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बीबीसी प्रस्तोता रहीं महिला की ब्रेन हेमरेज के बाद स्वस्थ होने में संगीत ने की मदद
बीबीसी प्रस्तोता क्लेमेन्सी बर्टन-हिल ने कहा है कि ब्रेन हेमरेज के बाद स्वास्थ्य लाभ करने में संगीत से उन्हें काफ़ी मदद मिली.
बीबीसी रेडियो 3 चैनल के एक कार्यक्रम की प्रस्तोता रहीं 39 साल की क्लेमेन्सी इसी साल जनवरी में न्यूयॉर्क में बेहोश हो गई थीं. इसके बाद उनके ब्रेन की सर्जरी हुई थी.
सर्जरी होने के महीनों बाद उन्होंने कहा है कि उनकी सेहत में सुधार होने में संगीत की अहम भूमिका रही है. क्लेमेन्सी अभी बात करना और चलना सीख रही हैं.
वो कहती हैं, “कभी-कभी संगीत मुझे सांत्वना देता है. कभी-कभी ये मुझे उठ खड़ा होने और जीवन से लड़ने के लिए प्रेरित करता है.”
अपने दोस्तों में क्लेमी नाम से जानी जाने वाली क्लेमेन्सी ने पत्रकार सोफ़ी एल्महर्स्ट को बताया ”संगीत मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया था.”
कैसे हुआ ब्रेन हेमरेज
क्लेमेन्सी बीबीसी रेडियो 3 के जाने-माने क्लासिकल फिक्स कार्यक्रम का हिस्सा रही हैं. साथ ही उन्हें बीबीसी के प्रॉम कवरेज के भी अहम हिस्से के रूप में जाना जाता है. वो फ़िलहाल न्यूयॉर्क में रह रही हैं और न्यूयॉर्क के पब्लिक रेडियो क्लासिकल म्यूज़िक स्टेशन डब्ल्यूक्यूएक्सआर में बतौर क्रिएटिव डायरेक्टर काम कर रही हैं.
इस साल की शुरुआत में उन्हें ब्रेन हेमरेज (मस्तिष्क के भीतर ख़ून निकलना) का गंभीर दौरा पड़ा. उन्हें पहले से ही आर्टेरियोवीनस मैलफॉर्मेशन की शिकायत थी जिसकी समय रहते पहचान नहीं हो पाई थी.
इस बीमारी में मस्तिष्क के भीतर असामान्य रूप से धमनियों और नसों का क्लस्टर यानी गुच्छा बन जाता है. यह घातक हो सकता था.
मेनहैट्टन के माउंट सिनाई वेस्ट अस्पताल में इमर्जेंसी में उनका ऑपरेशन किया गया. इस दौरान डॉक्टरों ने उनकी खोपड़ी का आधा हिस्सा निकाल दिया था. इसके बाद वो 17 दिनों तक बोहोश रहीं. किसी को भी इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था कि इलाज के बाद उनका मस्तिष्क कितना ठीक हो पाएगा.
अस्पताल में उनके शुरुआती दिनों में उनके बेड के पास स्पीकर पर उनके परिजनों का पसंदीदा संगीत बजाया जाता था. जिस दिन क्लेमेन्सी न्यूयॉर्क में बेहोश हुई थीं उनके मित्र ब्रितानी ऑपेरा सिंगर एंड्र्यू स्टेपल्स न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में शिरकत करने वाले थे. उनके होश में आने से कुछ दिन स्टेपल्स ने बताया कि एक ख़ास संगीत सुनकर क्लेमेन्सी अपने पैर हिला रही थीं.
स्टेपल्स कहते हैं, "मुझे याद है कि मुझे लगा कि ये एक चीज़ है जो उन्हें पैर हिलाने के लिए प्रेरित कर सकती है."
इसके एक सप्ताह बाद जब डॉक्टर केल्मेन्सी को सांस लेने में मदद करने वाले पाइप्स हटा रहे थे तब उनके पसंदीदा संगीतकार रिचर्ड स्ट्रॉस मोर्गन का संगीत स्पीकर पर बज रहा था.
स्टेपल्स कहते हैं, “उसने अपने हाथ से मेरी कलाई कसकर पकड़ ली, मैंने उसे गीत के बोल सुनाए और फिर हम दोनों रोने लगे. वो ठीक होगी या नहीं इसके बाद से मुझे इस बारे में अधिक चिंता नहीं हुई.”
संगीत ने कैसे की मदद
शुरुआती दिनों में क्लेमेन्सी को कुछ याद नहीं था. हालांकि वो बताती हैं कि जब मुझे होश आ रहा था मैं सोच रही थी कि बीमारी से हार जाएं या फिर जीवन की ये चुनौती स्वीकार करें.
वो कहती हैं, “मैं सोच रही थी कि मैं ठीक हो सकती हूं, मैं ये मुश्किल दौर पार कर सकती हूं.”
अब कुछ हद तक स्वास्थ्य लाभ कर चुकी क्लेमेन्सी कहती हैं, “संगीत, निराशा के ठीक विपरीत है. मुझे लगता है कि ये लड़ाई वाकई में बड़ी चुनौती थी.”
जब क्लेमेन्सी तेज़ी से ठीक होने लगीं तो जानी-मानी वायलिन वादक निकोला बेनेडेट्टी उनसे मुलाक़ात करने पहुंचीं. उन्होंने बाक की कुछ धुनें बजाईं. एक तरफ जब निकोला वायलिन का बो (वायलिन बजाने वाला गज या डंडी) संभाल रही थीं क्लेमेन्सी अपने उल्टे हाथ से वायलिन के तार छेड़ रही थीं क्लेमेन्सी खुद भी वायलिन बजाती हैं.
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क्लेमेन्सी को ये जानकर आश्चर्य हुआ कि उन्हें संगीत के सभी नोट्स याद थे.
वो कहती हैं, “ये बात घिसीपिटी लगती है लेकिन संगीत का दायरा भाषा के भी परे हैं. मैंने जो अनुभव किया है उसके आधार पर कह सकती हूं कि मैं इसका सही मतलब जानती हूं.”
धीरे-धीरे क्लेमेन्सी की सेहत में सुधार होने लगा और वो बोलने लगीं और हाथ पैर हिलाने लगीं. कोरोना महामारी के कारण पैदा हुई चुनौतियों का उनकी सेहत में हो रहे सुधार पर कोई असर नहीं पड़ा है.
क्लेमेन्सी कहती हैं, “मैं मानती हूं कि मेरे ठीक होने में संगीत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि संगीत मस्तिष्क के दोनों हिस्सों का इस्तेमाल करता है.”
“ये एक तरीके से आपके मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को काम करना सिखाता है.”
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