बनाएगी. इमरान ने नवाज़ शरीफ़ की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि जो सेना का दुश्मन है, वो पाकिस्तान का दुश्मन है.
उन्होंने विपक्षी एकता को ख़ारिज करते हुए कहा कि विपक्ष से उन्हें कोई ख़तरा नहीं है. उन्होंने नवाज़ शरीफ़ पर हमला करते हुए कहा, "यह कैसा इंक़लाब है कि मियां साहब (नवाज़ शरीफ़) अपने बच्चों को लंदन में बिठा कर, अवाम को सड़कों पर लाना चाहते हैं."
नवाज़ शरीफ़ अपने इलाज के लिए पिछले कई महीनों से लंदन में रह रहे हैं. हालांकि भ्रष्टाचार के मामले में अदालत ने उनके ख़िलाफ़ वारंट जारी किया है और सरकार को कहा कि नवाज़ शरीफ़ को पाकिस्तान वापस लाने के लिए ज़रूरी क़दम उठाएं.
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ग़ुलाम सरवर ख़ान ने कहा कि नवाज़ शरीफ़ एक सज़ा याफ़्ता मुजरिम हैं लेकिन इलाज के लिए मानवीय आधार पर अदालत ने उन्हें बाहर जाने की इजाज़त दी थी. उन्होंने कहा कि सरकार उनको वापस लाने की भरपूर कोशिश कर रही है.

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अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह का पाकिस्तान दौरा
अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में अफ़ग़ानिस्तान सरकार के प्रमुख वार्ताकार अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह इस हफ़्ते पाकिस्तान के दौरे पर थे. इस दौरान पाकिस्तान ने उनका शानदार स्वागत किया और उन्होंने प्रधानमंत्री इमरान ख़ान समेत सभी महत्वपूर्ण लोगों से मुलाक़ात की.
उनके पाकिस्तान दौरे पर अख़बार जंग के संपादकीय पेज पर वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सलीम साफ़ी ने एक लंबा लेख लिखा है.
उनके अनुसार 9/11 हमलों के बाद पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के रिश्तों में बिगाड़ की वजह अमरीका ही था. पाकिस्तान की हालत ये थी कि वो अमरीका को ना करने के बजाए अफ़ग़ानिस्तान को जवाब देता रहा. दूसरी तरफ़ अफ़ग़ानिस्तान भी अमरीका को ना करने की हैसियत में नहीं था, इसलिए वो भी पूरा मलबा पाकिस्तान पर गिराती रही.
लगभग 20 साल तक अफ़ग़ानिस्तान को युद्ध की आग में झोंकने और अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान को आपस में लड़वाने के बाद अब अमरीका ने तालिबान से समझौता कर लिया है.
अमरीका से समझौते के बाद तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान सरकार पर हमले बंद करने के बजाए और तेज़ कर दिए और ऐसी आशंका जताई जाने लगी कि तालिबान कहीं एक बार फिर काबुल पर क़ब्ज़ा ना कर लें.
अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह को मालूम है कि तालिबान पर अगर किसी एक सरकार का प्रभाव है तो वो पाकिस्तान की सरकार है. लेखक के अनुसार अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह के पाकिस्तान दौरे को इसी संदर्भ में समझने की ज़रूरत है.
दूसरी तरफ़ पाकिस्तान को भी इस बात का डर है कि अगर अफ़ग़ानिस्तान के सभी गुटों में समझौता नहीं हो सका तो अफ़ग़ानिस्तान में एक बार फिर गृह युद्ध छिड़ने का ख़तरा है.
अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह छह अक्टूबर को भारत आ रहे हैं. यह समझने की ज़रूरत है कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में संबंध ख़राब होने की एक बड़ी वजह यह थी कि तालिबान के सत्ता से हटने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में भारत का दख़ल बहुत बढ़ गया था जिसे पाकिस्तान अपने हितों के ख़िलाफ़ समझता था.
पाकिस्तान का एक आरोप यह भी रहा है कि भारत अफ़ग़ानिस्तान में अपनी मौजूदगी से पाकिस्तान विरोधी गुटों की मदद करता रहा है. ऐसे में पाकिस्तान के बाद अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह की भारत यात्रा बहुत अहम हो जाती है.

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कोरोना वायरस संक्रमण
वैसे तो पाकिस्तान में कोरोना महामारी बहुत हद तक क़ाबू में है और पड़ोसी भारत या पश्चिम के कई देशों की तुलना में वहाँ के हालात बहुत बेहतर हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों में वहाँ भी कोरोना के मामलों में कुछ बढ़ोत्तरी देखी जा रही है.
अख़बार जंग के अनुसार पिछले 24 घंटों में 625 नए मामले आए हैं और 15 लोगों की मौत हुई है. कोरोना पर नज़र रखने के लिए बनाए गए संगठन नेशनल कमांड एंड ऑपरेशन सेंटर (एनसीओसी) ने इस पर चिंता जताई है.
अख़बार के अनुसार कोरोना से अब तक पाकिस्तान में 6499 लोग मारे गए हैं और तीन लाख 13 हज़ार 431 लोग संक्रमित हुए हैं. दो लाख 98 हज़ार लोग ठीक हो चुके हैं और फ़िलहाल 8,877 लोग संक्रमित हैं.
इस वक़्त पूरे पाकिस्तान में 95 कोरोना मरीज़ वेंटिलेटर पर हैं जबकि देश भर में 1912 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं. पाकिस्तान में कोरोना के ज़्यादातर नए मामले शादी घर और रेस्तरां से आ रहे हैं.
एनसीओसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन जगहों पर सरकारी दिशा निर्देश का सख़्ती से पालन किया जाए. कोरोना गाइडलाइन्स का उल्लंघन करने के जुर्म में 174 गाड़ियों के ख़िलाफ़ चालान काटा गया है और अब तक 74 गाड़ियों को ज़ब्त किया जा चुका है.
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