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हॉन्ग-कॉन्ग के लिए क़ानून को लेकर चीन-कनाडा आमने-सामने
चीन ने कनाडा जाने वाले अपने नागरिकों के लिए एडावाइज़री जारी की है.
समचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सोमवार को चीन ने कनाडा जाने वाले अपने नागरिकों को एहितायात बरतने की चेतावनी दी है.
चीन का कहना है कि चीन-कनाडा तनाव के बीच कनाडा की क़ानून लागू करने वाली संस्थाओं के लगातार हिंसक कार्रवाइयों के कारण उसने ऐसा किया है.
कनाडा स्थित चीनी दूतावास के वीचैट ऐप पर ये चेतावनी जारी की गई है. बयान में कहा गया है कि चीनी नागरिकों को स्थानीय सुरक्षा के हालात का ख़ास ध्यान रखना चाहिए. लेकिन इसमें चीन ने ये नहीं बताया है कि वो कौन-सी हिंसक कार्रवाइयों की बात कर रहा है.
वहीं समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार चीन ने कहा है कि वो हॉन्ग कॉन्ग के नए सुरक्षा क़ानून के मामले में कनाडा की प्रतिक्रिया का जवाब देगा.
समाचार एजेंसी के अनुसार इससे चीन और कनाडा के बीच चल रहे राजनयिक संकट के और गहरा जाने का ख़तरा है
कनाडा ने पिछले हफ़्ते हॉन्ग-कॉन्ग के साथ अपने प्रत्यर्पण संधि को स्थगित कर दिया था और सेना की ज़रूरतों से जुड़े कई साज़ोसामान के निर्यात पर भी पाबंदी लगा दी थी. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की थी.
चीन ने जब से ये नया सुरक्षा क़ानून पारित किया है तब से पश्चिम के कई देश इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठा चुके हैं. लेकिन चीन पर इसका ज़्यादा असर होता नहीं दिख रहा है.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने अपने ताज़ा बयान में कहा है, "चीन कड़े शब्दों में इसकी निंदा करता है और इस मामले में आगे भी जवाब देने का अधिकार रखता है. और इसके जो भी परिणाम होंगे इसके लिए कनाडा ज़िम्मेदार होगा. चीन पर किसी तरह का दबाव डालने की कोशिश कभी सफल नहीं होगी."
चीनी प्रवक्ता ने हॉन्ग-कॉन्ग के नए सुरक्षा क़ानून का बचाव करते हुए कहा, "कनाडा की ग़लत प्रतिक्रिया और उसने जो क़दम उठाए हैं वो इस तथ्य की अनदेखी कर रहे हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून दरअसल 'एक देश, दो सिस्टम' के प्रावधान को लंबे समय में स्थायित्व के लिए मदददगार साबित होगा."
चीनी प्रवक्ता ने आगे कहा, "चीन कनाडा से आग्रह करता है कि वो अपनी ग़लती को फ़ौरन ठीक करे और चीन और कनाडा के संबंधों को और नुक़सान पहुंचाने से बचाने के लिए हॉन्ग-कॉन्ग और चीन के आंतरिक मामलों में किसी तरह का दख़ल देना बंद करे."
जब से कनाडा ने चीन की कंपनी ख्वावे की सीफ़ओ (चीफ़ फ़ाइनेंशियल ऑफ़िसर) मेंग वांग्ज़ो को दिसंबर 2018 में गिरफ़्तार किया था, उसके बाद से चीन और कनाडा के राजनियक संबंध ख़राब होने लगे थे. चीन ने कनाडा के दो नागिरिकों को हिरासत में ले लिया था जिनमें से एक पूर्व राजनयिक थे.
क्या है हॉन्ग कॉन्ग का नया सुरक्षा क़ानून
इस क़ानून का पूरा मसौदा फिलहाल उपलब्ध नहीं है लेकिन अब तक जो जानकारी मिली है उसके अनुसार इस क़ानून में इन सभी बातों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है -
- संबंध तोड़ना यानी चीन से अलग होना
- केंद्रीय सरकार के शासन को न मानना या उसकी ताकत को कमज़ोर करना
- आतंकवाद, लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा करना या फिर उन्हें डराना धमकाना
- विदेशी ताकतों से सांठगांठ करना
सरकारी मीडिया में इससे जुड़े कई विवरण सामने आए हैं, जैसे -
- चीन, हॉन्ग-कॉन्ग में एक नया राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यालय बनाएगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के ख़िलाफ़ ख़ुफ़िया जानकारी इकट्ठा करेगा और यहां होने वाले "अपराधों को देखेगा".
- कुछ मामलों की सुनवाई चीन में कराने के लिए यह कार्यालय उन मामलों को वहां भेज सकेगा. हालांकि चीन ने कहा है कि उसके पास केवल "सीमित" मामलों की सुनवाई चीन में कराने का अधिकार होगा.
- इसके अलावा, चीन के नियुक्त किए गए सलाहकार के साथ क़ानून लागू करने के लिए हॉन्ग कॉन्ग को अपना राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग भी बनाना होगा.
- चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अपराधों के लिए अधिकतम सज़ा, आजीवन कारावास हो सकती है.
सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा जिस पर विवाद है, वो ये है कि इस क़ानून की व्याख्या कैसे करनी है इसका पूरा अधिकार चीन के पास होगा न कि हॉन्ग-कॉन्ग की किसी न्यायिक संस्था या नीति संस्था के पास. यदि हॉन्ग-कॉन्ग के किसी क़ानून के साथ उस क़ानून का संघर्ष होता है तो उस स्थिति में चीन के क़ानून को ही प्राथमिकता मिलेगी.
ये क़ानून 1 जुलाई को लागू हुआ है. ब्रितानी शासकों के इस प्रदेश को चीन के हवाले करने की ये 23वीं सालगिरह थी.
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