अमरीका: जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद काले-गोरे पर सियासत गर्म
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Author, विनीत खरे
पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन से
अमरीका के मिनेपॉलिस शहर समेत कई जगहों पर सड़कों पर लोगों का गुस्सा दिख रहा है.
लोगों की नाराज़गी एक वीडियो क्लिप के वायरल होने के बाद सामने आई है जिसमें एक गोरा पुलिस अधिकारी जॉर्ज फ़्लॉयड नाम के एक निहत्थे काले व्यक्ति की गर्दन पर घुटना टेककर उसे दबाता दिखता है. इसके कुछ ही मिनटों बाद 46 साल के जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत हो गई.
वीडियो में देखा जा सकता है कि जॉर्ज और उनके आसपास खड़े लोग पुलिस अधिकारी से उन्हें छोड़ने की मिन्नतें कर रहे हैं.
पुलिस अधिकारी के घुटने के नीचे दबे जॉर्ज बार-बार कह रहे हैं कि "प्लीज़, आई कान्ट ब्रीद (मैं सांस नहीं ले पा रहा)". यहीउनके आख़िरी शब्द बन गए.
इस घटना की जांच जारी है हालांकि मामले के बारे में पूरी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है. जॉर्ज की गर्दन पर घुटना रखने वाले पुलिस अधिकारी डेरेक शॉविन को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन पर हत्या के आरोप लगाए गए हैं.
इस वीडियो के सामने आने के बाद कई लोगों में नाराज़गी है. इसे लेकर मिनेसोटा शहर समेत अमरीके के कई इलाक़ों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
नेशनल एसोसिएशन फ़ॉर द एडवांमेन्ट ऑफ़ कलर्ड पीपल ने एक बयान जारी कर कहा है कि, "ये हरकतें हमारे समाज में काले लोगों के ख़िलाफ़ एक ख़तरनाक मिसाल बनाती हैं जो नस्लीय भेदभाव, ज़ेनोफ़ोबिया और पूर्वाग्रह से प्रेरित है."
इस घटना के बाद अब अमरीका में नस्लीय हिंसा के इतिहास पर चर्चा छिड़ गई है. काले लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस की बर्बरता के मामलों को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है.
पुलिस द्वारा की गई हिंसा के मामलों पर नज़र रखने वाली वेबसाइट mappingpoliceviolence.org के अनुसार, "साल 2013 से 2019 के बीच पुलिस के हाथों हुई 99 फीसदी हत्याओं के मामले में अधिकारियों पर कोई आरोप नहीं लगाए गए."
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्ज फ़्लॉयड के परिवार को "सांत्वना" दी है. लेकिन उनकी एक टिप्पणी के कारण उनकी कड़ी आलोचना हो रही है. उन्होंने लिखा "जब लूट करना शुरू होता है तो उसके बाद शूट करना भी शुरू होता है. और यही वो कारण है कि मिनेपॉलिस में बुधवार रात को एक व्यक्ति को गोली मार दी गई". हालांकि बाद में ट्रंप ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि ये बयान नहीं ये तथ्य है.
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अमरीका में ये पहला वाकया नहीं जब किसी काले व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी हो.
इससे पहले फरवरी 23 को कथित तौर पर हथियारबंद गोरों ने 25 साल के अहमद आर्बेरी का पीछा कर उन्हें गोली मार दी थी.
मार्च 13 को ब्रेओना टेलर की उस वक्त हत्या कर दी गई थी जब कथित तौर पर एक गोरे पुलिस अधिकारी ने उनके घर पर छापा मारा था.
मिनेपॉलिस के मेयर जेकब फ्रे ने एक ट्वीट कर कहा है, "अमरीका में काले समुदाय से होने का मतलब मौत की सज़ा के समान नहीं होना चाहिए."
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यहां सोशल मीडिया पर #BlackLivesMatter और #JusticeforGeorgeFloyd हैशटैग ट्रेंड कर रहे है.
सड़कों पर लोग जॉर्ज फ़्लॉयड के आख़िरी शब्द "आई कान्ट ब्रीद" गुनगुना रहे हैं जो एक मंत्र-सा बन गया है.
