चीनी ऐप बैन करने के भारत के फ़ैसले को अमरीकी विदेशी मंत्री माइक पॉम्पियो ने सराहा : आज की बड़ी ख़बरें

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने भारत की ओर से 59 मोबाइल ऐप्स को बैन करने के क़दम की सराहना की है. उन्होंने कहा है कि भारत ने अपनी 'सुरक्षा' को देखते हुए ये क़दम उठाए हैं.

पॉम्पियो ने पत्रकारों से कहा, "चीन के कुछ मोबाइल ऐप्स पर भारत द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का हम स्वागत करते हैं." उन्होंने कहा कि इस क़दम से "भारत की एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूती मिलेगी."

अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा, "चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की क्रूरता बाक़ी दुनिया पर भी असर डालती है. हम भारत द्वारा चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सर्विलांस स्टेट के ख़तरे को देखते हुए कुछ मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने का स्वागत करते हैं. सुरक्षित ऐप्स को बढ़ावा देने का क़दम भारत की संप्रभुता को बढ़ावा देगा. इससे भारत की एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मज़बूती मिलेगी, जैसा कि भारत सरकार ने ख़ुद कहा है."

भारत सरकार ने 59 ऐप्स को देश की सुरक्षा, संप्रभुता और एकता व यूज़र्स के डेटा एवं निजता के लिए हानिकारक बताते हुए प्रतिबंधित कर दिया है. इनमें टिकटॉक, शेयरइट और कैमस्कैनर जैसे पॉप्युलर चीनी ऐप शामिल थे.

पिछले दिनों पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की जान जाने के बाद भारत में कुछ समूहों और सोशल मीडिया यूज़र्स ने चीनी सामान के बहिष्कार की मुहिम छेड़ी थी.

प्रियंका गांधी को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस

अधिकतर चीनी ऐप्स को प्रतिबंधित करने का भारत सरकार का फ़ैसला इसी बीच आया है जिसे लेकर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है और इस क़दम को अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन बताया है.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को 35 लोधी एस्टेट स्थित सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस दिया गया है. प्रियंका गांधी को एक अगस्त, 2020 तक बंगला खाली करने की मोहलत दी गई है.

हाउसिंग और शहरी मामलों के मंत्रालय ने इस बाबत प्रियंका गांधी को नोटिस भेजा है. प्रियंका गांधी से एसपीजी सुरक्षा वापस ले कर जेड प्लस सुरक्षा दी गई है. एसपीजी कवर में सुरक्षा के मद्देनजर सरकारी बंगले का प्रावधान थी, जेड प्लस में बंगले का प्रावधान नहीं है.

प्रियंका गांधी पिछले आम चुनाव से ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं. इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती रही हैं.

चीन ने अब अमरीकी मीडिया को बनाया निशाना

चीन के विदेश मंत्री ने बताया है कि चीनी सरकार ने चीन में काम कर रहे कुछ अमरीकी मीडिया संस्थानों से उनकी कार्य-प्रणाली से संबंधित ज़रूरी दस्तावेज़ पेश करने को कहा है.

चीन सरकार ने इन अमरीकी संस्थानों को सात दिन का समय दिया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान के अनुसार, एसोसिएटिड प्रेस, नेशनल पब्लिक रेडियो, सीबीएस और न्यूज़ एजेंसी यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल से सात दिन में माँगी गई सूचनाएं देने को कहा गया है.

चीन के समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' के एडिटर ने बुधवार सुबह इस संबंध में एक ट्वीट भी किया था.

उन्होंने लिखा था कि "चीन सरकार उनके यहाँ काम कर रहे अमरीकी मीडिया संस्थानों पर पारस्परिक प्रतिबंधों की घोषणा करेगी."

इससे पहले अमरीका ने जून महीने में कहा था कि 'वो अन्य चार बड़े चीनी मीडिया संस्थानों को अब से चीन का प्रतिनिधि मानेगा.'

अमरीका और चीन के बीच दो-तरफा खींचतान पिछले कुछ समय से जारी है.

दोनों तरफ से ही एक-दूसरे को परेशान करने वाले कुछ निर्णय लिये गए हैं और कोरोना वायरस महामारी की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है.

‘हॉन्गकॉन्ग में आज़ादी’ के नारे वाला पोस्टर लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए एक शख़्स को चीन द्वारा थोपे गये नए क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया है.

नए क़ानून के तहत पहली गिरफ़्तारी

अधिकारियों के अनुसार, नए क़ानून के तहत ये पहली गिरफ़्तारी है.

ब्रिटिश शासन समाप्त होने की 23वीं सालगिरह मनाने के लिए कुछ प्रदर्शनकारी शहर में एकत्र हुए थे जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पहले पुलिस ने इन लोगों पर मिर्च का स्प्रे किया, बाद में उन्हें वहाँ से खदेड़ दिया गया.

चीन द्वारा हॉन्गकॉन्ग में लागू किया गया ‘राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून’ कथित तौर पर अलगाव, तोड़फोड़ और आतंकवाद में शामिल लोगों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है और इसके तहत जुर्म साबित होने पर आरोपी को जेल में उम्रकैद की सज़ा दी जा सकती है.

जबकि आलोचकों का कहना है कि चीन ने हॉन्गकॉन्ग के लोगों की आज़ादी छीनने के लिए इस विवादित क़ानून को लागू किया है, जिसकी चीन ने कभी गारंटी दी थी.

साल 1997 में हॉन्गकॉन्ग को ब्रिटेन ने चीन को वापस सौंप दिया था और उस वक़्त यह समझौता हुआ था कि चीन कम के कम पचास वर्ष तक हॉन्गकॉन्ग वासियों को प्राप्त कुछ स्वतंत्रताओं की रक्षा करेगा.

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि “चीन ने हॉन्गकॉन्ग के लोगों को 50 साल की आज़ादी का वादा किया था जिसे केवल 23 साल में ही चीन ने तोड़ दिया.”

हालांकि हॉन्गकॉन्ग शहर के नेता कैरी लैम ने कहा है कि ‘2019 में हुए व्यापक हिंसक प्रदर्शनों के बाद इस क़ानून से शहर में स्थिरता वापस लौटने में मदद मिलेगी.’

उन्होंने कहा, “ब्रिटेन के जाने के बाद, ये नया क़ानून चीन और हॉन्गकॉन्ग के संबंधों में अब तक की सबसे बड़ी तब्दीली है. इससे स्थिरता आयेगी.”

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