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कोरोना वायरस: ट्रेन, बस या हवाई सफ़र कितना सुरक्षित?
- Author, रैचेल श्रेयर
- पदनाम, हेल्थ रिपोर्टर
लॉकडाउन में छूट के साथ ही ट्रेन, बस और हवाई जहाज़ जैसे सार्वजनिक परिवहनों में यात्रा करने के दौरान कोरोना से संक्रमित होने का ख़तरे को लेकर हम आशंकित है. इसे लेकर कोई अलग से खास शोध तो नहीं हुआ है लेकिन जितनी जानकारी हमें कोरोना वायरस के संक्रमण के बारे में है, उसके आधार पर इसका आकलन कर सकते हैं.
कितने सुरक्षित हैं ट्रेन और बस?
संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या फिर सांस के माध्यम से हवा में वायरस छोड़ने से कोरोना वायरस फैलता है.
हवा में तैरते वायरस किसी भी व्यक्ति के शरीर में सीधे या फिर वैसी चीज़ को छूने से, जहाँ विषाणुयक्त कण गिरे हैं, वहाँ से आंख, नाक और मुंह के माध्यम से प्रवेश कर सकते हैं.
संक्रमण का बाहर से ज़्यादा जोखिम बंद जगहों पर होता है. ऐसी बंद जगहें जिसमें हवा के आने-जाने की अच्छी व्यवस्था की गई हो, वो संक्रमण के लिहाज़ से कम जोखिम वाली होती हैं. इसलिए सार्वजनिक परिवहनों जिसमें आप खिड़की खोल सकते हैं, वो इस लिहाज़ से थोड़ा बेहतर हैं.
ट्रेन और बसों में जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि उसमें कितनी भीड़ है और आप खुद को दूसरों से बस स्टॉप और स्टेशन जैसी जगहों पर कितना दूर रख सकते हैं.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पिछली पाबंदियों को दरकिनार करते हुए घोषणा की है कि अब कोई भी किसी भी वक़्त सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कर सकता है.
वहाँ जो दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, उसके मुताबिक़ घर से बाहर आपको दूसरे लोगों से एक मीटर की दूरी बनाकर रखनी है.
हालांकि यह पता है कि बंद जगहों पर जैसे सार्वजनिक परिवहनों में वायरस सतह पर रह सकता है लेकिन वाकई में यह निश्चित तौर पर पता नहीं कि यह कितनी बार नए संक्रमण में तब्दील हो सकता है.
कुछ समूहों ने ट्रेन में कितना जोखिम है, इसे पता लगाने की कोशिश की है लेकिन अभी भी इस सवाल का जवाब नहीं मिल पाया है.
पुराने शोधों में लंदन के अंडरग्राउंड यातायात और सांस की बीमारी फैलने की संभावनाओं के बीच संबंध का जिक्र ज़रूर किया गया है.
इंस्टीट्यूट ऑफ़ ग्लोबल हेल्थ की डॉक्टर लारा गोस्के का कहना है कि 2018 में प्रकाशित उनके शोध में यह दिखाया गया है कि जो लोग अक्सर अंडरग्राउंड ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं उनमें फ्लू जैसे लक्षण दिखने की संभावना ज्यादा रहती है.
दूरी बनाकर रखना, मास्क पहनना और सतह को छूने ने बचना (अगर छूते हैं तो हाथ धोना) आपके संक्रमित होने के जोखिम को कम कर सकता है.
सवारियों के लिए सलाह
इसे लेकर ब्रिटेन की सरकार ने अपने देश के लोगों को जो सलाह दी हैं वो दूसरी जगहों पर भी काम में आ सकती हैं. वहाँ की सरकार ने कहा कि लोगों को सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने से पहले दूसरे सभी विकल्पों पर विचार कर लेना चाहिए. अगर वो पैदल, साइकिल या फिर खुद ड्राइव कर के नहीं जा सकते तब उन्हें कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए.
- वैसे वक्त सफर करने से बच सकते हैं जब बहुत भीड़ होती हो.
- वो रूट ले सकते हैं जो कम व्यस्त हो और बार-बार गाड़ी बदलने से बचे.
- गाड़ी में चढ़ने से पहले सभी लोगों के उतरने का इंतजार करें.
- कम से कम एक मीटर की दूरी लोगों से बना कर रखें.
- यात्रा से लौटने के बाद कम से कम 20 सेकेंड तक हाथ धोए.
इसके अलावा मास्क पहनना तो अनिवार्य है ही.
हवाई जहाज़ में कितना जोखिम?
यह आम धारणा है कि हवाई जहाज़ में आपके बीमार पड़ने की संभावना अधिक होती है क्योंकि आप "बासी" हवा में सांस लेते हैं.
वास्तव में हवाई जहाज़ में किसी सामान्य दफ्तर से कहीं बेहतर गुणवत्ता की हवा आपको मिल सकती है. ट्रेन और बस की तुलना में तो निश्चित तौर पर आपको ज़्यादा स्वच्छ हवा हवाई जहाज़ में मिलती है.
इंडियाना के पुर्ड्यू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर किंग्यान चेन का आकलन है कि हवाई जहाज़ में हर दो-तीन मिनट के अंदर हवा बदल जाती है जबकि किसी एयर कंडिशन इमारत में इसमें 10 से 12 मिनट लगते हैं.
ज्यादातर हवाई जहाजों में उच्च गुणवत्ता वाला एयर फिल्टर सिस्टम लगा होता है जिसे हेपा कहते हैं.
यह किसी भी सामान्य एयर कंडीशनर की तुलना में हवा के छोटे-छोटे कणों को कैप्चर कर सकता है. कुछ वायरस इसमें हो सकते हैं.
यह बाहर से ताज़ी हवा केबिन के अंदर लाने में मदद करता है जबकि कई एयर कंडिशनर ऊर्जा बचाने के लिए कमरे में मौजूद हवा को घुमाते रहते हैं.
हालांकि हवाई जहाज में एक समस्या यह ज़रूर है कि उसमें दूसरे सवारियों के साथ दूरी बनाने में परेशानी होती है, जिससे संक्रमण का ख़तरा काफी बढ़ जाता है.
किसी खास तरह के वाहन में दूसरे वाहन की तुलना में ज्यादा जोखिम की बात करना थोड़ा मुश्किल काम है क्योंकि जोखिम को घटाने और बढ़ाने में कई तरह की वजहें होती हैं.
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