घटना नई, लेकिन मुद्दा पुराना
पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने बयान में एक अधेड़ उम्र के अफ्रीकी अमरीकी व्यवसायी की बात दोहराई है. उन्होंने लिखा, "मैं आपको बताना चाहता हूं कि मिनेसोटा में जॉर्ज फ़्लॉयड के साथ हुई घटना दुखद थी. मैंने वो वीडियो देखा और मैं रोया. इस वीडियो ने एक तरह से मुझे तोड़ कर रख दिया."
ओबामा ने कहा, "2020 के अमरीका में ये सामान्य नहीं होना चाहिए. ये किसी सूरत में सामान्य नहीं हो सकता."
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इस घटना ने अमरीकी समाज और क़ानूनी एजेंसियों में नस्लीय भेदभाव की गहरी जड़ों पर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है. इसके बाद अब पुलिस के तौर तरीकों, फेडरल सरकार की भूमिका और क्रिमिन जस्टिस सिस्टम पर चर्चा हो रही है.
ये घटना ऐसे वक्त हुई है जब देश में कोरोना के कारण एक लाख से अधिक जानें जा चुकी हैं और 4 करोड़ लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं. कोराना महामारी से देश में सबसे बुरी तरह से प्रभावित लोगों में अल्पसंख्यक काले समुदाय के लोग शामिल हैं.
लंबे समय से अमरीका में पुलिस के हाथों होने वाली मौतें बड़ा मुद्दा रही हैं. इस ख़ास समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस की बर्बरता के मुद्दे पर साल 1966 में ओकलैंड में ब्लैक पैन्थर पार्टी अस्तित्व में आई थी.
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इमेज कैप्शन, माइकल ब्राउन की हत्या के एक साल बाद मिसोरी के फर्गुशन में उनकी याद में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
माइकल ब्राउन की हत्या के बाद ये मुहिम और तेज़ी से बढ़ी और 'ब्लैक लाइव मैटर्स' अस्तित्व में आया- इस प्रोटेस्ट मूवमेन्ट का उद्देश्य था "व्हाइट सुप्रिमेसी को ख़त्म करना और काले लोगों के समुदाय के ख़िलाफ़ हिंसा के मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए स्थानीय स्तर पर एकजुट होना."
साल 2014 में फर्गुशन में एक गोरे पुलिस अधिकारी ने 18 साल के निहत्थे माइकल ब्राउन को गोली मार दी थी. इसके बाद पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे.
मरने वालों की इस सूची में- जमार क्लार्क, जेरेमी मैक्डोल, विलयम चैपनमैन द्वितीय, वॉल्टर स्कॉट समेत कई नाम शामिल हैं.
चौंकाने वाले आंकड़े
वॉशिंगटन पोस्ट ने जनवरी 2015 में पुलिस को गोली से होने वाली हत्याओं का डेटाबेस बनाना शुरू किया था. इस डेटाबेस में अब तक शूटिंग के करीब 4,400 घातक मामले दर्ज किए जा चुके हैं.
इस डेटाबेस के अनुसार "पुलिस काले अमरीकियों को निर्दयतापूर्वक मार देती है."
इसके अनुसार "काले लोग अमरीका की कुल आबादी का मात्र 13 फिसदी हिस्सा हैं लेकिन पुलिस की गोली से मरने वालों की संख्या देखा जाए तो कुल मौतों का एक चौथाई हिस्सा काले लोगों का है. निहत्थे लोगों की मौतों के मामले में कुल मौतों का एक तिहाई काले लोग हैं."
डेटाबेस के अनुसार -
किसी निहत्थे गोरे व्यक्ति की तुलना में किसी निहत्थे काले व्यक्ति के पुलिस द्वारा मारे जाने की संभावना चार गुना अधिक होती है.
पुलिस की गोली से मरने वालों में अधिकतर पुरुष हैं. उनमें से आधे 20 से 40 साल की उम्र के बीच के हैं.
साल 2015 से लेकर अब तक पुलिस की गोली से औसतन हर दिन तीन लोगों की मौत हुई है.
