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ऑस्ट्रेलिया में चीनी छात्रों से ठगी के लिए कुछ यूं रची जा रही साज़िश
ऑस्ट्रेलिया में पुलिस का कहना है कि सिडनी में चीनी छात्रों को अपहरण के एक स्कैम में निशाना बनाया जा रहा है और इसमें शामिल लोग उन छात्रों से बड़ी रक़म वसूलने में कामयाब हो गए हैं.
पुलिस के अनुसार कई मामलों में तो ब्लैकमेलिंग के शिकार चीनी छात्रों को अपने ही अपहरण का नाटक कर चीन में अपने परिवार से पैसे मँगाने के लिए वीडियो बनाकर भेजना पड़ा.
पुलिस का कहना है कि साल 2020 में अब तक आठ ऐसे 'वर्चुअल अपहरण' के केस सामने आए हैं और उनमें एक में तो 11 लाख पाउंड की फ़िरौती दी गई थी.
इसके शिकार लोगों को यक़ीन हो जाता था कि वो या उनका कोई क़रीबी रिश्तेदार ख़तरे में हैं और वो फ़िरौती देने को तैयार हो जाते थे.
ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स पुलिस ने कहा कि साल 2020 में ये स्कैम बहुत तेज़ी से बढ़ा है और अब तो ये 'इंडस्ट्रियल स्केल' पर किया जा रहा है.
पुलिस ने छात्रों से आग्रह किया है कि जैसे ही उन्हें कोई धमकी भरा फ़ोन आए वो तुरंत पुलिस को ख़बर करें.
ये स्कैम कैसे काम करता है?
अधिकारियों का कहना है कि 'कॉल-सेंटर टाइप' का ये स्कैम विदेशों से ऑपरेट किया जा रहा है, इसलिए इसको ट्रैक करने में मुश्किल हो रही है.
इसमें फ़र्ज़ीवाड़ा करने वाला व्यक्ति फ़ोन कर ख़ुद को चीनी दूतावास का या कोई दूसरा अधिकारी बताता है और शिकार होने वाले छात्र को बताता है कि वो चीन में किसी अपराध में शामिल है या फिर उन्हें किसी और तरह का कोई ख़तरा है.
चीनी भाषा में बात करने वाला ये फ़र्ज़ी अधिकारी उसके बाद छात्र को कहता है कि अगर वो गिरफ़्तारी या निर्वासित किए जाने से बचना चाहते हैं तो वो इसकी फ़ीस जम करें.
पुलिस के अनुसार कुछ मामलों में तो छात्रों को इस बात तक के लिए तैयार करा लिया गया था कि वो अपने परिवार या दोस्तों से संपर्क ना करें, किसी एक होटल में रहकर फ़र्ज़ी अपहरण का वीडियो बनाएं और फिर उस वीडियो को अपने परिवार को भेजकर उनसे पैसे भेजने को कहें.
एक मामले में तो एक पिता ने अपनी बेटी का किसी अंजान जगह पर हाथ-पैर बंधा हुआ, मुंह बंद वीडियो मिलने से पहले ही 11 लाख पाउंड फ़िरौती की रक़म भेज दी थी.
उसके बाद पिता ने जब सिडनी पुलिस से संपर्क किया तो पुलिस ने केवल एक घंटे में उस लड़की को शहर के एक होटल में बिल्कुल सही सलामत पाया.
कई दूसरे मामलों में 20 से 30 हज़ार ऑस्ट्रेलियन डॉलर की फ़िरौती दी गई थी.
चीफ़ अधीक्षक डैरेन बेनेट के अनुसार, "कुछ मामलों में तो परिवार ने अपना सब कुछ फ़िरौती में दे दिया."
कई मामलों में जब पुलिस को परिवार से सूचना मिली तो पुलिस ने कथित अपहरण के शिकार लोगों को दूसरे दिन बिल्कुल सुरक्षित पाया. कई बार तो इसके शिकार लोग ख़ुद को इतना लज्जित महसूस करने लगे कि उन्होंने पुलिस को इस बारे में कुछ बताया ही नहीं.
न्यू साउथ वेल्स पुलिस के अनुसार, "वर्चुअल अपहरण के शिकार कई लोग जो कुछ हुआ उससे काफ़ी भयभीत हो गए थे. उन्हें ये लग रहा था कि उन्होंने ख़ुद को या अपने परिवार के लोगों को सचमुच ख़तरे में डाल दिया था."
आख़िर लोग कैसे इसके शिकार बने?
पुलिस के अनुसार ये पूरा स्कैम बहुत बड़े पैमाने पर चल रहा है. इसमें फ़ोन बुक में मौजूद किसी भी चीनी सरनेम वाले व्यक्ति के पास ऑटोमैटिक फ़ोन किया जाता है.
पुलिस अधीक्षक बेनेट कहते हैं, "उन लोगों ने अपना जाल बहुत बड़ा फैला दिया है. कुछ लोग तो इसमें फँस ही जाते हैं, जो उनके लिए बहुत फ़ायदे का सौदा होता है."
उनके अनुसार पिछले कुछ महीने में इसमें बहुत तेज़ी आई है और हर सप्ताहांत पर किसी न किसी के शिकार बनने की ख़बर मिलती है.
ऑस्ट्रेलिया में विदेशी छात्रों के वकील कहते हैं कि कोरोना महामारी के कारण ख़तरा और बढ़ गया है क्योंकि कई छात्र फ़्रीलानसिंग या असंगठित क्षेत्र में काम करने के लिए मजबूर हैं, जहाँ उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है.
पुलिस के अनुसार कुछ मामलों में 'सांस्कृतिक कारक' और कुछ मामलों में विदेशी छात्रों का अलग-थलग रहना भी उन्हें आसान निशाना बनाता है.
न्यू साउथ वेल्स पुलिस का कहना है, "इस तरह के अपराध से बचने के लिए छात्र दो अहम काम कर सकते हैं- पहला तो ये कि उन्हें इस बात से सावधान रहना चाहिए कि इस तरह के अपराधी मौजूद हैं, दूसरा ये कि अगर उन्हें पता चले कि वो या उनका कोई जानने वाला इसका शिकार हो सकता है तो फ़ौरन पुलिस को बताएं."
अमरीका और न्यूज़ीलैंड में भी इस तरह की धोखाधड़ी की ख़बरें आई हैं.
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