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अमरीका ने चीन का काउंसलेट बंद करने का फ़ैसला क्यों लिया
ट्रंप प्रशासन ने चीन के ख़िलाफ़ बड़ा क़दम उठाते हुए उसके ह्यूस्टन (टेक्सास) स्थित वाणिज्यक दूतावास को बंद करने का आदेश दिया है.
चीन को इसके लिए 72 घंटे का समय दिया गया है, यानी शुक्रवार तक चीन को वाणिज्यक दूतावास बंद करना होगा.
अमरीकी विदेश विभाग की प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टागस ने कहा कि 'अमरीकी बौद्धिक संपदा और अपने नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए ह्यूस्टन स्थित चीनी वाणिज्यिक दूतावास को बंद करने का निर्णय लिया गया है.'
उन्होंने आरोप लगाया कि 'चीन इस दूतावास के ज़रिये अमरीकी में देश विरोधी गतिविधियाँ कर रहा था.'
लेकिन चीन ने भी आक्रामक तेवर दिखाते हुए 'जवाबी कार्रवाई की बात' कही है. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 'हम अमरीकी सरकार से अपने अनुचित फ़ैसले को तुरंत रद्द करने का आग्रह करते हैं.'
इससे पहले अमरीकी मीडिया में कुछ रिपोर्ट आयी थीं कि चीनी काउंसलेट के अंदर बड़ी मात्रा में दस्तावेज़ों को जलाया जा रहा है.
मंगलवार को इमारत के भीतर मौजूद कुछ अज्ञात व्यक्तियों को फ़िल्माया भी गया था जो कागज़ों से भरे कुछ बड़े डिब्बों में आग लगा रहे थे. इसके बाद उन्होंने आग बढ़ती देख, उसे पानी डालकर बुझाने की कोशिश की. ह्यूस्टन पुलिस ने ट्वीट किया कि 'उनकी एक टीम वहाँ गई थी, लेकिन उन्हें दूतावास के भीतर नहीं जाने दिया गया.'
पुलिस ने भी दूतावास के भीतर से धुआँ उठने की पुष्टि की थी. लेकिन चीनी विदेश मंत्रालय ने इसपर कोई टिप्पणी नहीं की, बल्कि ये कहा कि 'सब कुछ सामान्य है और पहले की तरह चल रहा है.'
इस घटना के बाद ही ट्रंप प्रशासन की ओर से वाणिज्य दूतावास पर ये बयान आया.
इससे पहले मंगलवार को एक अमरीकी विभाग ने आरोप लगाया कि 'चीन कुछ हैकर्स को प्रायोजित कर रहा है ताकि कोविड-19 का टीका विकसित कर रहीं प्रयोगशालाओं को निशाना बनाया जा सके.'
वाणिज्य दूतावास बंद करने का निर्णय क्यों?
अमरीकी विदेश विभाग की प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टागस ने वाणिज्य दूतावास बंद करवाने के पीछे कुछ वजहें बताई हैं.अ
उन्होंने कहा, "अमरीका कतई बर्दाश्त नहीं करेगा कि चीन हमारी संप्रभुता का उल्लंघन करे या हमारे लोगों को डराये-धमकाये, ठीक उसी तरह जैसे हमने चीन के अनुचित व्यापारिक व्यवहार, अमरीकी नौकरियों को छीनने की कोशिश और अन्य मामलों में चीन के अहंकारी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया है."
मॉर्गन ऑर्टागस ने वियना कनवेंशन की ओर भी इशारा किया जिसके तहत मेहमान देश को मेज़बान देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप ना करने की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दी गई है.
ह्यूस्टन स्थित यह वाणिज्य दूतावास अमरीकी में स्थित पाँच चीनी वाणिज्य दूतावासों में से एक हैं. इनके अलावा वॉशिंगटन में चीन का मुख्य दूतावास है.
यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन ने इस एक वाणिज्य दूतावास को ही निशाना क्यों बनाया गया.
चीन ने कैसी प्रतिक्रिया दी?
