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कोरोना से दोगुनी हो सकती है ग़रीब भारतीय अमरीकियों की संख्या: अध्ययन
- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन (अमरीका) से
नवंबर में होने वाले अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव से पहले एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि 'कोविड-19 संकट की वजह से ग़रीबी में रहने वाले भारतीय मूल के अमरीकियों का प्रतिशत बढ़ सकता है.'
अनुमानित तौर पर क़रीब 42 लाख भारतीय मूल के अमरीकियों में से 6.5 प्रतिशत ग़रीबी में रहते हैं. लेकिन कोविड-19 संकट की वजह से साल 2020 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 10.1 प्रतिशत तक पहुँच सकती है. 'द इनविज़िबल इंडियन' नामक रिपोर्ट में इसका ज़िक्र किया गया है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय मूल के अमरीकी, अमरीका में सबसे अधिक संपन्न समुदायों में से एक हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इनकी औसत आय एक लाख बीस हज़ार अमरीकी डॉलर है, यानी क़रीब 88 लाख रुपए, जो औसत अमरीकी घरों से लगभग दोगुनी है.
कोरोना महामारी से अब तक अमरीका में दो लाख सात हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. साथ ही कोरोना संक्रमण के लगभग 73 लाख मामलों की पुष्टि हुई है.
अमरीका में ज़्यादा ग़रीब भारतीय कौन?
अमरीकी अर्थव्यवस्था को इस महामारी ने काफ़ी प्रभावित किया है और लाखों लोग इस दौरान अपनी नौकरियाँ गँवा चुके हैं.
इस ताज़ा रिपोर्ट को पेश करते हुए अध्ययनकर्ता प्रोफ़ेसर देवेश कपूर ने कहा, "अमरीका में आय का एक मानदंड है, जो गृहस्थी के आकार को आधार मानता है. अगर आप उस आय मानदंड से नीचे होते हैं, तो आपको ग़रीब के रूप में वर्गीकृत किया जाता है."
प्रोफ़ेसर कपूर जॉन्स हॉप्किंस स्कूल ऑफ़ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज़ में साउथ एशियन स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर हैं.
उन्होंने ही ये रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग़रीबी में रहने वाले अन्य अमरीकियों की तुलना में, जो ग़रीब भारतीय मूल के अमरीकी हैं, उनमें अधिकांश पुरुष हैं, देखा गया है कि उनके पास अमरीकी नागरिकता नहीं होती और इनमें अधिकांश बांग्ला या पंजाबी बोलते हैं.
यूँ तो अमरीका में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के बीच ग़रीबी की दर अधिक है, लेकिन भारतीय मूल के अमरीकियों में मामला इससे उलट है. यानी अमरीका में भारतीय मूल की जो गृहस्थियाँ पुरुष-प्रधान हैं, उनमें ग़रीबी का अनुपात ज़्यादा है.
पढ़िए, अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव पर बीबीसी की ख़ास रिपोर्टें:
अमरीका में भारतीयों की चुनौतियाँ
प्रोफ़ेसर कपूर ने कहा, "हम यक़ीन से नहीं कह सकते कि ऐसा क्यों है, लेकिन इसकी एक वजह ये हो सकती है कि पुरुष-प्रधान परिवार ग़रीबी को कलंक की तरह देखते हैं और वे मदद नहीं माँगते."
बहरहाल, ग़रीब भारतीय अमरीकी परिवार कई मुश्किलों से घिरे होते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये परिवार अक्सर किराए के मकान में रहते हैं जिसका सीधा मतलब है कि अगर उनकी आय में अचानक कोई झटका लगा तो वो मकान का किराया देने में असमर्थ हो सकते हैं और उन्हें बेघर होना पड़ सकता है.
