अमरीकी चुनाव में क्या ये वॉर हीरो बनेंगी उपराष्ट्रपति उम्मीदवार?

    • Author, तारा मैककेलवी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज

अमरीका के इलिनॉय राज्य की सीनेटर टैमी डकवर्थ के बारे में माना जा रहा है कि वे डेमोक्रैटिक पार्टी के टिकट पर उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हो सकती हैं.

बैंकॉक में पैदा हुईं और इराक युद्ध में जख्मी होने वाली टैमी डकवर्थ एक संवेदनशील और जुझारू शख्स रही हैं.

डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से रनिंग मेट (उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार) के तौर पर उनका नाम बार-बार उच्च-स्तरीय चर्चा में सामने आ रहा है. वे फ़ॉक्स न्यूज़ के टकर कार्लसन और अन्य कंजर्वेटिव्स का निशाना भी बन गई हैं.

राजनीतिक समझ की हुई तारीफ

हाल में उन्होंने सीएनएन पर जब कहा कि वे अमरीका के संस्थापकों और गुलामों को रखने वालों के मकबरे हटाने को लेकर खुले विचार रखती हैं तो कार्लसन ने उनकी देशभक्ति पर सवाल खड़े किए.

उन्होंने जवाबी हमला किया. उन्होंने कहा कि कार्लसन को मेरे पैरों पर एक मील चलना चाहिए और तब वे मुझे बताएं कि मैं अमरीका को प्यार करती हूं या नहीं.

कार्लसन को उनकी चुनौती सुर्खियों में आ गई और इससे लोगों को उनकी परिपक्व राजनीतिक समझ और सैन्य पृष्ठभूमि दोनों के बारे में पता चला.

कई डेमोक्रैट्स का मानना है कि उनका सैन्य रिकॉर्ड और कंजर्वेटिव्स के साथ टक्कर में उनकी समझ और साथ ही एक एशियाई-अमरीकी मूल का उनका बैकग्राउंड बाइडेन की उम्मीदवारी को मजबूती देगा.

डकवर्थ के समर्थक कहते हैं कि अगर वे उन्हें अपने रनिंग मेट के तौर पर चुनते हैं तो वे पूर्व सैनिकों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के वोट उन्हें दिलाने में मददगार साबित होंगी.

दूसरे फैक्टर

इसके बावजूद कई लोगों का मानना है कि बाइडेन को उनकी बजाय एक काले उम्मीदवार को रनिंग मेट चुनना चाहिए. इस मामले में सीनेटर कमला हैरिस को अक्सर एक संभावना के तौर पर गिना जाता है.

डेमोक्रैटिक टिकट पर दावेदारी रखने वाले अन्य लोगों में एक ग्रुप है जिसमें न्यू मेक्सिको के गवर्नर मिशेल लुजान ग्रिशम शामिल हैं. ये बाइडेन को कई राज्यों में मदद दे सकते हैं.

डेमोक्रैट्स के लिए रनिंग मेट का चुनाव बाइडेन की उम्र और अपनी भूमिका के लिए उनके खुद के आकलन के लिहाज से भी ज्यादा अहमियत रखता है.

बाइडेन 77 साल के हैं और अगर उन्हें चुना जाता है तो अपने टर्म के अंत तक वे 82 साल के होंगे. वे खुद को एक ट्रांजिशन कैंडिडेट के तौर पर देखते हैं. यहां तक के उनके कट्टर समर्थक भी यह मानते हैं कि अगर वे चुने गए तो वे दूसरा टर्म नहीं मांगेगे.

इसका मतलब यह है कि जो भी शख्स उनके साथ उपराष्ट्रपति के तौर पर काम करेगा वह आगे चलकर राष्ट्रपति हो सकता है.

पूर्व सैनिकों के लिए किए कामों से हुईं मशहूर

डकवर्थ 52 साल की हैं. उन्हें पूर्व सैन्यकर्मियों के लिए किए गए कामों के लिए जाना जाता है. इसके अलावा, उन्होंने हेल्थकेयर पॉलिसी पर भी काम किया है और वे राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों पर अक्सर अपनी राय जाहिर करती हैं. वे इराक युद्ध में लड़ चुकी हैं, लेकिन वे यह मानती हैं कि यह एक गलती थी.

वे कहती हैं, "यह एक मुश्किल सबक है. मुझे उम्मीद है कि यह देश भविष्य में युद्ध में जाने से पहले कहीं ज्यादा सोच-समझकर फैसला करेगा."

क्या है पारिवारिक पृष्ठभूमि?

उनकी निजी कहानी भी बेहद दिलचस्प है. वे और उनके पति ब्रायन बोल्सबे की दो बेटियां- ऐबिगेल और माइली पर्ल हैं.

उनके पिता फ्रैंक एक अमरीकी नागरिक थे. वे युनाइटेड नेशंस में काम करते थे. उनकी मां लामाई मूलरूप से थाइलैंड की हैं.