चीन की सरकार ने अमरीका के इस निर्णय को दोनों देशों के संबंधों के लिए 'बहुत बुरा' बताया है और कहा है कि 'इससे तनाव में अभूतपूर्व वृद्धि होगी.'
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वान्ग वेनबिन ने कहा, "यह अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन है. अमरीका अपने माथे पर लगे कलंक हमारे माथे पर थोपना चाहता है. इसी वजह से ऐसे अनुचित हमले किये जा रहे हैं."
वान्ग ने ट्रंप प्रशासन से इस बारे में 'फिर से विचार करने का आग्रह' किया है और अगर अमरीका ऐसा नहीं करता, तो चीन ने चेतावनी दी है कि 'वो भी जवाबी कार्रवाई को मजबूर होगा.'
वान्ग ने कहा, "ज़मीनी हक़ीक़त की अगर बात करें और देखें कि चीन और अमरीका के एक दूसरे के यहाँ कितने वाणिज्य दूतावास हैं और कितने राजनयिक व कर्मचारी एक दूसरे के यहाँ मौजूद हैं, तो आप पायेंगे कि चीन में काम करने वाले अमरीकियों की संख्या ज़्यादा है."
इस बीच चीन के सरकारी अख़बार 'द ग्लोबल टाइम्स' ने एक पोल शुरू किया है जिसमें पूछा जा रहा है कि 'जवाबी हमले में चीन को कौनसा अमरीकी वाणिज्य दूतावास बंद कर देना चाहिए.'
आगे क्या हो सकता है?
पिछले कुछ समय में अमरीका और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ा है.
ट्रेड वॉर के बाद, कोरोना वायरस महामारी, हॉन्ग-कॉन्ग में नया सुरक्षा क़ानून, दक्षिण चीन सागर में आधिपत्य की होड़, भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया और ताइवान के ख़िलाफ़ चीन का आक्रामक रवैया, अमरीकी पत्रकारों पर प्रतिबंध, वीगर मुसलमानों पर ज़ुल्म और तिब्बत को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है और इन सभी मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन और चीन के बीच टकराव हुआ है.
ताज़ा घटनाक्रम के बीच, चीनी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक चेतावनी जारी कर अमरीका में मौजूद अपने अंतरराष्ट्रीय छात्रों से सतर्क रहने को कहा है. चीनी मंत्रालय ने संदेह ज़ाहिर किया है कि 'अमरीकी एजेंसियाँ उनका उत्पीड़न कर सकती हैं, ग़ैर-ज़रूरी तलाशियाँ ली जा सकती हैं और उन्हें हिरासत में भी लिया जा सकता है.'
बीबीसी के डिफ़ेंस संवाददाता जॉनथन मार्कस ने इस स्थिति का विश्लेषण किया है.
वे कहते हैं, "यह निश्चित रूप से एक बड़ी तबदीली है. इस ख़बर के बाद कि कुछ लोग अमरीका में जासूसी कर रहे हैं, विशेषकर उन प्रयोगशालाओं की जहाँ कोविड-19 की वैक्सीन का काम चल रहा है, ट्रंप प्रशासन ने यह बड़ा क़दम उठाया है. हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इन दोनों का आपस में कोई संबंध है या नहीं."
जॉनथन के अनुसार, "इस निर्णय से यह ज़रूर स्पष्ट हो गया है कि अमरीका चीन को खुलेआम चुनौती देने को तैयार है. राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों और कोविड-19 की वजह से लड़खड़ाती अमरीकी अर्थव्यवस्था के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप को यह अच्छे से समझ आ गया है कि फ़िलहाल चीनी कार्ड खेलने से उन्हें राजनीतिक लाभ मिल सकता है."
वे कहते है, "यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन इस तरह भड़काये जाने पर कैसे जवाब देता है. क्या वो बराबरी की टक्कर देता है? और अगर वो ऐसा करता है तो इससे तनाव बढ़ेगा ही और परिस्थितियाँ और नाज़ुक होंगी."
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