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क्या ये समुद्री घास भविष्य का खाना और ईंधन है?
- Author, एड्रिन मुरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, फरो आईलैंड
"यहां थोड़ी हवा चल रही है. हम देखते हैं कि इस हार्वेस्टिंग बोट पर बैठकर हम कितनी दूर तक पहुंच सकते हैं."
हम जल्दी ही एक शेल्टर तक पहुंच गए, जहां खड़े पहाड़ समुद्र से उठती सैकड़ों लहरों को देख रहे हैं.
समुद्री शैवाल के प्रोडक्शन से जुड़ी ओशियन रेनफॉरेस्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर ओलेवर ग्रेगसन कहते हैं, "वो एक क्षैतिज रेखा में हैं."
ग्रेगसन बताते हैं, "हर एक मीटर के अंतराल पर एक पंक्ति नीचे की ओर है और यहीं पर सी-वीड (समुद्री शैवाल) उगती है."
ग्रेगसन के मुताबिक़, गहराई में पौष्टिक तत्वों से भरपूर पानी समुद्री शैवाल के विकास के लिए सबसे बेहतर होता है.
यहां लगभग एक स्थायी तापमान 6 डिग्री सेल्सियस से 11 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहता है.
मशीनीकरण
फूड इंडस्ट्री और दूसरी मांगों के बढ़ने को देखते हुए ग्रेगसन की फ़र्म यूरोप और उत्तरी अमरीका में समुद्री शैवालों की कतार के बीचोंबीच है.
वो कहते हैं, "आपके पास बायोमास है जिसका इस्तेमाल खाने और खिलाने के लिए किया जा सकता है. साथ ही यह जीवाश्म आधारित उत्पादों की भी जगह ले सकता है."
समुद्री शैवाल तेज़ी से बढ़ने वाली शैवाल है. ये शैवाल सूरज की रोशनी से ऊर्जा लेती है और समुद्री पानी से पौष्टिक तत्व और कार्बन डाईऑक्साइड. वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि समुद्री शैवाल जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मददगार साबित हो सकते हैं और कार्बन उत्सर्जन की भरपाई भी कर सकते हैं.
ओशियन रेनफॉरेस्ट को हाल ही में यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ एनर्जी से फंड मिला है ताकि वे कैलिफोर्निया में भी ऐसा ही सिस्टम बनाएं. समुद्री शैवाल को निकालने का काम हो तो जल्दी जाता है लेकिन यह काम काफी गंदगीभरा है.
लेकिन कंपनी तेज़ी से बढ़ रही है और इसकी क्षमता को इस साल दोगुना किये जाने की योजना है. हालांकि इससे तुंरत अभी पैसा नहीं बन रहा है लेकिन ऐसी उम्मीद है कि बहुत जल्दी ही इससे पैसा भी मिलने लगेगा.
ग्रेगसन कहते हैं, "हम देख सकते हैं कि हम इसे कैसे इसका मशीनीकरण कर सकते हैं और कैसे हम इसे एक बड़े पैमाने की गतिविधि बना सकते हैं."
सौंदर्य प्रासाधन और दवाइयां
समुद्री शैवाल को तुरंत प्रोसेस करने की ज़रूरत होती है. फ़ारोइस गांव में एक छोटे से प्लांट में, कटाई के बाद लाए गए समुद्री शैवाल को साफ़ किया जाता है. कुछ को सुखा दिया जाता है और फ़ूड मैन्युफ़ैक्चरर को भेज दिया जाका है. इसके बाद जो बचता है कि उसे फर्मन्टेड (किण्वित) किया जाता है और पशु चारा बनाने वाली कंपनियों को भेज दिया जाता है.
समुद्री शैवाल की खेती का एक बड़ा हिस्सा खाने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है लेकिन इसके अर्क का इस्तेमाल कई तरह की चीज़ों में किया जाता है. चाहे वो टूथपेस्ट हो, कॉस्मेटिक हो, दवाइयां हो या फिर पालतू जानवरों के खाने में. इन सभी में हाइड्रोकोलॉयड्स होता है जोकि समुद्री शैवाल से ही आता है.
इसके अलावा इसका इस्तेमाल अब टेक्सटाइल्स और प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर, वॉटर कैप्सूल बनाने में और ड्रिंकिंग स्ट्रॉ के तौर पर भी किया जा रहा है. समुद्री शैवाल का उत्पादन इस समय अपने चरम पर है.