डकवर्थ थाई बोलती हैं. वे अपने माता-पिता के साथ सिंगापुर, इंडोनेशिया और कंबोडिया रह चुकी हैं.

1970 के दशक के मध्य में खमेर रूज के सत्ता में आने के बाद शुरू हुई हिंसा के दौरान वे अपने परिवार के साथ कंबोडिया के नाम पेन्ह में रह रही थीं.

बाद में डकवर्थ अपने पिता के कदमों पर चलते हुए सेना में शामिल हो गईं. उन्होंने एक बार मुझे बताया था कि उन्होंने कभी भी खुद को राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के बारे में सोचा भी नहीं था.

वे कहती हैं, "मेरे अंदर वो आग नहीं है." लेकिन, वे बाइडेन की जबरदस्त समर्थक हैं.

बाइडेन करते हैं तारीफ

एक ऑनलाइन फंडरेजर (पैसा जुटाने की मुहिम) में बाइडेन ने उनकी युद्ध और राजनीति में दिखाई गई वीरता की तारीफ की. उन्होंने कहा, "मैंने इतना साहस दिखाने वाला दूसरा कोई शख्स नहीं देखा है." उन्हें सीधे संबोधित करते हुए बाइडेन ने कहा, "मैं आपका शुक्रगुजार हूं कि इस जंग में आप यहां मेरे साथ हैं."

वैचारिक रूप से डकवर्थ बाइडेन के लिए एक सही साथी हैं. वे एक सेंट्रिस्ट डेमोक्रैट हैं. यूएस सीनेट के डेमोक्रैट्स में वे भी वैचारिक रूप से मध्यमार्गी दिखाई देती हैं.

हाल के हफ्तों में उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी 'देश को नेतृत्व देने में नाकामी' की कड़ी आलोचना की.

बाइडेन के सहयोगियों ने हाल में ही उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए उनका इंटरव्यू लिया है. उन्होंने इस इंटरव्यू को सकारात्मक बताया है.

कौन हो सकते हैं जो बाइडेन के रनिंग मेट?

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन ने शपथ ली है कि वे एक महिला को अपना रनिंग मेट बनाएंगे. जिनके शॉर्टलिस्ट होने की अफवाह है, उनमें नीचे दिए नाम शामिल हैः

- कैलिफोर्निया से सीनेटर कमला हैरिस

- पूर्व नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर सुजैन राइस

- मिशीगन की गवर्नर ग्रेटचेन व्हाइटमर

- इलिनॉय से सीनेटर टैमी डकवर्थ

- मैसाचुसेट्स से सीनेटर एलिजाबेथ वारेन

- विसकॉन्सिन से सीनेटर टैमी बाल्डविन

- एरिज़ोना से सीनेटर किर्स्टीन सिनेमा

तेज़ी से तय किया राजनीतिक सफर

मिलिटरी से रिटायर होने के बाद डकवर्थ ने पूर्व सैन्यकर्मियों के मसलों पर काम किया. 2012 में वे कांग्रेस के लिए चुनी गईं.

2016 में उन्होंने सीनेट सीट जीत ली और राज्य की जूनियर सीनेटर बन गईं. राज्य की राजनीति से राष्ट्रीय स्तर तक अहम भूमिकाओं में आने का सफर उन्होंने काफी तेजी से तय किया है.

शिकागो में यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय के राजनीति विज्ञान विभाग के हेड डिक सिम्पसन कहते हैं कि वे गुजरे आधे दशक में उन्होंने किसी को भी इतनी तेजी से राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते नहीं देखा है.

सिम्पसन तर्क देते हैं कि ओबामा ने भी इलिनॉय से ही राजनीति शुरू की थी और वे सर्वोच्च पद तक गए, लेकिन उन्हें इसमें थोड़ा ज्यादा वक्त लगा था.

हालांकि, राजनीति में उनका रिकॉर्ड परफेक्ट नहीं है. कांग्रेस में उन्हें कानून पास कराने के लिए संघर्ष करना पड़ा है और पूर्व सैनिकों के लिए किए गए उनके कामों की आलोचना भी हुई है. उनके आलोचक कहते हैं कि वे सभी सही बातें कहती हैं, लेकिन वे जिन वेटरन प्रोग्राम्स के बारे में बात करती हैं उनमें से कई जमीनी हकीकत पर नहीं पहुंच पाए हैं.

आलोचनाओं से बेफिक्र

हालांकि, आलोचना का उनपर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है. अपने पूरे करियर में उन्होंने असाधारण दृढ़ता दिखाई है.

युद्ध में अपने पैर खोने के दर्द और उसके बाद की रिकवरी को उन्होंने साहस के साथ के साथ झेला है. वे कहती हैं, "मेरे लिए यही बड़ी बात है कि मैं जीवित बच गई."

उनके समर्थकों को उम्मीद है कि बाइडेन उन्हें अपने रनिंग मेट के तौर पर चुनेंगे ताकि वे कैंपेन में जोश पैदा कर सकें. वे इस हफ्ते अपने फैसले का ऐलान कर सकते हैं.

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