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अमरीका टिकटॉक समेत कई चीनी ऐप्स पर बैन लगाने के लिए सोच रहा: माइक पॉम्पियो- आज की बड़ी ख़बरें
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि 'अमरीका भी निश्चित रूप से टिकटॉक सहित अन्य चीनी सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगा रहा है.'
अमरीकी न्यूज़ फॉक्स को दिए इंटरव्यू में माइक पॉम्पियो ने कहा, "मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के काम में दख़ल नहीं देना चाहता, लेकिन हम निश्चित रूप से इस बारे में विचार कर रहे हैं."
वहीं चीनी कंपनी टिकटॉक ने कहा है कि 'चीन की कम्युनिस्ट सरकार की ओर से हॉन्ग कॉन्ग में नए सुरक्षा क़ानून लागू किए जाने के बाद कंपनी ने वहाँ से अपना संचालन रोकने का निर्णय लिया है.'
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, कंपनी अगले कुछ दिनों में अपना काम समेटकर हॉन्ग कॉन्ग से निकल सकती है. चीनी कंपनी बाइटडांस ने टिकटॉक को अन्य देशों में अपनी पहुँच बढ़ाने के लिए तैयार किया था जिसे हाल ही में भारत सरकार ने सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया है.
चीन में यह कंपनी टिकटॉक जैसे ऐप को डॉयिन नाम से चलाती है. वॉल्ट डिज़नी के पूर्व सीईओ कैविन मेयर फ़िलहाल टिकटॉक के सर्वोच्च अधिकारी हैं और उन्होंने हाल ही में कहा था कि 'टिकटॉक इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स का डेटा चीन में स्टोर नहीं किया जाता.'
हॉन्गकॉन्ग में चीन द्वारा विवादित सुरक्षा क़ानून थोपे जाने के बाद से फ़ेसबुक, वॉट्सऐप, ट्विटर, गूगल और टेलीग्राम, सभी बीते हफ़्ते में घोषणा कर चुके हैं कि वो हॉन्गकॉन्ग के अपने संचालन में बड़े बदलाव करने वाले हैं.
साली क्लासेज़ ऑनलाइन हैं तो वापिस जाएंगे विदेशी छात्र- अमरीका
अमरीका ने कहा है कि विदेशी छात्रों को यहाँ से अपना बोरिया बिस्तर समेटना होगा, अगर उनकी यूनिवर्सिटी में क्लास पूरी तरह ऑनलाइन हो गए हैं.
अगर ऐेसे छात्र किसी ऐसे कोर्स में दाखिला लेते हैं, जिनमें उन्हें व्यक्तिगत रूप से ट्यूशन लेने जाना पड़े, तो इस स्थिति में वे अमरीका में रह सकते हैं.
अमरीका की इमिग्रेशन एंड कस्टम्स इन्फ़ोर्समेंट (आईसीई) एजेंसी ने कहा है कि अगर छात्रों ने इस नियम का उल्लंघन किया, तो उन्हें देश से निकाला जा सकता है.
अमरीका में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण कई यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन क्लासेज़ हो रहे हैं. अभी ये पता नहीं चल पाया है कि अमरीका के इस फ़ैसले से कितने छात्र प्रभावित होंगे.
हर साल बड़ी संख्या में विदेशी छात्र पढ़ने के लिए अमरीका आते हैं. कई विश्वविद्यालयों के लिए ये कमाई का बड़ा ज़रिया है. हार्वर्ड ने भी कहा है कि नए शैक्षणिक सत्र के लिए कोर्स के निर्देश छात्रों को ऑनलाइन भेजे जाएँगे. इनमें वो भी छात्र शामिल हैं, जो फ़िलहाल यूनिवर्सिटी में रह रहे हैं.
आईसीई ही द स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम चलता है. पहले छात्रों को ये अनुमति थी कि वे अमरीका में रहते हुए ऑनलाइन कोर्स कर सकते हैं.
लेकिन अब नए फ़रमान के मुताबिक़ ऐसे छात्र अमरीका में नहीं रह सकते हैं. लेकिन उनके पास ऐसे कोर्स करने का विकल्प रहेगा, जिसमें व्यक्तिगत रूप से ट्यूशन की आवश्यकता है.
नया नियम एफ़-1 और एम-1 वीज़ाधारकों के लिए होगा. ये वीज़ा एकेडेमिक और वोकेशनल स्टूडेंट्स के लिए होता है. एजेंसी के डेटा के मुताबिक़ अमरीकी विदेश मंत्रालय ने 2019 के वित्त वर्ष में 388,839 एफ़ वीज़ा और 9.518 एम वीज़ा जारी किए हैं.
अमरीकी वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक़ विदेशी छात्रों ने 2018 में देश की अर्थव्यवस्था में 45 अरब डॉलर का योगदान दिया था.
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