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चीनी फ़ोन कंपनियों ख़्वावे और ज़ेडटीई को अमरीका ख़तरा क्यों मानता है
अमरीका ने कई मौक़ों पर चीन की कंपनियों ख़्वावे और ज़ेडटीई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया है. कई बार इस बात को लेकर भी आशंका जताई गई है चीनी सरकार इस कंपनी के उपकरणों की मदद से दूसरे देशों की खुफ़िया जानकारी हासिल कर रही है.
बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने अमरीका सरकार की संचार मामलों की नियामक संस्था फ़ेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन या एफ़सीसी के चेयरमैन अजित पई से इसी संबंध में विस्तार से बात की.
आप इन दो कंपनियों के खिलाफ़ सुबूत की बात करते हैं तो क्या आप बता सकते हैं कि आप इन दो कंपनियों के ख़िलाफ़ कैसे सुबूतों की बात कर रहे हैं.
बिल्कुल. आदेश में ये बात ज़्यादा विस्तार में बताई गई है लेकिन कम शब्दों में कहें तो हमें मालूम हुआ है कि इन दो कंपनियों के चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और चीन की सेना के साथ संबंध हैं.
इसके अलावा, चीन के कानून के मुताबिक अगर चीन की इंटेलिजेंस सर्विसेज़ चीन की किसी कंपनी जैसे ख़्वावे और ज़ेडटीई से कोई जानकारी मांगती हैं तो उन्हें वो जानकारी देनी होगी, साथ ही वो ये भी नहीं बता सकतीं कि उनसे ये जानकारी मांगी गई. अगर आप अमरीका के ग्रामीण इलाके में कोई टेलिफ़ोन कंपनी चलाते हैं और आपने अपने नेटवर्क में ख़्वावे के सामान या उसकी सेवाओं का इस्तेमाल किया है, तो आपकी कभी नहीं पता चलेगा कि चीन की इंटेलिजेंस सर्विसेज़ की ओर से मैलवेयर के इस्तेमाल की मांग की गई थी या फिर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की चोरी की गई. ऐसा खतरा अमरीका नहीं ले सकता और एफसीसी इसे बर्दाश्त करने को तैयार नहीं.
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अमरीका में अभी इन दो कंपनियों का कितना सामानइस्तेमाल होता है?
ये बहुत अच्छा सवाल है. मेरे नेतृत्व में हमने अमरीका में टेलीकॉम कंपनियों से कहा है कि वो हमें बताएं कि उनके नेटवर्क में ख़्वावे और ज़ेटीई का कितना सामान है. हमें अभी-अभी ये जानकारी मिली है. जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ, मेरे दफ़्तर में लोग इस बारे में जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं. मेरे पास जब जानकारी आएगी तब मैं इस सवाल पर अपनी सोच बना पाऊंगा, लेकिन दुर्भाग्य से अभी मैं इस बारे में कोई शुरुआती आकलन नहीं दे सकता.
क्या आपकी दक्षिण एशिया में नेताओं से इस बारे मे बातहुई है - भारत में, पाकिस्तान में, नेपाल या बांग्लादेश में.
हां हुई है. जैसे फ़रवरी में मैं भारत गए एक प्रतिनिधि मंडल का हिस्सा था. मुझे ट्राई प्रमुख राम शर्मा, सेक्रटरी (अंशु)प्रकाश से मुलाकात का मौका मिला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से थोड़ी देर हुई मुलाकात में मैंने 5G स्ट्रैटजी पर साथ काम करने के महत्व पर बात की. भारत सरकार के साथ मेरी बातचीत हमेशा बेहद सकारात्मक रही है. दोनो लोकतंत्र हैं और लंबे समय से दोस्त हैं, खासकर टेलीकॉम नीति को लेकर. भारत और अमरीका की साझा प्राथमिकताएं हैं और मुझे साथ काम करने में खुशी होगी.
भारत ने 59 चीनी ऐप्स पर पाबंदी लगाई है. आपकी इसपर क्या सोच होगी.
ये एक महत्वपूर्ण कदम है. मैंने देखा कि दो दिन पहले ये आदेश दिया गया. और ये दर्शाता है कि भारत में, दक्षिण एशिया में, पूरी दुनिया में चीन की टेक कंपनियों को लेकर,सामान बेचने वाली ऐसी कंपनियों को लेकर जिन पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का असर है, चिंता बढ़ रही है. खासकर ऐसे वक्त जब जब ये कम्युनिकेशन नेटवर्क और कंपनियां और प्लेटफॉर्म आपस में जुड़े हुए और राष्ट्रीय सीमाओं की परवाह नहीं करते. इसका आर्थिक असर होता है. ये सभी के लिए खतरा है. भारत सरकार के लिए ये खतरा है, भारत के लोगों के लिए ये खतरा है. ये प्रतिबंध आगे कैसे बढ़ता है, इसे हम बहुत गौर से देखेंगे, और हम ऐसे विषयों पर भविष्य में साथ काम करना चाहेंगे.
इन कंपनियों को अनुमति दिए जाने पर भारत जैसे देशों सेआप क्या कहेंगे जहां 5G ट्रायल को लेकर बात हो रही है.
5G अर्थव्यवस्था के बेहद महत्वपूर्ण पक्ष की बुनियाद होंगे, इसलिए ये ऐसा विषय है जिसपर हम जोखिम नहीं ले सकते, खासकर तब जब 5G अभी शुरुआती कदम आगे बढ़ा रहा है. ये वक्त है उन कदमों को उठाने का जिनसे कहीं ऐसा न हो कि आपके नेटवर्क में असुरक्षित सामान और सर्विसेज़ का इस्तेमाल हो जिन्हें बाद में हटाने और बदलने में भारी खर्च और वक्त लगे. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने साफ़ कर दिया है कि वो ऐसे हर मौके का फ़ायदा उठाना चाहेगी जिससे उसे सामरिक फ़ायदा हो. ये किसी भी देश के पक्ष में नहीं होगा - चाहे वो अमरीका हो, या अगर मैं कहूँ, भारत.
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