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रोमिना अशरफ़ी की वजह से ईरान में क्यों है उबाल
उत्तरी ईरान में पुलिस ने एक शख़्स को अपनी 14 वर्षीय बेटी के 'ऑनर किलिंग' के आरोप में गिरफ़्तार किया है. इसके बाद से ईरान में सोशल मीडिया पर एक उबाल देखा जा रहा है.
स्थानीय मीडिया के अनुसार, गिलान प्रांत में रोमिना अशरफ़ी अपने 35 वर्षीय बॉयफ़्रेंड के साथ भाग गई थीं क्योंकि उनके पिता ने उनकी शादी पर आपत्ति जताई थी.
पुलिस ने जोड़े को पकड़ लिया था जिसके बाद रोमिना को उनके घर भेज दिया गया. हालांकि, रोमिना ने पुलिस को बताया था कि घर पर उनकी जान को ख़तरा है.
बीते गुरुवार की रात उनके बेडरूम में उनके पिता ने हमला किया.
समाचार वेबसाइट गिख़बर डॉट आईआर के मुताबिक़, दरांती से रोमिना की गर्दन काट दी गई और फिर उनके पिता घर से बाहर आए. उनके 'हाथ में दरांती थी और उन्होंने जुर्म स्वीकार कर लिया.'
क्या है देश में हाल
बुधवार को कई राष्ट्रीय अख़बारों ने रोमिना की कहानी को अपने पहले पन्ने पर जगह दी.
सुधार-समर्थक एबतेकर नामक अख़बार ने शीर्षक लगाया 'असुरक्षति पैतृक घर', इस ख़बर में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए मौजूदा क़ानून की विफलता पर अफ़सोस जताया गया.
वहीं, फ़ारसी में रोमिना अशरफ़ी के नाम से ट्विटर पर हैशटैग चला जिसको 50,000 से अधिक बार ट्वीट में इस्तेमाल किया गया है. अधिकतर ट्वीट में हत्या और आमतौर पर ईरान के पितृसत्तात्मक प्रकृति की निंदा की गई है.
महिला एवं पारिवारिक मामलों की पूर्व उपाध्यक्ष और वर्तमान में ईरान के महिला अधिकारों को सुरक्षित रखने वाली संस्था की सचिव शाहिंदोख़्त मोलावर्दी ने लिखा, "रोमिना ऑनर किलिंग का शिकार न ही पहली महिला हैं और न ही आख़िरी होंगी."
उन्होंने लिखा है कि इस तरह की हत्याएं तब तक होती रहेंगी जब तक 'स्थानीय और वैश्विक समुदायों में क़ानून का भय नहीं पैदा किया जाता.'
ईरान के शरिया क़ानून के अनुसार, घरेलू हिंसा या 'ऑनर किलिंग' में शामिल पिता या घर के किसी और व्यक्ति के लिए सज़ा के प्रावधान को कम कर दिया गया है.
अगर कोई व्यक्ति अपनी बेटी की हत्या का दोषी पाया जाता है तो उसके लिए तीन से 10 साल की सज़ा का प्रावधान है. वहीं, एक हत्या मामले के लिए मौत की सज़ा या ब्लड मनी देने का प्रावधान है.
अमरीकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान में 'ऑनर किलिंग' का कितना प्रसार है इसका कोई आंकड़ा नहीं है लेकिन पिछले साल मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने रिपोर्ट किया था कि ग्रामीण और आदिवासी इलाक़ों में यह लगातार जारी है.
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