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रूस ने कोरोना वायरस की क्या पहली वैक्सीन बना ली है?
नोवल कोरोना वायरस से अब तक विश्व में एक करोड़ 28 लाख से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और इस वायरस से होने वाली बीमारी कोविड-19 के कारण क़रीब 5 लाख 55 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है.
इस वायरस के क़रीब सात महीने लंबे प्रकोप के बाद रूस ने यह दावा किया है कि 'उनके वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन बना ली है.'
रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक ने अनुसार, इंस्टिट्यूट फोर ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी के डायरेक्टर वादिम तरासोव ने कहा है कि "दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है."
उन्होंने बताया कि 'मॉस्को स्थित सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटी सेचेनोफ़ ने ये ट्रायल किए और पाया कि ये वैक्सीन इंसानों पर सुरक्षित है. जिन लोगों पर वैक्सीन आजमाई गई है, उनके एक समूह को 15 जुलाई और दूसरे समूह को 20 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी.'
यूनिवर्सिटी ने 18 जून को रूस के गेमली इंस्टिट्यूट ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा निर्मित इस वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल शुरू किए थे.
सेचेनोफ़ यूनिवर्सिटी के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी एलेक्ज़ांडर लुकाशेव के अनुसार, 'वैक्सीन ट्रायल के इस चरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वैक्सीन इंसानों के लिए सुरक्षित है या नहीं. ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. हमने पाया है कि ये वैक्सीन सुरक्षित है.'
लुकाशेव ने कहा है कि वैक्सीन के व्यापक उत्पादन के लिए आगे क्या-क्या तैयारियाँ करनी हैं, इसकी रणनीति तय की जा रही है.
वादिम तरासोव ने कहा, "महामारी के दौर में सेचेनोफ़ यूनिवर्सिटी ने ना केवल एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में, बल्कि एक वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान केंद्र के रूप में भी काम किया, जो दवाओं जैसे महत्वपूर्ण और जटिल उत्पादों के निर्माण में शामिल होने में सक्षम है."
पूरी दुनिया में अब तक 70 लाख से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद पूरी तरह ठीक हो चुके हैं.
इसे देखते हुए दुनिया भर के वैज्ञानिक और हेल्थकेयर से जुड़े अन्य संस्थान कोविड-19 की वैक्सीन के उत्पादन और उसके डिवेलपमेंट को जल्द से जल्द पूरा करने की तमाम कोशिशें कर रहे हैं.
गिलिएड साइंसेज़, ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता और अमरीकी बायोटेक कंपनी मॉडर्ना - कोविड-19 की वैक्सीन विकसित करने में फ़िलहाल सबसे आगे हैं. ब्रिटेन की ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी में बनी वैक्सीन के शुरुआती नतीजे भी उत्साहवर्धक रहे हैं.
वहीं, भारत में बनी वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल भी चल रहे हैं.
हालांकि, गिलिएड साइंसेज़ ने पहले कहा था कि एक विश्लेषण से पता चला है कि 'उनकी एंटी-वायरल दवा रेमडेसिविर ने गंभीर रूप से बीमार कोविड-19 रोगियों में मृत्यु के जोखिम को कम करने में मदद की', लेकिन सावधानी बरतते हुए कंपनी ने यह भी कहा कि 'रेमडेसिविर के लाभ की पुष्टि करने के लिए कठोर क्लीनिकल ट्रायल करने की आवश्यकता है.'
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