साल 2005 से 2015 के बीच इसकी मात्रा दोगुनी हो गई है. संयुक्त राष्ट्र के फ़ूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइज़ेशन की रिपोर्ट के मुताबिक़, सलाना 30 मिलियन टन समुद्री शैवाल का उत्पादन किया जा रहा है. दुनिया भर में इसका व्यापार 6 अरब डॉलर से भी अधिक का है.
बावजूद इसके एशिया के बाहर के कुछ ही हिस्सों में इसकी खेती होती है. इसका एक बड़ा कारण यह है कि यह श्रम प्रधान गतिविधि है.
बहुत अधिक श्रम की ज़रूरत
डेनमार्क में आरहस यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ वैज्ञानिक एनेट ब्रह्न कहती हैं, "यूरोप में मज़दूरी काफी महंगी है. इसलिए यह एक बहुत बड़ी वजह है."
इसकी पैदावार को किफ़ायती बनाने की बात पर वो कहती हैं, "इसके लिए पैदावार बढ़ाने की ज़रूरत है और लागत कम करने की."
एनेट कहती हैं "विभिन्न इलाक़ों में पानी भी अलग-अलग होता है. सभी को संशोधन की ज़रूरत होती है. ऐसा कोई उपाय नहीं है जो हर जगह काम कर जाए."
हालांकि एनेट उम्मीद जताती हैं कि और कहती हैं कि ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जहां बेहतर होने और सफल होने की गुंजाइश है.
सिनटेफ़ जैसे इनोवेटर्स कुछ ऐसा ही करने की कोशिश कर रहे हैं. नॉर्वे के वैज्ञानिक अनुसंधान समूह खेती को कारगर बनाने के लिए कई नई तक़नीकों पर काम कर हैं.
शोध वैज्ञानिक सिज़े फोर्बर्ड कहते हैं, "मौजूदा समय में ज़्यादातर समुद्री शैवाल का इस्तेमाल खाने के लिए किया जा रहा है लेकिन भविष्य में हम इसका उपयोग मछली के आहार, उर्वरक, बायोगैस आदि के लिए करना चाहते हैं. हमें बड़ी मात्रा में उत्पादन करने की ज़रूरत है."
प्रयोगशालाएं
प्रोटोटाइप मशीनें जैसे कि समुद्री शैवाल स्पिनर स्वचालित तरीके से समुद्री शैवाल को रोपित करती है.
एक दूसरी अवधारणा SPoke (स्टैंडरडाइज़ प्रोडक्शन ऑफ़ केल्प) की भी है. जोकि वृत्ताकार कृषि मॉड्यूल है. उत्तरी पुर्तगाल में तालाबों और टैंकों की एक श्रृंखला में समुद्री शैवाल की खेती की जा रही है.
मैनेजिंग डायरेक्टर हेलेना अब्रू का कहना है "यह एक बहुत अधिक नियंत्रण वाला वातावरण है."
अब्रू का मानना है कि यह तुलनात्मक तौर पर कहीं ज़्यादा फ़ायदेमंद है.
नवीनीकरण
एक तटीय लगून से समुद्री जल मछलियों के तालाब तक लाया जाता है. फिर इसे फिल्टर पंप से पंप किया जाता है.
इसके बाद ये पानी उन टैंकों में भेजा जाता है जहां समुद्री शैवाल उगाए जाते हैं.
वो कहती हैं, "ये पानी नाइट्रोजन से भरपूर होता है और शैवाल भी फिर इसी प्रकृति के हो जाते हैं. ऐसे में किसी भी उर्वरक का प्रयोग करने की ज़रूरत नहीं पड़ती. हम अपने शैवाल के लिए मछली के पानी का इस्तेमाल करते हैं."
लेकिन कई चुनौतियां भी हैं...
सबसे बड़ी समस्या ऊर्जा या बिजली ख़र्च की है. टैंकों में पानी चालू रखने के लिए पंप को लगातार चलाए रखना होता है और इसके लिए बिजली चाहिए होती है.
अभी इसका बाज़ार इतना बड़ा नहीं है कि सिर्फ़ इसके भरोसे गुज़र-बसर किया जा सके. हालांकि आब्रे को पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में समुद्री शैवाल का बाज़ार बढ़ेगा ही.
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