वेबसाइट पर मौजूद डेटा के अनुसार "देश की कुल आबादी का 13 फिसदी होने के बावजूद मरने वालों में 24 फीसदी काले लोग थे. साल 2019 में केवल 27 दिन ऐसे थे जब पुलिस ने किसी को मारा न हो."
रिपोर्ट में 'अफ्रीकी अमरीकी लोगों के ख़िलाफ़ भेदभाव' शीर्षक में लिखा है कि सड़क के किनारे चलने वाले अफ्रीकी अमरीकी लोगों को बाल्टीमोर पुलिस विभाग ने अधिक बार रोका.
"अधेड़ उम्र के एक अफ्रीकी अमरीकी व्यक्ति को चार साल में करीब 30 बार रोका गया. बार-बार उन्हें रोके जाने के बावजूद इन 30 मामलों के दौरान कभी किसी को कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया न ही आपराधिक मामला दर्ज किया गया."
"सड़कों पर पट्रोलिंग के दौरान बाल्टीमोर पुलिस विभाग को अफ्रीकी अमरीकी लोगों की अधिक तलाश रहती है. बाल्टीमोर पुलिस विभाग ने जिन लोगों पर आपराधिक मामले दर्ज कि उनमें से 86 फीसदी लोग अफ्रीकी अमरीकी मूल के हैं. हालांकि वो बाल्टीमोर की कुल आबादी का केवल 63 फीसदी हैं."
काले लोगों के ख़िलाफ़ अधिक भेदभाव के लिए नस्लीय कारणों को एक किनारे कर दिया जाए तो पुलिस का अधिक सैन्यीकरण, पारदर्शिता का अभाव और जबावदेही की कमी इसके अन्य कारण हैं. कुछ जानकार अमरीकी पुलिस में नस्लीय विविधता की कमी को भी एक अहम कारण बताते हैं.
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साल 2016 के आंकड़ों पर नज़र डालें तो कुल 701,000 पूर्णकालिक पुलिस अधिकारियों में 71 फीसदी अफसर गोरे थे जबकि 27 फीसदी अफसर काले या दूसरे रंग के थे.
2017 में आई एक स्टडी को समझने में इससे कैसे मदद मिलती है जिसमें कहा गया था कि काले लोगों की तुलना में पुलिस अफसर गोरे लोगों का अधिक सम्मान करते हैं.
साल 2016 में ही आई एक और स्टडी के अनुसार मादक द्रव्यों को बेचने और इस्तेमाल करने के काम में काले और गोरे अमरीकी समान दर से शामिल हैं लेकिन इस तरह के मामलों में काले लोगों के गिरफ्तार होने की संभावना 2.7 गुना अधिक है.
हालांकि कई लोग दलील देते हैं कि पुलिस की ज्यादती के मामलों का नस्लीय भेदभाव से कोई नाता नहीं है. ऐसे लोग डेनियल शेवर का उदाहरण देते है जिनकी साल 2016 में एक पुलिस अधिकारी ने हत्या कर दी थी.
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वॉशिंगटन पोस्ट में रेडली बाल्को ने लिखा था "जब एक गोरा व्यक्ति किसी गोरे पुलिस अफसर के अत्याचार का वीडियो देखता है तो इससे हमें गुस्सा आ सकता है, हमें दुख होता है या हम असहज होते हैं लेकिन हममें से कोई भी खुद को उस व्यक्ति की जगह पर रखकर नहीं देखता."
"हमें लगता है कि अगर हम विनम्र हैं और तो इस बात की कम संभावना है कि हमारे साथ वही हो जो डेनियल शेवर के साथ हुआ था."
"लेकिन जब कोई काला व्यक्ति ऐसा वीडियो देखता है जिसमें डेरेक शॉविन जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन पर घुटना रखे दबा रहे हैं, तो वो सोचते हैं कि ये मेरा बेटा, भाई या दोस्त हो सकता है."
अमरीका में डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के चुनाव की रेस में संभावित उम्मीदवार जो बिडेन को काले लोगों के मतों का समर्थन मिलता रहा है.
और अब आने वाले राष्ट्रपति चुनावों के मद्देनज़र पुलिस हिंसा का ये मुद्दा एक अहम चुनावी मु्द्दा बन गया है.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.