चीन-भारत तनाव: क्या आपके सैनिक भी मारे गए हैं? चीन ने कुछ यूं दिया जवाब

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन की सीमा लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर दशकों बाद फिर से तनाव है.

सोमवार की रात चीन और भारत की सेना में हिंसक झड़प हुई और भारतीय सेना के 20 जवानों की जान चली गई. ये सभी 16 बिहार रेजिमेंट के जवान थे. पहले तीन जवानों की मौत की ख़बर आई लेकिन बाद में भारतीय सेना ने ख़ुद ही बयान जारी कर बताया कि 17 अन्य जवान गंभीर रूप से ज़ख़्मी थे और उनकी भी मौत हो गई.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने पूरे मामले पर कहा, ''दोनों देशों के सीनियर कमांडरों की बीच बैठक हुई है और तनाव कम करने पर सहमति बनी. हमें लगा कि सब कुछ बातचीत के हिसाब से आगे बढ़ेगा. 15 जून की देर रात चीनी सेना ने अचानक से रुख़ बदल लिया. चीन ने एकतरफ़ा फ़ैसला लेते हुए यथास्थिति को नकार दिया और इसी का नतीजा हुआ कि दोनों तरफ़ से हिंसक झड़प हुई. दोनों तरफ़ के लोग हताहत हुए, जिससे बचा जा सकता था लेकिन चीन ने समझौते का ईमानदारी से पालन नहीं किया.''

20 भारतीय सैनिकों की मौत की ख़बर से भारत की राजनीति गर्म हो गई. विपक्षी पार्टियों ने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामने आएं और जवाब दें. पीएम नरेंद्र मोदी का एक वीडियो संदेश आया और उसमें उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों की शहादत बेकार नहीं जाएगी. प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारतीय सैनिक मारते हुए मरे हैं. मतलब प्रधानमंत्री का कहना था कि केवल भारतीय सैनिकों का ही नुक़सान नहीं हुआ है.

क्या चीनी सैनिक भी मारे गए हैं?

भारतीय मीडिया में भी मंगलवार से ही यह बात चल रही थी कि चीन के सैनिक भी मारे गए हैं. कुछ मीडिया घरानों ने तो अपुष्ट संख्या भी बताई. लेकिन इस पर अब तक कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पाया है. बुधवार को यही सवाल चीनी विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में समाचार एजेंसी पीटीआई ने पूछा कि भारतीय मीडिया में चीनी सैनिकों के हताहत होने की बात कही जा रही है क्या आप इसकी पुष्टि करते हैं?

इस सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजियान ने कहा, ''जैसा कि मैंने कहा कि दोनों देशों के सैनिक ग्राउंड पर ख़ास मसलों को हल करने की कोशिश कर रहे हैं. मेरे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है जिसे यहां जारी करूं. मेरा मानना है और आपने भी इसे देखा होगा कि जब से यह हुआ है तब से दोनों पक्ष बातचीत के ज़रिए विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि सरहद पर शांति बहाल हो सके.''

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ''दुनिया के दो बड़े विकासशील और उभरते बाज़ार वाले देश भारत और चीन के मतभेदों से ज़्यादा साझे हित हैं. दोनों देशों के लिए यह ज़रूरी है कि अपने-अपने नागरिकों के हितों और उम्मीदों के मुताबिक़ संबंधों को सही रास्ते पर आगे बढ़ाएं और किसी सहमति पर पहुंचकर उसका पालन करें. हमें उम्मीद है कि भारतीय पक्ष हमलोग के साथ काम करेगा और दोनों साथ में आगे बढ़ेंगे.''

पीटीआई ने पूछा कि क्या अब यह उम्मीद की जा सकती है कि सरहद पर ऐसी हिंसक झड़प नहीं होगी? इस सवाल के जवाब में चाओ लिजियान ने कहा, ''ज़ाहिर है कि हम अब और टकराव नहीं चाहते हैं.''