कम आय का मतलब यह भी है कि बुनियादी खाद्य ज़रूरतों को वो केवल फ़ूड स्टांप के ज़रिये ही पूरा कर सकते हैं, जो एक अमरीकी व्यवस्था है. बहुत बार इन परिवारों के पास हेल्थ इंश्योरेंस लेने का पैसा नहीं होता, जिसका मतलब है कि किसी गंभीर बीमारी के समय ये लोग परेशानी में होते हैं. और अगर किसी वजह से विकलांगता हो जाए, तो रोज़गार के अवसर कम हो जाते हैं, साथ ही स्वास्थ्य देखभाल का ख़र्च भी बढ़ता है.
जो लोग अमरीका में अवैध रूप से रहने वाले हैं, उन्हें भी कई कष्ट सहने पड़ते हैं.
प्रोफ़ेसर कपूर कहते हैं, "अमरीका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या वास्तव में पिछले एक दशक में काफ़ी तेज़ी से बढ़ी है."
उनके अनुसार, मौजूदा समय में अमरीका में कम से कम पाँच लाख अनाधिकृत भारतीय हैं. हालांकि, वे कहते हैं कि यह आँकड़ा स्रोत के आधार पर थोड़ा कम या ज़्यादा हो सकता है.
यहाँ 'अनाधिकृत भारतीयों' से प्रोफ़ेसर कपूर का मतलब, उन लोगों से है जिनके पास अमरीका में रहने की क़ानूनी अनुमति नहीं है.
कहाँ हैं सबसे ज़्यादा ग़रीब भारतीय अमरीकी?
खुदरा (रिटेल), आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) और पर्यटन (ट्रेवल) जैसे उद्योगों में काम करने वाले बहुत से भारतीय अमरीकियों को कोविड-19 ने सबसे अधिक प्रभावित किया है. इन क्षेत्रों से जुड़े बहुत से लोगों की नौकरियाँ चली गई हैं और काम-धंधे ठप पड़ गए हैं.
प्रोफ़ेसर कपूर कहते हैं, "हम पाते हैं कि इन उद्योगों में काम करने वाले भारतीय अमरीकी श्रमिकों में से क़रीब एक-तिहाई के पास अमरीका की नागरिकता नहीं है. इसका मतलब है कि अगर उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है, तो सरकारी सुविधाओं तक उनकी पहुँच नहीं होगी."
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आधे से ज़्यादा ग़रीब भारतीय अमरीकी सिर्फ़ पाँच राज्यों में रहते हैं और वो हैं: न्यूयॉर्क, कैलिफ़ॉर्निया, टेक्सास, इलिनॉय और न्यू जर्सी.
कैसे हो सकती हैं समस्याएँ कम?
प्रोफ़ेसर कपूर ने भारतीय मूल के अमरीकियों में ग़रीबी कम करने के लिए रणनीतियाँ बनाई हैं. जैसे- उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति जहाँ ग़रीब भारतीय अमरीकी रहते हैं.
हॉस्पिटैलिटी जैसे अधिक जोखिम वाले उद्योगों पर ध्यान देने की रणनीति, जहाँ नौकरी जाने की संभावनाएँ काफ़ी ज़्यादा हैं. उन लोगों को क़ानूनी सहायता देने की रणनीति जो अनाधिकारिक रूप से श्रमिक हैं या अपने किराए के घर से निकाले जाने का नोटिस पा चुके हैं.
प्रोफ़ेसर कपूर ने कमज़ोर समूहों, जैसे बच्चों और बूढ़ों पर विशेष रूप से ध्यान देने की रणनीति बनाई है, जो मानसिक स्वास्थ्य जैसी समस्याओं और घरेलू हिंसा जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं.
साथ ही वे श्रमिकों को ऐसी ट्रेनिंग भी दे रहे हैं, जिससे वो उन दूसरे उद्योगों में नौकरियाँ तलाश सकें जहाँ रोज़गार बढ़ने की संभावनाएँ अधिक हैं.
वैश्विक भारतीय प्रवासी संगठन 'इंडियास्पोरा' जिसने यह रिपोर्ट जारी की है, उसने एक विज्ञप्ति में यह कहा है कि "इस रिपोर्ट को लाने का मक़सद सबसे अधिक वंचित भारतीय अमरीकियों की दुर्दशा की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना है."
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