गलवान घाटी पर चीन ने पेश किया अपना दावा

पीटीआई ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पूछा कि अभी ग्राउंड पर हालात कैसे हैं? ख़ासकर गलवान घाटी की स्थिति क्या है, जहां सब कुछ हुआ है. गलवान घाटी को लेकर अब तक कोई विवाद नहीं था अचानक से यहां समस्या कैसे खड़ी हो गई? अब पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने अपने बयान में कहा है कि गलवान घाटी की संप्रभुता हमेशा से चीन के पास रही है लेकिन इस इलाक़े को लेकर तो अब कोई विवाद नहीं था. आप इस पर क्या कहेंगे?

इन सवालों के जवाब में चाओ लिजियान ने कहा, ''आपके पहले सवाल का जवाब है कि भारत और चीन सैन्य और राजनयिक स्तर पर बात कर रहे हैं. तथ्य बिल्कुल सीधा है. जो कुछ भी हुआ है वो एलएसी पर चीन की तरफ़ हुआ है. इसमें चीन को कुछ भी साबित करने की ज़रूरत नहीं है.''

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन का गलवान घाटी पर दावा स्वीकार्य नहीं है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चाओ लिजियान से पूछा कि जब चीन और भारत में मसले को बातचीत के ज़रिए सुलझाने की सहमति बन गई थी तब भी यहां तनाव की स्थिति क्यों है? हालात को नियंत्रण में रखने की ज़िम्मेदारी किसके पास है, विदेश मंत्रालय के पास या सेना के पास?

इस सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ''सीमा पर तनाव कम करने के लिए चीन और भारत राजनयिक और सैन्य स्तर पर बात कर रहे हैं. छह जून को दोनों पक्षों में कमांडर स्तर की बात हुई थी. इस बातचीत में दोनों देश सहमति पर पहुंचे थे कि शांतिपूर्ण तरीक़े से समाधान तक पहुंचना है. लेकिन अचानक से 15 जून को भारतीय सैनिकों ने सहमति का उल्लंघन किया और अवैध गतिविधियों के लिए एलएसी पार हो गए. इन्होंने चीनी सैनिकों को उकसाया और हमला किया. यही वजह रही कि दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई. चीन ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और कहा है कि भारत अपने सैनिकों को सख़्ती से रोके. कोई भी एकतरफ़ा कार्रवाई फिर से हुई तो मामला और जटिल होगा. चीन और भारत इस बात पर सहमत हैं कि संवाद के ज़रिए विवादों का समाधान खोजा जाएगा. चीन और भारत राजनयिक और सैन्य दोनों स्तरों पर बात कर रहे हैं.''

क्या चीन ने भारत को धोखा दिया?

सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने पूरे विवाद को लेकर ट्विटर पर लिखा है कि कम्युनिस्ट तानाशाही शासन में चीन ठग स्टेट बन गया है. चेलानी ने लिखा है, ''चीन न तो द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान करता है और न ही अंतरराष्ट्रीय नियमों का. सच यह है कि चीन द्विपक्षीय समझौतों को दूसरे देशों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करता है और ख़ुद पर कभी लागू नहीं करता है. भारत इसी चंगुल में फंसा हुआ है. भारत के विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से द्विपक्षीय संबंध बुरी तरह से प्रभावित होंगे. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन की आक्रामकता से सभी द्विपक्षीय संबंध टूट जाएंगे.''

चेलानी ने लिखा है, ''1993 से अब तक चीन के साथ भारत के पाँच सीमा प्रबंधन समझौते हुए हैं और पाँचों पर बहुत ही धूमधाम के साथ हस्ताक्षर किए गए थे. लेकिन किसी से भी चीन के अतिक्रमण को रोकने में मदद नहीं मिली. यह चीन की हालिया आक्रामकता है. चीन ने चुपके से भारत के हिस्से को अपने कब्ज़े में ले लिया है और कह रहा है कि यह हमेशा से उसका हिस्सा रहा है. चीन पहली बार गलवान घाटी पर दावा कर रहा है. 1962 के युद्ध के बाद से गलवान घाटी और आसपास के सभी सामरिक ऊंचाइयों पर चीन ने कभी घुसपैठ नहीं की थी. भारत ने इन ठिकानों को बिना सैनिकों के छोड़ बड़ी ग़लती की थी. ये इलाक़े सामरिक रूप से बहुत ही अहम हैं.''

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